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औद्योगिक प्रशिक्षण सुधारेगा बंगाल
रजत रॉय / कोलकाता March 12, 2010

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में 160 नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 700 नए औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र (आईटीसी) स्थापित करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।

सरकार ने यह काम राष्ट्रव्यापी योग्यता विकास कार्यक्रम के तहत किया है। राज्य में तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण मंत्री का जिम्मा संभाल रहे चक्रधर माईकाप कहते हैं, 'हम पिछले 18 महीने से इन प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन केंद्र की तरफ से स्पष्ट दिशानिर्देश के अभाव में हम इस काम को आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे।'

इस साल के आम बजट में भी केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने विश्वस्तरीय योग्यता विकास कार्यक्रम की शुरुआत पर जोर देने की जरूरत बताई थी। इस पर माईकाप का कहना है, 'हां, हम इस बारे में काफी कुछ सुन रहे हैं। पर हमें यह नहीं पता है कि इस दिशा में केद्र द्वारा जमीनी स्तर पर क्या किया जा रहा है।'

ऐसा लगता है कि इस मसले पर केंद्र और राज्य के बीच संवादहीनता की स्थिति है। माईकाप के मुताबिक नए आईटीआई और आईटीसी की शुरुआत निजी-सार्वजनिक भागीदारी के आधार पर होगी। इन संस्थानों की स्थापना के लिए 40 फीसदी संसाधन केंद्र की तरफ से मुहैया करवाए जाएंगे।

जबकि भूमि, सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाएं राज्य सरकार की तरफ से दी जाएंगी। पर जब तक इस मसले पर स्पष्टता नहीं आ जाती तब तक राज्य सरकार इन संस्थानों में निवेश के लिए उद्योग जगत और निवेशकों से संपर्क नहीं साध सकती।

यह सच है कि केरल और कुछ अन्य राज्यों के मुकाबले पश्चिम बंगाल में आईटीआई और आईटीसी की संख्या कम है। अभी पश्चिम बंगाल में सरकार द्वारा 31 आईटीआई चलाए जा रहे हैं। वहीं 21 आईटीसी सरकार प्रायोजित हैं और 25 आईटीसी निजी हाथों में हैं। इन संस्थानों की संयुक्त क्षमता 11,695 प्रशिक्षुओं को दाखिला देने की है।

वहीं केरल में आईटीआई की संख्या 82 है और आईटीसी की संख्या 467 है। इन संस्थानों में हर साल 60,121 प्रशिक्षुओं को दाखिला मिलता है। आंध्र प्रदेश में कुल 92 आईटीआई और 476 आईटीसी हैं। इन संस्थानों में 1,11,585 प्रशिक्षुओं को दाखिला मिलता है। माईकाप कहते हैं कि इन राज्यों में चलाए जाने वाले इन संस्थानों में से 80 फीसदी निजी क्षेत्र में हैं जबकि पश्चिम बंगाल के 80 फीसदी संस्थान सरकारी हैं।

2002 में भारत सरकार ने व्यावसायिक प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों की गुणवत्ता पर चिंता जताई थी। कई अध्ययनों ने भी साबित किया है कि अलग-अलग राज्यों के आईटीआई की गुणवत्ता में फर्क है। कई सालों से आईटीआई के पाठयक्रम का संशोधन नहीं किया गया है।

इससे साफ है कि इन संस्थानों में उद्योग जगत की सहभागिता नहीं है। इसके अलावा बुनियादी ढांचे का न होना और प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी ने भी इन संस्थानों की समस्या बढ़ाई है।

नए संस्थानों के लिए प्रस्ताव तैयार

राज्य सरकार ने 160 नए आईटीआई और 700 नए आईटीसी के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है
राज्य और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल नहीं होने की वजह से यह योजना नहीं बढ़ पा रही है आगे
केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के मुकाबले पश्चिम बंगाल में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या है अपेक्षाकृत कम

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