बिजनेस स्टैंडर्ड - सोना : निवेश का सुरक्षित माध्यम या महज एक बुलबुला?
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सोना : निवेश का सुरक्षित माध्यम या महज एक बुलबुला?
निवेश : अगर आप सोने में निवेश के इच्छुक हैं तो फिर इसके कई तरीके हैं, लेकिन इससे पहले सबसे उपुयक्त तरीके का चयन काफी जरूरी है
ऋषि नाथानी /  March 08, 2010

सोना एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। पिछले कुछ महीनों के दौरान सोने के आयात में लगातर बढ़ोतरी देखने को मिली है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष नवंबर महीने में भारतीय रिजर्व बैंक को 200 टन सोने की बिक्री कर चुका है। आईएमएफ का कहना है कि आने वाले समय में वह और अधिक सोने की बिक्री करना चाहता है। सोने की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महंगाई से निपटने में एक बड़ा औजार साबित हो सकता है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं :

बिजनेस स्टैंडर्ड सोना : निवेश का सुरक्षित माध्यम या महज एक बुलबुला? मूर्त परिसंपत्ति है
बिजनेस स्टैंडर्ड सोना : निवेश का सुरक्षित माध्यम या महज एक बुलबुला? इसकी खरीद-बिक्री आसान होने से इसे रखने में भी कोई परेशानी नहीं होती। 
बिजनेस स्टैंडर्ड सोना : निवेश का सुरक्षित माध्यम या महज एक बुलबुला? महंगाई के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। इक्विटी और कमोडिटी की तुलना में इसके साथ काफी कम अनिश्चितताएं जुड़ी हैं। 
बिजनेस स्टैंडर्ड सोना : निवेश का सुरक्षित माध्यम या महज एक बुलबुला? डॉलर के साथ इसके उलट संबंध है। अगर किसी ने डॉलर में ज्यादा निवेश किया है तो विनिमय दरों में आने-वाले उतार -चढाव से सुरक्षा मिलती है  

निवेशक निम्लिखित माध्यमों के जरिये सोने में निवेश कर सकते हैं-

सुनार और ज्वैलर्स

सोना खरीदने का यह पारंपरिक और सबसे सरल तरीका है, लेकिन इसके बाद भी इसके कुछ नुकसान हैं। पहली बात तो यह कि आभूषणों की खरीदारी करने के बजाय साबुत सोने और सिक्के  में निवेश करना ज्यादा उपयोगी माना जाता है।

लेकिन अगर आप साबुत सोने या सिक्कों की खरीदारी अपने नजदीकी आभूषण विक्रेता से करते हैं तो सोने की शुध्दता को लेकर हमेशा सतर्क रहने की जरूरत होती है। इतना ही नहीं, जिन कीमतों पर आभूषण विक्रेता आपको सोने की बिक्री करते हैं, उनमें पादर्शिता का अभाव होता है।

याद रहे, जब आप आभूषण खरीदते हैं तो आप 24 कैरेट सोने के लिए कीमत अदा करते हैं, जबकि ऐसा भी हो सकता है कि आपको केवल 22 कैरेट शुध्दता वाले सोने के आभूषण मिले।

बैंक

बैंकों से सोना खरीदने का सबसे बडा लाभ यह है कि सोने की पूर्ण शुध्दता की गारंटी मिलती है। लेकिन याद रहे कि  बैंकों से सोना खरीदने के नुकसान भी हैं। बैंक बाजार की अपेक्षा 5-10 फीसदी अधिक कीमत वसूलते हैं। लिहाजा, बैंक सोने की शुध्दता की गारंटी तो देते हैं, लेकिन कीमतों के लिहाज से यहां से खरीदारी करना उतना फायदेमंद नहीं होता है।

दूसरी खामी यह है कि बैंक ग्राहकों को सोने की पुनर्खरीदारी की गारंटी नहीं देते हैं। जाहिर सी बात है, ऐसे लोग जिन्होंने बैंक से सोना खरीदा है, उन्हें इसे बेचने के लिए अन्य स्रोत की तलाश करनी होती है या फिर इन्हें कम कीमतों पर स्थानीय सुनार के हाथों बेचने को मजबूर होना पड़ता है।

