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नए आईआईएम के गठन की राह में हैं मुश्किलें हजार...
कीर्तिका सुनेजा / नई दिल्ली March 09, 2010

जमीन अधिग्रहण की समस्याएं और शिक्षकों के अभाव की वजह से भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) के चार नए कैंपस स्थापित करने की सरकारी योजना को इस वर्ष अमल में लाना मुश्किल हो सकता है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 7 नए आईआईएम स्थापित करने की योजना बनाई है। इनमें से 4 तिरुचिरापल्ली (तमिलनाडु), रांची (झारखंड), रायपुर (छत्तीसगढ़) और रोहतक (हरियाणा) में वर्ष 2009-10 के दौरान स्थापित होने हैं।

शेष 3 संस्थानों की स्थापना वर्ष 2010-11 के दौरान जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में होनी है। पहले चरण में पोस्ट-ग्रैजुएट प्रोग्राम (पीजीपी) पाठयक्रम में 140 छात्रों का दाखिला होगा। शेष संस्थानों की स्थापना हो जाने के बाद छात्रों की संख्या 560 तक बढ़ाई जाएगी।

उधर मौजूदा आईआईएम, जिनकी सलाह पर नए कैंपस स्थापित होने हैं, इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि नए संस्थानों की स्थापना इस वर्ष हो ही जाएगी। आईआईएम के एक निदेशक ने पहचान छुपाने की मंशा के साथ बताया, 'जब तक शिक्षकों और निदेशकों की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक कुछ नए आईआईएम इस वर्ष शुरू नहीं हो पाएंगे।

हालांकि निदेशकों के नाम की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने में देरी हुई है। तमाम संस्थानों में फिलहाल कक्षाएं शुरू नहीं की जा सकतीं क्योंकि इसके लिए पहले उन्हें संचालित होना जरूरी है और इस काम में कुछ महीने लगेंगे।'

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इस मसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि खर्च करने की क्षमता मौजूद है। केंद्रीय विश्वविद्यालय, आईआईएम और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे कैंपस की स्थापना में समय लगता है।

कई बार जगह निर्धारित नहीं हो पाता और शिक्षकों की उपलब्धता का मसला अलग से है। इसलिए हो सकता है कि कक्षाएं शुरू हो जाएं और छात्र आने लगें, लेकिन सब कुछ ठीक-ठाक होने में समय लग सकता है।' इसके अलावा कोष आवंटन की भी समस्या है, जिसका सामना फिलहाल मौजूदा आईआईएम कर रहे हैं।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने वित्त वर्ष 2010-11 के बजट में नए आईआईटी की स्थापना के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किया है, जो पिछले वित्त वर्ष के दौरान आवंटित राशि 300 करोड़ रुपये से 33 प्रतिशत अधिक है। लेकिन आईआईएम के मामले में स्थिति अलग है। इस मद में वित्त वर्ष 2010-11 के बजट में केवल 25 करोड़ रुपये की राशि बढ़ाई गई है। जाहिर है, आईआईएम इससे खुश नहीं हैं।

आईआईएम अहमदाबाद के निदेशक समीर बरुआ ने कहा, 'यह आवंटन पर्याप्त नहीं है क्योंकि बढ़ाई गई राशि का ज्यादातर हिस्सा मुद्रास्फीति और छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की वजह से बढ़े हुए वेतन-भत्तों की भेंट चढ़ जाएगा। इसलिए बुनियादी ढांचे के पुनर्विकास के लिए धन की उपलब्धता कम हो जाएगी।'

पहचान छुपाने की मंशा के साथ एक दूसरे निदेशक ने कहा, 'मांग है, लेकिन दिक्कत बुनियादी ढांचा और शिक्षकों की उपलब्धता के मामले में है।'

Keyword: land acquisition, faculty members, IIMs, new campus, HRD ministry,
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