बिजनेस स्टैंडर्ड - क्या परमाणु दायित्व विधेयक लाना जाना सही है?
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 28, 2020 12:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

क्या परमाणु दायित्व विधेयक लाना जाना सही है?
जिरह
बीएस संवाददाता /  March 17, 2010

विधेयक से होंगे फायदे
जी बालाचंद्रन
विजिटिंग फेलो इस्टीटयूट फॉर डिफेंस स्टडीज ऐंड एनालिसिस

विपक्षी खासकर वामपंथियों पार्टी के कड़े तेवर को देखते हुए सरकार ने न्यूक्लियर डैमेज बिल 2010 को पेश करने से अपने हाथ खींच लिए हैं।

हालांकि, सकारात्मक बात यह है कि सरकार अपने इस फैसले पर  पुनर्विचार करेगी और भारत के नागरिक परमाणु कार्यक्रम और भारतीय नाभिकीय उद्योग के हितों को ध्यान में रखकर इस विधेयक को जल्द से जल्द पेश करने की कोशिश करेगी। लेकिन अगर सरकार ऐसा कर पाने में नाकाम रहती है तो इस विधेयक का विरोध करने वालों के लिए यह एक बड़ी सफलता होगी।

इससे पहले कि हम नाभिकीय जवाबदेही विधेयक के भारत में पारित नहीं किए जाने की स्थिति में इसके परिणामों की चर्चा करें, इस बात को समझना जरूरी है कि यह विधेयक उन देशों के सिध्दांतों पर आधारित था जो नागरिक परमाणु पावर प्लांट चला रहे हैं। इन देशों में चीन और रूस भी शामिल हैं जो वामपंथियों के चहेते देशों की श्रेणी में आते हैं।

ध्यान रहे कि जवाबदेही से जुड़े विषयों में संशोधन किए जा सकते हैं, लेकिन विपक्षी पार्टियों का यह आरोप कि सबसे  अधिक बोझ का वहन सरकारी कंपनियों को ही करना पड़ेगा, तर्कसंगत लगता है। यहां पर ऑपरेटर की जवाबदेही कुल आर्थिक नुकसान के मुकाबले अधिक होगी।

लेकिन अहम सवाल यह है कि भारत में इस समय क्या स्थिति और मौजूदा विधेयक के बिना भारतीय लोगों के हितों की रक्षा बेहतर तरीके से हो सकेगी। बिल्कुल नहीं। इस समय भारत में सभी सार्वजनिक एनपीपीएस का परिचालन सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां करती हैं और निजी क्षेत्र को इसमें भागीदारी की अनुमति नहीं है।

लिहाजा, किसी भी दुर्घटना की स्थिति में नुकसान का सारा बोझ सरकारी कंपनियों, भारत सरकार और यहां के आम आदमियों को उठाना पड सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि नाभिकीय जवाबदेही विधेयक के अभाव में क्या कोई निजी कंपनी इस नागरिक परमाणु ऊर्जा कारोबार में उतरेगी। शायद नहीं उतरेगी।

विपक्षी पार्टिर्यों का एक आरोप यह भी है कि विधेयक उपकरण मुहैया करने वालों को किसी भी तरह की जवाबदेही से मुक्त करती है। इसमें कोई शक नहीं कि विधेयक में कुछ इसी तरह का प्रावधान है लेकिन बिना किसी भौगोलिक सीमा के। यह भारतीय, अमेरिकी और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को भी जिम्मेदारी से मुक्त करती है।

कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि इस विधेयक के अभाव में नुकसान के अलावा किसी और चीज की उम्मीद बिल्कुल नहीं है। इतना ही नहीं इस विधेयक की उपस्थिति में भविष्य में भारतीय नाभिकीय क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को काफी धक्का पहुंचेगा, साथ ही इससे भारतीय आपूर्ति उद्योग को भी काफी नुकसान पहुंचेगा।  

