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रोमिंग सुविधा कटने पर मिलेगा मुआवजा!
अदालत से
बीएस /  March 15, 2010

वेस्ट बंगाल कंज्यूमर कमीशन ने वोडाफोन एस्सार ईस्ट लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया और अविजित कुमार सेन को मुआवजा चुकाए जाने का फैसला सुनाया।

अविजित कुमार के फोन की रोमिंग सुविधा उस वक्त कट गई थी जब वह हार्ट के ऑपरेशन के लिए दक्षिण में दूर गए हुए थे। दूरसंचार कंपनी का तर्क था कि यह शिकायत कंज्यूमर फोरम नहीं सुलझा सकता, क्योंकि यह बिल से जुड़ा विवाद है।

उसने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार कंज्यूमर फोरम को बिल से संबद्ध शिकायतें नहीं निपटानी चाहिए और ऐसे मामले इंडियन टेलीग्राफ ऐक्ट के तहत सुलझाए जाने चाहिए। जिला फोरम और राज्य आयोग, दोनों ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

निर्णय में सहानुभूति जताते हुए कहा गया है कि इस मामले में भुक्तभोगी व्यक्ति ने अपने पोस्ट-पेड बिलों का भुगतान कर दिया था और उस स्थिति में उसके फोन की सेवा सीमित करने का कोई कारण नहीं था जब उसे डॉक्टरों और रिश्तेदारों से संपर्क करना था।

सीआरजेड कानून में ढील

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कोस्टल रेग्युलेशन जोन्स (सीआरजेड) से खतरनाक पदार्थों को औद्योगिक इकाइयों को भेजा जा सकेगा, हालांकि सीआरजेड नियमों से संबद्ध संशोधन में ऐसी गतिविधि पूरी तरह निषिद्ध है। 

न्यायालय ने कहा कि बंदरगाहों से खतरनाक पदार्थ औद्योगिक इकाइयों में ले जाने के संबंध में केंद्र सरकार की 1991 की अधिसूचना के लिए 1997 का संशोधन 'संतोषजनक' नहीं था।

न्यायालय ने इस कानून को व्यवहार्य बनाए जाने की कोशिश में उद्योगों को बंदरगाहों से आयातित खतरनाक पदार्थों को अपनी इकाइयों में ले जाने में सक्षम बनाने के लिए इससे संबद्ध अस्पष्ट वाक्यांश की पुन: व्याख्या की।

'एम. निजामुद्दीन बनाम केमप्लास्ट सन्मार लिमिटेड' मामले में 600 करोड़ रुपये के संयंत्र से जुड़ी पर्यावरण संबंधी आपत्तियों को खारिज कर दिया। इस केमिकल संयंत्र के खिलाफ लोगों द्वारा कई जनहित याचिकाएं मद्रास उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गईं थीं।

सर्वोच्च न्यायालय ने सभी आपत्तियों को सीआरजेड नियमों के आधार पर ठुकरा दिया और संयंत्र को उत्पादन बरकरार रखने की अनुमति दी गई। अदालती निर्णय में केमप्लास्ट कंपनी की उस याचिका पर विचार नहीं किया गया कि मामला उसकी प्रतिद्वंद्वी कुड्डालोर पावरजेन कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा उकसाया गया था।

शराब लाइसेंस का मामला

सर्वोच्च न्यायालय ने केरल में कई हॉलिडे रिजॉर्टों की अपीलों को खारिज कर दिया। अधिक एफएल-3 लाइसेंस नहीं दिए जाने की राज्य सरकार की नीति को ध्यान में रखते हुए इन रिजॉर्ट को शराब लाइसेंस दिए जाने से इनकार कर दिया गया था।

'सिक्स हॉलिडे रिजॉट्र्स बनाम स्टेट ऑफ केरल' मामले में उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि आवेदनों को आवेदन की तारीख से संबद्ध प्रचलित नियमों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए न कि उत्पाद शुल्क अधिकारियों द्वारा निर्धारित की गई तारीख के संदर्भ में। फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली गई और सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि प्रासंगिक तारीख आवेदनों के विचार की तारीख है।

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल

ऐसा क्रेडिट कार्ड धारक भी कंज्यूमर फोरम जा सकता है जिसने अभी तक अपने कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया हो, बशर्ते कि इस कार्ड को जारी करने वाले बैंक की ओर से मुहैया कराई जाने वाली सेवा में कमी पाई जाए।

वेस्ट बंगाल स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने अभिजीत सरकार बनाम एसबीआई काड्र्स एंड पेमेंट्स सर्विसेज (प्राइवेट) लिमिटेड मामले में यह कहा। क्रेडिट कार्ड धारक ने कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया था, लेकिन शरारती तत्वों की गड़बड़ी की वजह से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उसके खाते से बड़ी रकम काट ली गई।

जब वह डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम में पहुंचा तो उसकी शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि उसने कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया है, इसलिए कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट के तहत वह उपभोक्ता नहीं है। फोरम ने यह भी कहा कि उसने इस लेनदेन के संबंध में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई इसलिए वह कंज्यूमर फोरम नहीं आ सकता।

खाताधारक ने राज्य आयोग में अपील की जिसने दोनों दृष्टिकोण से उसका समर्थन किया। आयोग ने कहा कि एफआईआर दर्ज कराना किसी व्यक्ति को कंज्यूमर फोरम में जाने से नहीं रोक सकता। इसके अलावा, अगर उसने अपने कार्ड का इस्तेमाल नहीं भी किया है तो भी वे कानून के मुताबिक उपभोक्ता होगा।

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