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कारोबारी जगत में अब महिलाओं को तवज्जो
विभु रंजन मिश्र और शिवानी शिंदे / बेंगलुरु/मुंबई March 08, 2010

देश भर में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है और कारोबारी जगत में महिलाओं की नियुक्तियों में तेजी आई है। लेकिन हकीकत यह है कि देश के उद्योग जगत में वरिष्ठ पदों पर मौजूद महिलाओं की संख्या उंगलियों पर गिनी जा सकती है।

उदाहरण के लिए नीलम धवन एचपी इंडिया की प्रमुख हैं और अकिला कृष्णकुमार देश में सनगार्ड ऑफशोर सर्विसेज की प्रमुख हैं। इसके अलावा आप पदमश्री वारियर का नाम ले सकते हैं, जो भारतीय मूल की हैं और सिस्को सर्विसेज के शोध एवं विकास विभाग में मुख्य तकनीक अधिकारी के पद पर हैं।

सॉफ्टवेयर उद्योग की शीर्ष संस्था नैसकॉम के अनुसार आईटी उद्योग में काम करने वाले कर्मचारियों में से 30 फीसदी महिलाएं हैं। हालांकि आईटी क्षेत्र पर नजर रखने वाले मानव संसाधन विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं का आंकड़ा 24 फीसदी से कम हो सकता है।

इन्फोसिस टेक्नोलॉजिज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी कृष गोपालकृष्णन ने कहा, 'यह बस कुछ समय की बात है। अगर आप इन्फोसिस की बात करें तो, 10 साल पहले हमारे कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 19 फीसदी थी, लेकिन आज यह बढ़कर 34 फीसदी हो गई है। इनमें से कई महिलाएं महत्वपूर्ण पदों पर हैं और जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।'

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में करीब 1,30,509 कर्मचारी कार्यरत हैं और इसमें से 30 फीसदी महिलाएं हैं। माइंडट्री में पिछले कुछ साल के दौरान महिला कर्मियों का आंकड़ा दोगुना होकर 26 फीसदी हो गया है। कुछ ऐसे ही हालात उन विदेशी आईटी कंपनियों के हैं जो भारत में कारोबार कर रही हैं। लेकिन इनमें से किसी भी कंपनी के निदेशक मंडल में एक भी महिला शामिल नहीं है।

नैसकॉम के अनुसार इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि करियर के तौर पर इंजीनियरिंग को चुनन वाली लड़कियों की संख्या काफी कम है। लेकिन इसमें भी तेजी से बदलाव आ रहा है। 2002 में जहां इंजीनियरिंग में करियर बनाने वाली लड़कियों की संख्या में 22 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा था, वहीं 2008 में यह आंकड़ा 125 फीसदी की दर से बढ़ रहा था।

हालांकि हालात सुधारने के लिए आईटी कंपनियां भी जरूरी कदम उठा रही हैं। विप्रो और आईबीएम ने तो महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए  कई नए कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। केपीएमजी के पार्टनर एवं प्रमुख (पीपल ऐंड चेंज एडवाइजरी सर्विसेज) गणेश शरमन का कहना है कि कंपनियों की सभी शाखाओं में महिलाओं की संख्या बराबर नहीं है।

उन्होंने कहा, 'मध्यम ओहदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 20 फीसदी हो सकती है, उससे निचले पदों पर इससे अधिक हो सकती है। लेकिन वरिष्ठ पदों पर यह आंकड़ा महज 5-6 फीसदी ही है।' उनके अनुसार, 'अगर किसी कंपनी में कोई महिला बड़ी जिम्मेदारी निभा रही है, तो बच्चों से जुड़ी परेशानियों और  शादीशुदा जिंदगी में तनाव के मामले अधिक बढ़ जाते हैं।'

विप्रो लिमिटेड के कार्यकारी उपाध्यक्ष (मानव संसाधन) प्रतीक कुमार इसे सही नहीं मानते हैं। उनका कहना है, 'आईटी उद्योग के साथ यह समस्या नहीं है, बल्कि आईटी उद्योग में महिलाओं की संख्या इससे अधिक हो सकती है।

महिला शक्ति

नैसकॉम के अनुसार वरिष्ठ प्रबंधन में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 11 फीसदी
आईटी उद्योग में काम करने वाले कर्मियों में 25.2 फीसदी महिलाएं

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