बिजनेस स?टैंडर?ड - पूरी तरह नहीं भुनाया मौका
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, October 04, 2022 11:00 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

पूरी तरह नहीं भुनाया मौका
बजट विश्लेषण
संपादकीय /  February 27, 2010

प्रणव दादा के बजट में बॉलीवुड फिल्मों के क्लाइमैक्स पर एक चुटकुला और चाणक्य की एक उक्ति जरूर थी, लेकिन जैसे-जैसे वह पैराग्राफ दर पैराग्राफ पढ़ते गए यह बोझिल होता गया।

हालांकि, बजट भाषण के बीच में विपक्ष की तरफ से एक बार शोरगुल जरूर सुनाई दिया। वैसे, इस बजट से लोगों को बोझिल होने की ही उम्मीद थी। दरअसल, इस बजट की रूप-रेखा तो काफी पहले से तैयार हो गई थी। वित्तीय घाटे को वित्त मंत्री अपने पुराने वादे के हिसाब से जीडीपी के 5.5 फीसदी पर ले ही आए।

जैसा कि हमने अपने अखबार के कॉलमों में कहा था, उन्होंने उत्पाद कर में दो फीसदी का इजाफा कर ही दिया। हालांकि, आर्थिक समीक्षा में कहा गया था कि सीमा-शुल्क को घटाकर 7.5 फीसदी के स्तर ले आना चाहिए, लेकिन उन्होंने इसके साथ कोई छेड़खानी नहीं की। साथ ही, उन्होंने विकास में पूरे मुल्क की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी कई योजनाओं की शुरुआत की।

वैसे तो वित्तीय घाटा कम करने के लिए मुखर्जी की तारीफ की जानी चाहिए, लेकिन समाज कल्याण में उनके खुले हाथ की वजह से सरकार का राजस्व घाटा करीब 4 फीसदी का रहेगा। हैरत की बात है कि उन्होंने इस बात का उल्लेख भी अपने बजट भाषण में नहीं किया है। शायद यह पहला ऐसा बजट होगा, जिसमें राजस्व घाटे का उल्लेख नहीं है।

वैसे, महंगाई के बोझ तले दबते जा रहे मध्यमवर्गीय नौकरीशुदा आम आदमी के लिए बजट में प्रत्यक्ष करों में 26 हजार करोड़ रुपये की छूट का उपहार देना एक अच्छा कदम है। इस कदम से न सिर्फ आम आदमी खुश होगा, बल्कि उसके परिवार की जमा रकम में भी इजाफा होगा। वित्त मंत्री ने इस साल विस्तृत सेवा कर को न लाकर ठीक नहीं किया है।

इससे उन्हें अगले साल जीएसटी को लागू करने में सहूलियत होती। राजस्व के मामले में उत्पाद कर और सेवा कर के साथ-साथ उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश से भी मोटी कमाई करने में कामयाब होने की उम्मीद है। इसके अलावा, वे 3जी लाइसेंसों से भी मोटी कमाई के लिए आश्वस्त हैं।

वित्तीय नीतियों पर जोर देने वाले इस बात पर भले ही असहमत हों, लेकिन मुखर्जी यह कह सकते हैं कि वे नई कर सहिंता और जीएसटी को लागू करने के अपने वादे को पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कर प्रशासन को भी और सरल बनाने और कर आधार को उचित दरों पर लाकर विस्तार देने का ऐलान किया है। इसमें सिर्फ एक ही रोड़ा है और वह है कर छूट का आधार।

यह बात साफ नहीं हो पाई कि क्यों सिर्फ माइक्रोवेव ओवेन में इस्तेमाल होने वाले मैगनेट्रोन और बैलून पर ही वित्त मंत्री की कृपा रही। वित्त मंत्री ने वित्तीय ढांचे में मजबूती, निवेश के लिए बेहतर नीतिगत वातावरण और कृषि अर्थव्यवस्था को विकास की रफ्तार में इजाफा करने वाले तत्व बताकर बिल्कल सही कहा है।

उनका बजट ऊर्जा, कृषि और समाज कल्याण के क्षेत्र में बड़े सुधार भी लेकर आया है। कोयला नियंत्रण प्राधिकरण की स्थापना और कोयला ब्लॉकों की नीलामी सुधार के अच्छे कदम हैं। असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष भी एक सही कदम है।

सरकार में काफी कम लोग हैं, जो नई कमिटियों, प्राधिकरणों या फंड के गठन के लालच से बच पाते हैं। इसीलिए अगर वित्त मंत्री ने अपने बजट में एक परिषद, एक प्राधिकरण, एक कमीशन और दो कोषों का गठन किया है, तो इस बात को समझा जा सकता है।

उम्मीद है कि उनका वित्तीय संतुलन व विकास परिषद, रिजर्व बैंक की अहमियत को कम नहीं करेगा। अगर इस परिषद की सचमुच जरूरत भी थी, तो इसके अध्यक्ष पद पर रिजर्व बैंक के गवर्नर को होना चाहिए था। मुखर्जी के इस बजट के साथ दिक्कत यह है कि एक तरफ तो यह बाजारों, कारोबारियों, आम लोगों और निवेशकों की जरूरतों को पूरा तो करता है, लेकिन यह राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर रह जाता है।

काफी लंबे असर के बाद बजट एक ऐसी सरकार पेश कर रही थी, जो पहले से ज्यादा सुरक्षित थी। अगर विपक्ष मजबूत भी हुआ है, तो भी अगले कुछ महीनों में कोई बड़ा चुनाव भी नहीं था। इस साल में सरकार से लोगों को कुछ मजबूत कदमों की अपेक्षा थी। मुखर्जी साहब ने एक अच्छा बजट पेश किया है, लेकिन वह एक महान बजट को पेश नहीं कर पाए।

Keyword: budget 2010, FM Pranav mukherjee, stimulation package, fiscal deficit, economic survey,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 चिकित्सा उपकरणों पर नियमन बढ़ने से ग्राहकों को होगा लाभ
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.