बिजनेस स?टैंडर?ड - उम्मीद पर दुनिया कायम है
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, October 04, 2022 09:41 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

उम्मीद पर दुनिया कायम है
अजीज जहांगीर (मुख्य अर्थशास्त्री, जेपी मॉर्गन)
अजीज जहांगीर /  February 27, 2010

भारत के वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया है, वह संतुलित होने के साथ ही आर्थिक मजबूती की ओर ले जाता है।

बीते दो सालों की आर्थिक मंदी के बाद रिकवरी को दीर्घकालिक न मानते हुए राहतों को वापस नहीं लिया गया है। इस तर्क से कोई इनकार नहीं कर सकता है। हालिया आंकडें हमें याद दिलाते हैं कि भौतिक अर्थव्यवस्था और नीतियों से संबधित खतरे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अभी मौजूद हैं।

साथ ही, कमजोर मॉनसून के बावजूद भारतीय बाजार में मांग मौजूद है और सकल घरेलू उत्पाद सात फीसदी से ज्यादा रहने वाला है। सकल घरेलू उत्पाद का यह आंकड़ा तब है, जबकि कॉरपोरेट जगत में अपेक्षित निवेश नहीं हुआ है। अगर सब कुछ ऐसा ही चलता रहा तो वित्तीय वर्ष 2011 में सकल घरेलू उत्पाद आठ फीसदी से भी ज्यादा होगा।

हालांकि इसके चलते क्रय शक्ति बढ़ेगी और महंगाई भी बढ़ेगी, जो कि अभी से बढ़नी शुरू हो गई है इसलिए सरकार के लिए यह जरूरी हो गया था कि रिजर्व बैंक के साथ कदमताल मिलाकर मौद्रिक हालात को आसान रास्तों से बाहर निकाल या कुरबान कर मीडियम टर्म के लिये जमीन तैयार करे, जिसकी जरूरत साल की दूसरी छमाही में पड़ेगी।

अभी दो सप्ताह पहले ही मैंने इस कॉलम में लिखा था कि सरकार इस बार अपने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 5.5 फीसदी रखेगी। बजट में यही हुआ बल्कि इससे भी आगे बढ़कर वित्तीय वर्ष 2012 के लिए लक्ष्य 4.8 फीसदी रखा गया है। सरकार का इरादा वित्तीय वर्ष 2015 तक घाटे को 3 फीसदी पर लाना है, जिसकी संस्तुति 13वें वित्त आयोग ने की है। यह एक अच्छी कोशिश है, जो कि बजट मीडियम टर्म के फ्रेमवर्क में रखती है।

लेकिन पता नहीं क्यों मुझे लगता है कि चीजें जैसी लगती हैं, वैसी हैं नहीं। अपने पिछले कॉलम में मैंने चिंता जताई थी कि घाटे को सकल घरेलू उत्पाद का 5.5 फीसदी पर लाने के लिए सरकार को आर्थिक मजबूती के लिए अर्थव्यवस्था में सुधार और विनिवेश के साथ कुछ सामंजस्य स्थापित करना होगा। साथ ही, अप्रत्यक्ष करों में कटौती आसान नहीं होगी।

अफसोस कि बजट ने यही कुछ किया है। बजट में करों से मिलने वाले राजस्व की विकास दर 18 फीसदी अनुमानित है जबकि सकल घरेलू उत्पाद की विकास 12.5 फीसदी रहने का अनुमान है। जब अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से बाहर आ रही होती है तो करों की प्राप्ति बढ़ती है।

साथ ही, बजट ने सेवा कर का दायरा बढ़ाया है, जोकि एक सकारात्मक कदम है क्योकि करों के क्षेत्र में इसका दायरा सबसे ज्यादा है। लेकिन अगर सरकार ये मान चुकी है कि रिकवरी दीर्घकालिक नहीं है तो इसके लिए बीते साल की तरह से परांपरागत नजरिया अपनाना बुध्दिमानी भरा कदम होता।

