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घर और कार पर ब्याज़ की मार
सस्ते कर्ज़ के दिन अब लदे, निजी क्षेत्र के बैंक ऑटो और होम लोन पर बढ़ा रहे हैं ब्याज़ दर
बीएस संवाददाता / मुंबई March 05, 2010

कार खरीदना और घर बनाना अब और भी महंगा होने जा रहा है।

दरअसल राहत पैकेजों पर वित्त मंत्रालय के कड़े रवैये के बाद अब निजी क्षेत्र के बैंकों ने सख्त रुख अपनाते हुए रिटेल कर्ज पर ब्याज की दरें बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत की है निजी क्षेत्र में सबसे बड़े देसी बैंक आईसीआईसीआई बैंक ने।

उसने टीजर होम लोन यानी शुरुआती साल में कम ब्याज वसूलने की योजनाएं तो खत्म कर ही दी हैं, ऑटो लोन पर भी वह 0.25 से 0.50 फीसदी ब्याज बढ़ाने जा रहा है। इसी तरह एचडीएफसी बैंक ने भी ऑटो लोन पर ब्याज 0.25 फीसदी से 0.50 फीसदी तक बढ़ा दिया है।

कर्ज देने के मामले में देश की बड़ी कंपनी एचडीएफसी ने भी फिक्स्ड कम फ्लोटिंग ब्याज दर की अपनी योजना खत्म करने का फैसला कर लिया है। इतना ही नहीं कोटक महिंद्रा बैंक ने भी ऑटो और होम लोन पर ब्याज में चौथाई से आधा फीसदी का इजाफा किया है।

इस बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर कार खरीदने का सपना देख रहे लोगों पर पड़ेगा। उन पर दोहरी मार पड़ रही है क्योंकि कंपनियों ने उत्पाद शुल्क में 2 फीसदी इजाफे के सरकारी फैसले के बाद कारों के दाम बढ़ाने का ऐलान कर दिया है।

एचडीएफसी बैंक में रिटेल संपत्तियों और क्रेडिट कार्ड के कंट्री प्रमुख प्रलय मंडल ने कहा, 'सीधी सी बात है कि ब्याज दरें अब और नीचे नहीं जाएंगी, अब इनमें केवल इजाफा होगा। लेकिन यह इजाफा भी हम केवल अपने मार्जिन को बरकरार रखने के लिए ही करेंगे।'

एक निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जमा दरें पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ गई हैं। इसलिए ब्याज दरों के मामले में भी हमें इजाफा करना पड़ा है।' अधिकारी ने बताया कि अब कर्ज की मांग बढ़ रही है, इसलिए बैंकों के लिए यह बड़ा मसला नहीं रह गया है।

एक बैंकर ने बताया, 'छोटी कार के लिए मासिक किस्त में महज कुछ सौ रुपये का फर्क आएगा, लेकिन बड़ी कार के लिए फर्क ज्यादा होगा। लेकिन बैंक मांग का पूरा ध्यान रखते हैं। असली ब्याज दर तो ग्राहक, उत्पाद और अदायगी की अवधि पर निर्भर करेगी।'

भारतीय रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षी अनुपात में 0.75 फीसदी इजाफा किया था, जिसकी वजह से बैंकिंग प्रणाली से 36,000 करोड़ रुपये की नकदी बाहर हो गई। ऐसी सूरत में बैंकों को जमा दरों में 1.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी करनी पड़ी।

पिछले कुछ हफ्तों में कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरें भी बढ़ाई गई हैं। खास तौर पर कार्यशील पूंजी के लिए कर्ज में ब्याज ज्यादा वसूला जा रहा है। एक बड़े सार्वजनिक बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'बैंक अप्रैल से बेस दर की प्रणाली अपना लेंगे, तो कम अवधि के कर्ज पर ब्याज दर ज्यादा वसूली ही जाएगी। इसलिए कंपनियों को रकम चाहिए, तो हम उनका पूरा फायदा उठा रहे हैं।'

कैसे पूरा होगा सपना कि इक घर हो अपना

आईसीआईसीआई बैंक के ऑटो और होम लोन हुए महंगे
एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक ने भी पकड़ ली वही राह
कार के खरीदारों को दोहरा झटका
सीआरआर बढ़ने की वजह से कंपनियों को भी महंगे लोन

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