पर्याप्त नहीं है विधेयक
करुणा रैना
एनर्जी कैंम्पेनर, ग्रीनपीस इंडिया

सरकार ने कुछ अपरिहार्य कारणों से नाभिकीय जवाबदेही विधेयक (सीएनएल) टाल दिया है। कई लोगों का मानना है किसी तक नीकी खामी की वजह से सरकार ने इस विधेयक को संसद में पेश नहीं किया है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि इस विधेयक को पेश किए जाने को लेकर सरकार की तैयारी अधूरी थी।

सीएनएल का परीक्षण करने पर दो बुनियादी बातें सामने आती हैं: एक एहतियात का सिध्दांत और दूसरा खर्च का लेखा-जोखा। इसमें आश्चर्य की बात यह है कि इन दोनों पहलुओं पर सरकार का रवैया स्प्ष्ट नहीं है। सीएनएल को नाभिकीय खतरों और नाभिकीय बीमा से जुड़े खतरों को प्रकाशित करने के लिए नाभिकीय उद्योग और सरकार की जरूरत नहीं है।

भारत में नाभिकीय प्लांट चलाने के खतरे को हमेशा से कम करके आंका गया है और इसकी वजह है बेबस और लाचार नियामक बोर्ड। डीएई फैसिलिटी के तहत पिछले कुछ सालों में कई छोटी-बडी घटनाएं हुई हैं लेकिन इन घटनाओं की स्वतंत्र जांच के बजाय परमाणु ऊर्जा विभाग इसे कम करके आंकने की कोशिश करता आ रहा है।

सीएनएल में कहीं भी ऑफसाइट और ऑनसाइट डैमेज के लिए पूर्ण बीमा के प्रावधान पर चर्चा नहीं की गई है। यह सुविधा हरेक एनपीपी और नाभिकीय प्रतिष्ठानों लिए मुहैया कराई जाती है। विधेयक में व्यावसायिक  बीमा के तहत हरेक पीपीपी और अन्य नाभिकीय प्रतिष्ठानों पर ऑफसाइट या ऑनसाइट नुकसान की भी सुविधा नहीं दी गई है। इस विधेयक में तीन स्तरों पर बीमा का प्रस्ताव है।

पहले स्तर पर प्लांट का परिचालन करने वाली कंपनी की जवाबदेही 500 करोड रुपये तय की गई है। दूसरे स्तर पर सरकारी जवाबदेही होगी और इसके लिए 2,300 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। तीसरे स्तर पर जब हम अंतरराष्ट्रीय संधि, कन्वेंशन फॉर सप्लीमेंटरी कंपनसेशन (सीएससी) पर हस्ताक्षर करेंगे और तो इससे कुछ फंड की प्राप्ति होगी।

हालांकि, सीएससी थोडा विवादास्पद है, क्योंकि इसमें जो प्रावधान हैं, उसकी कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है। उल्लेखनीय है कि सीएसई पर वर्ष 1997 में हस्ताक्षर हुए हैं लेकिन दस साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद इस पर अब तक अमल नहीं हो पाया है।

चूंकि, सरकार नाभिकीय जवाबदेही विधेयक को अंतरराष्ट्रीय चलन के हिसाब से तय करना चाहती है तो फिर सरकार अमेरिका का अनुसरण नहीं कर रही है जहां पर थर्ड पार्टी को दुर्घटना की स्थिति में 11 अरब डॉलर के बीमा कवर की सुविधा दी गई है?

इसके अलावा अमेरिका में इकोनॉमिक चैनलिंग की भी व्यवस्था है जहां पर दुर्घटना का शिकार व्यक्ति किसी भी अन्य संबंधित पक्ष के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दायर कर सकता है। सीएनएल की दूसरी खामी यह है कि यह हरेक एनपीपी के परिचालन से जुड़े जोखिम खर्च को उत्पादन से जुड़े खर्चे के रूप में सुनिश्चित नहीं करता है।

Keyword: jirah, argument, G Balachandran, institute for defence studies & analysis, karuna raina, greenpeace india,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या वैश्विक सूचकांक में भारांश बढऩे से देश में आएगा निवेश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.