बिजनेस स्टैंडर्ड - '3 जी' के रंग में कहीं पड़ न जाए भंग
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'3 जी' के रंग में कहीं पड़ न जाए भंग
बजट की पिचकारी से निकले सारे रंग, किसी को चढ़ा सुरूर तो कोई रह गया दंग
सुरजीत दास गुप्ता और कात्या नायडू / नई दिल्ली March 01, 2010

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी 3 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से करीब 35,000 करोड़ रुपये जुटाने के अरमान तो पाल रहे हैं, लेकिन उन पर पानी भी फिर सकता है।

दूरसंचार विशेषज्ञों के अनुसार 3जी स्पेक्ट्रम के आवंटन से सरकार को होने वाली कमाई मंत्रालय की उम्मीद से 5,000 करोड़ रुपये से लेकर 10,000 करोड़ रुपये तक कम हो सकती है।

वित्त मंत्री ने इस स्पेक्ट्रम की नीलामी से होने वाली कमाई को अगले वित्त वर्ष के बजट में शामिल किया है और राजकोषीय घाटा कम करने से सरकार के लिए जरूरी है कि इस नीलामी से उसे अच्छी कमाई हो।

केपीएमजी के दूरसंचार प्रमुख रोमल शेट्टी ने कहा, 'अगर सरकार देश भर में चार स्लॉट का आवंटन करती तो उसे 35,000 करोड़ रुपये की कमाई हो जाती। लेकिन प्रत्येक सर्किल में 3 स्लॉट की नीलामी से इतनी कमाई का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल लग रहा है। सिर्फ 3 स्लॉट की नीलामी होने से जीतने की उम्मीद कम होगी, तो कंपनियां भी काफी संभलकर ही बोली लगाएंगी।'

शेट्टी ने कहा कि दो साल पहले जब दूरसंचार क्षेत्र अच्छा कारोबार कर रहा था, तो ऐसे में ऑपरेटरों के लिए रकम जुटाना आसान होता। उन्होंने कहा, 'लेकिन आज इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है और इसके कारण कंपनियों का मुनाफा मार्जिन भी लगातार कम हो रहा है। इसके साथ ही आपको रकम अभी जमा करनी पड़ेगी जबकि स्पेक्ट्रम के लिए सितंबर तक का इंतजार करना होगा।'

देश भर के लिए 3जी स्पेक्ट्रम के लिए न्यूनतम निर्धारित कीमत 3500 करोड़ रुपये रखी गई है। ब्रॉडबैंड के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन कर सरकार कम से कम 17,500 करोड़ रुपये जुटा सकती है। सरकार को उम्मीद है कि वह इससे दोगुनी यानी 35,000 करोड़ रुपये की कमाई कर सकती है, जो अधिकतर दूरसंचार विशेषज्ञों के अनुसार काफी मुश्किल है।

विश्लेषकों का कहना है कि मुखर्जी को अपने लक्ष्य से करीब 10,000 करोड़ रुपये की कम कमाई होगी। आनंद राठी सिक्योरिटीज के विश्लेषक संजय चावला ने बताया, 'भारती और वोडाफोन को छोड़ दिया जाए तो बाकी दूरसंचार कंपनियों के लिए इतनी रकम जुटाना आसान नहीं होगा।

बाजार के मौजूदा हालात को देखते हुए हमें उम्मीद नहीं है कि कंपनियां न्यूनतम निर्धारित मूल्य से अधिक की बोली लगाएंगी। 2जी की कॉल दरों को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों का मुनाफा मार्जिन भी तेजी से कम हो रहा है। मेरे अनुमार से सरकार 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से अधिकतम 25,000 करोड़ रुपये ही जुटा सकती है।'

चावला की बात से कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के शोध विश्लेषक हरित शाह भी सहमत हैं। शाह ने बताया, 'प्रत्येक सर्किल में सिर्फ 3 स्लॉट के आवंटन के जरिए 35,000 करोड़ रुपये जुटाना सरकार के लिए दूर की कौड़ी ही नजर आ रही है। विदेशी कंपनियों को 3जी स्पेक्ट्रम में कोई दिलचस्पी नहीं है। 3जी के लिए सिर्फ बड़ी कंपनियां ही बोली लगाएंगी।' दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि वित्त मंत्री का लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी है।

3जी स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाने वाली एक दूरसंचार कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हमारा अंदाजा है कि देश भर में 3जी स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाने वाली कंपनियां अधिकतम 4 होंगी और उनमें से कोई भी अधिक बोली नहीं लगाएगी। इसलिए अगर किसी भी स्लॉट के लिए बोली 5,000 करोड़ रुपये से अधिक बोली लगती है तो मुझे हैरानी होगी।' हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को उम्मीद से अधिक कमाई हो सकती है।

आधी अधूरी कॉल

विशेषज्ञों का कहना कि होगी 5,000-10,000 करोड़ रुपये कम कमाई
सिर्फ तीन स्लॉट की बिक्री से 35,000 करोड़ रुपये कमाना बहुत ही मुश्किल
विदेशी और नई दूरसंचार कंपनियां बिल्कुल नहीं दिखा रहीं 3 जी में दिलचस्पी
कुछ कंपनियां लगाएंगी सिर्फ महानगरों के लिए बोली

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