गोल्ड ईटीएफ

कई म्युचुअल फंड कंपनियों ने गोल्ड एक्सचेंज टे्रडेड फंड (ईटीएफ) की शुरुआत की है। ईटीएफ म्युचुअल फंडों क ी एक श्रेणी होती है जिसे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबध्द कराया जाता है और इसके यूनिट का कारोबार एक्सचेंज में शेयरों की माफिक की तरह ही होता है।

इस तरह के सभी फंडों को नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सूचीबध्द किया जाता है। गोल्ड ईटीएफ अपने कोष का 90-100 फीसदी हिस्सा सोने में निवेश करते हैं, जबकि 0-10 फीसदी मुद्रा बाजार के  अन्य साधनों में लगाते हैं। फंड अंडरलाइंग कमोडिटी यानी सोने पर बजार में मिलने वाले प्रतिफल को बढाने का प्रयास करते हैं।

कारोबार के लिए सोने की यूनिट 1 ग्राम गोल्ड के बराबर होती है, जिससे छोटे निवेशक भी इसकी खरीदारी आराम से कर सकते हैं। यूनिट के कारोबार में काफी तरलता होती है और लिवाली और बिकवाली के बीच दायरा कम होता है। ब्रोकर इन यूनिट की खरीदारी पर डिलीवरी ब्रोकरेज वसूलते हैं जो 0.25 फीसदी तक हो सकता है।

गोल्ड ईटीएफ पर एक्सचेंज परिचालन शुल्क बहुत कम लगता है, साथ ही ये प्रतिभूति परिचालन शुल्क से मुक्त होती हैं, जिससे परिचालन खर्च में कमी आती है। यूनिट की डिलीवरी आपके डीमैट अकाउंट में होती है, लिहाजा बाजार जाकर इनकी फि जिकल डिलीवरी लेने के झंझट से मुक्ति मिलती है। इन खूबियों की वजह से आम निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ  में निवेश आदर्श माना जाता है।

हालांकि, नियमित तौर पर निवेश करने वाले भी हरेक महीने सोने के कुछ यूनिट खरीदकर गोल्ड ईटीएफ में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान शुरू  कर सकते हैं। ऐसा करना लंबी अवधि के लिए और बच्चों की शादी के समय काफी फायदेमंद हो सकता है। ऐसे समय में आप इन यूनिट को बेचकर फिजिकल गोल्ड खरीद सकते हैं।

हालांकि, गोल्ड ईटीएफ के साथ जुड़ा एक नुकसान यह है कि आपको हरेक साल 1 फीसदी का भुगतान फंड प्रबंधन शुल्क के रूप में करना पड़ सकता है। इसके अलावा अन्य शुल्कों का भी भुगतान करना पड सकता है। लेकिन फिजिकल गोल्ड में निवेश से कर बचत करने में भी मदद मिलती है।

एक ओर जहां फिजिकल गोल्ड में निवेश के तीन सालों के बाद लंबी अवधि के पूंजी लाभ (एलटीजीसी) पर करों में छूट का लाभ मिलता है, वहीं यह सुविधा गोल्ड ईटीएफ में निवेश के एक साल बाद उपलब्ध होती है। इसकी वजह यह कि इन पर लगने वाला कर म्युचुअल फंड की डेट योजनाओं की तरह ही होता है। दूसरी तरफ साबुत सोने की तरह गोल्ड ईटीएफ पर वेल्थ टैक्स भी नहीं लगता है।

कमोडिटी एक्सचेंज

आप सोने की डिलीवरी कमोडिटी एक्सचेंजों जैसे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) और नैशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) के जरिये भी ले सकते हैं। इन एक्सचेंजों में निवेशकों की सुविधानुसार विभिन्न आकार में गोल्ड ट्रेडिंग कांटे्रक्ट उपलब्ध होते हैं।

एक्सचेंज निवेशकों को शुध्द सोने की डिलीवरी फिजिकल या डीमैट अकांउट में लेने की छूट देते हैं और इन पर ब्रोकरेज शुल्क काफी कम यानी 0.25 फीसदी के लगभग लगता है। हालांकि, डीमैट मोड में डिलीवरी लेते समय आपको कुछ वेयरहाउसिंग शुल्कों का भुगतान करना पड़ सकता है। यह रास्ता बड़े और बाजार में कारोबार में दक्ष निवेशकों के लिए बेहतर है।
लेखक प्रमाणित वित्तीय सलाहकार हैं।

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