बजट में विनिवेश से 76000 करोड़ रुपये आने का अनुमान है जबकि थ्ी जी के लाइसेंस से सकल घरेलू उत्पाद के 1.1 फीसदी के आने का अनुमान लगाया गया है। ये संभव है बशर्ते विदेशी पूंजी प्रवाह सतत होता रहे और निवेशक खतरों से न डरें। वित्त मंत्री ने एक साहसिक कदम उठाते हुए तेल और खाद बॉन्ड इश्यू न जारी करने का इरादा जताया है और सभी तरह की सब्सिडी को बजट में नकदी के रूप में शामिल किया है।

हैरत की बात है कि वित्तीय वर्ष 2011 के बजट में तेल सब्सिडी के लिए 3000 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो कि तभी समुचित होगा, जब तेल के दाम 80 रुपये बैरल से कम हों या सरकार पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य निर्धारण की नीति बदले। हमने देखा कि कैसे विपक्ष एक्साइज डयूटी में एक रुपये बढ़ाने पर संसद से वॉकआउट कर गया।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि तेल की कीमतों के निर्धारण प्रक्रिया के सरलीकरण पर उनकी प्रतिक्रिया कैसी होगी। जैसा कि हमने हाल में देखा कि वैश्विक मंदी से उबरते हुए कड़वे आश्चर्य देखने को को मिले और ऐसी हालात में हमारी घरेलू वित्तीय बाजार में उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। अगर थोड़ा कुछ भी गलत दिशा में जाता है तो यही बजट हल्का साबित होगा।

लेकिन इन सबके बावजूद बजट में बहुत कुछ सकारात्मक है। बजट में दोहराया गया है कि अप्रैल 2011 में डायरेक्ट टैक्स कोड और जीएसटी लागू कर दिया जाएगा। सेवा कर का दायरा बढ़ाकर हवाई, रेल यात्रा और रियल एस्टेट को शामिल कर लिया गया है। हालांकि इन क्षेत्रों के लिए इसके फौरी नतीजे नकारात्मक साबित हो सकते हैं पर अर्थव्यवस्था की मजबूती की दृष्टि से कर की दर बढ़ाना नहीं बल्कि दायरा बढ़ाना ज्यादा तर्कसंगत होता है।

वित्तीय क्षेत्र में निजी बैंकों की तादाद बढ़ाने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और घरेलू वित्तीय सेवाओं की दरों में भी कटौती दिखेगी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कैपिटल बेस को बढ़ाना भी बैकिंग सिस्टम को स्थायित्व देगा बशर्ते सरकार इस अवसर का उपयोग बैंकों को मजबूती प्रदान करने के लिए भी करे।

अभी तक न तो मीडिया ने न ही बाजार ने वित्तीय स्थायित्व और विकास के लिए बने काउंसिल को संज्ञान में लिया है, जोकि योजनाबध्द वित्तीय और कॉरपोरेट मैक्रोइकनॉमिक्स स्थायित्व को देखेगा। साथ ही, यह संस्था अर्थ नियामक समन्वय का काम भी देखेगी। ऐसी संस्था को बनाना हमारे देश में भविष्य में व्यापक वित्तीय स्थायित्व लाने के लिए एक उचित कदम है।

पिछला बजट निराशाजनक था क्योंकि बाजार को वर्तमान सरकार के चुनावों में दोबारा जीत कर आने के बाद बहुत कुछ पाने की आस बंधी थी। इस बार हमारी आशाएं कम थीं। बजट ने आशा से कहीं बढ़कर दिया है, जिसके चलते शेयर बाजार ने खुशी मनाई है। बॉन्ड मार्केट ने अभी अपनी प्रतिकि्या नहीं दी है। शायद उसे बजट के विस्तार में जाने पर कहीं कोई शैतान दिख जाने की आस हो।

आखिर में अब आने वाले कुछ महीने हमारी प्रार्थना होगी कि विकास की ऊंची दर बरकरार रहे, वैश्विक बाजार में तरलता रहे, वैश्विक बाजार खतरों से डर कर भागे नहीं और तेल की कीमतें निचले स्तर पर ही बनी रहें।

Keyword: budget 2010, FM Pranav Mukherjee, stimulation package, economic recession,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कच्चे तेल में तेजी से रुपये पर और बढ़ेगा दबाव
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.