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क्या प्रदीप ओवरसीज की उम्मीदें लाएंगी रंग
आईपीओ समीक्षा
शरत चेल्लुरी /  March 15, 2010

पिछले कुछ दिनों में देश के टेक्सटाइल निर्यात में गिरावट के बाद सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं।

इससे टेक्सटाइल निर्यातक प्रदीप ओवरसीज के पास खुश होने की भरपूर वजहें हैं क्योंकि इसकी कमाई का करीब आधा हिस्सा निर्यात से मिलता है। कंपनी का मुख्य जोर घरेलू लिनेन उत्पाद को बनाने पर है।

यह ग्रे फैब्रिक का प्रसंस्करण करती है और घरेलू टेक्सटाइल्स मसलन बेडशीट, पर्दे, गद्दे, रजाई कवर, तकिये का कवर और गद्दे का कवर बनाती है। निर्यात सेगमेंट से फायदा पाने के लिए प्रदीप ओवरसीज की योजना अपने प्रस्तावित टेक्सटाइल सेज में मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित करना है।

मांग पर निर्भरता

कंपनी का बिजनेस मॉडल मांग पर आधारित है। इसके उत्पादन में कम चौड़ाई और ज्यादा चौड़ाई वाले कपड़े शामिल हैं। पिछले दो सालों में कंपनी ज्यादा चौड़ाई वाली लिनेन क्षमता को जोड़ रही है जिसकी प्रीमियम कीमत मिलती है। इसके राजस्व में ज्यादा चौड़ाई वाले सेगमेंट का योगदान दो-तिहाई है।

इसके अतिरिक्त इसका जोर मूल्य वर्धित उत्पाद मसलन गद्दे, ऑर्गेनिक कॉटन पर है और इसका लक्ष्य परिधान, ड्रेस मैटेरियल और बॉटम वियर फै ब्रिक की मौजूदा सीमित हिस्सेदारी बढ़ाने की है। कंपनी की प्रति मीटर के आधार पर कुल बिक्री वसूली में पिछले कुछ सालों में तेजी आई है।

प्रदीप ओवरसीज ने लगातार 90 फीसदी ज्यादा उपयोगिता दर पर परिचालन किया है और उम्मीद है कि वर्ष 2010-11 में एक चौथाई नई क्षमता जोड़ी जाएगी। इसके अलावा भारत, अमेरिका और यूरोप के मौजूदा बाजारों में अपनी वृद्धि बरकरार रखने के बाद कंपनी की योजना पश्चिम एशिया, पूर्वी अफ्रीका और रूस के बाजारों में संभावनाएं तलाशने की हैं ताकि बढ़ती हुई क्षमताओं के मुताबिक मांग को बरकरार रखा जाए।

अपने निर्यात आधार को बढ़ाने के अलावा कंपनी अगर अपनी बिक्री में सुधार करती है तो यह अपने वितरण मॉडल में सुधार करके बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इससे मुनाफे में सुधार हो सकता है और बाहरी बिचौलिए पर निर्भरता भी कम हो सकती है। मिसाल के तौर पर वर्ष 2008-09 में कुल 93 फीसदी निर्यात बिक्री अंतरराष्ट्रीय रिटेलरों के एजेंटों के जरिए हुई थी।

हाल में कॉटन की कीमतों में तेजी आनी शुरू हो गई है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। इसके अलावा कंपनी के पास कच्चे माल की खरीद के लिए लंबी अवधि की आपूर्ति के लिए अनुबंध नहीं है, इससे कच्चे माल की लागत पर कम नियंत्रण के संकेत मिलते हैं। बेहतर नकदी लाभ और पहले के स्थिर पूंजीगत खर्च के बावजूद कंपनी का डेट-इक्विटी अनुपात 2.5 है।

इसकी वजह कंपनी के पास ज्यादा कार्यशील पूंजी उधारियों का होना है। उम्मीद है कि सेज में वर्ष 2010-11 की चौथी तिमाही से अतिरिक्त क्षमता का परिचालन शुरू हो जाएगा। फिलहाल उपयोगिता दर ज्यादा है ऐसे में वर्ष 2010-11 में वृद्धि दर ज्यादा नहीं होगी।

निष्कर्ष

भविष्य में प्रत्यक्ष बिक्री के अनुपात में बढ़ोतरी की क्षमता, अपनी क्षमता से राजस्व योगदान और वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट की हिस्सेदारी बरकरार रहने से मार्जिन पर असर होगा। रिटर्न के बेहतर अनुपात से वृद्धि दर बेहतर रहेगी लेकिन मूल्यांकन बेहद आकर्षक नहीं है।

Keyword: textile, export, reforms, pradeep overseas, fabric processing,
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