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यूनिक पहचान पत्र : एक साल में बढ़े कुछ कदम
लेस्ली डिमोंटी, बिभु रंजन मिश्रा और कीर्तिका सुनेजा /  February 20, 2010

इस महीने यूनिक आइडेंटीफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) की स्थापना को पूरे एक साल हो जाएंगे।

इसका गठन देश के 120 करोड़ लोगों को एक खास पहचान संख्या (यूआईडी) मुहैया करने के लिए किया गया है और इस पर जोर-शोर से काम किया जा रहा है। यूआईडीएआई के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी कहते हैं, 'यूआईडी योजना पर काम जारी है और अगस्त 2010 और फरवरी 2011 के बीच हम यूआईडी के पहले चरण के तहत लोगों को यह नंबर मुहैया करा देंगे।'

नीलेकणी को यूआईडीएआई की कमान संभाले अभी मात्र 6 महीने ही हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि अगले 5 सालों में करीब 60 करोड़ लोगों को यूआईडी संख्या से लैस कर दिया जाएगा। चूंकि, यह कार्य अपने आप में काफी मशक्कत भरा है, लिहाजा इसे देखते यूआईडीएआई की टीम का विस्तार किया जा रहा है।

यूआईडीएआई का कार्यालय दिल्ली में है और इसके 8 क्षेत्रीय कार्यालय हैं। नीलेकणी के अनुसार यूआईडी संख्या जारी होने से देश में वित्तीय समावेशन में मदद मिलेगी।

कैसी है तैयारी

यूआईडीएआई इसके लिए देश भर में सरकार और निजी एजेंसियों की बुनियादी सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहा है।

विशेष यूआईडी संख्या सेंट्रल आईडी डेटा रिपॉजिटरी (सीआईडीआर) जारी करेगी, साथ ही यह कार्डधारक के आवासीय विवरण का जायजा लेगी और नागरिकों की पहचान का सत्यापन भी करेगा।

इस बाबत नीलेकणी कहते हैं 'इस कार्य के तहत आने वाले विभिन्न उद्देश्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। इस पर काम शुरू हो चुका है। सीआईडीआर के कंसल्टेंट के लिए भी विज्ञापन दिए जा चुके हैं।'

इस योजना के लिए राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियां पंजीयक (रजिस्ट्रार) के तौर पर काम करेंगी। इसके अलावा निजी क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों को भी इस काम में लगाया जाएगा। नीलेकणी के अनुसार समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर के लिए राज्य सरकारों से बातचीत जारी है।

यूआईडी देश के उन सभी नागरिकों को जारी किया जाएगा जो इस योजना के तहत दिए गए मानदंडों पर खरा उतरते हैं। हालांकि, इस विशेष संख्या के जारी होने का मतलब देश की नागरिकता प्रदान करना नहीं है।

कैसे करेगा यह काम

शुरुआती अनुमानों के अनुसार हरेक नागरिक को इसमें शामिल किए जाने पर औसतन 20-25 रुपये का खर्च आएगा। यानी कुल खर्च के 3,000 करोड रुपये के स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है।

नामांकन पर आने वाले खर्च की भरपाई के लिए रजिस्ट्रार इस कार्ड के जारी किए जाने के एवज में नागरिकों से कुछ शुल्क लेंगे। इसके संबंध में यूआईडीएआई दिशानिर्देश जारी करेगी। यूआईडी संख्या जारी किए जाने के बाद अधिकारी नागरिकों को एक पत्र देंगे जिसमें उनके निवास के बारे में और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां होंगी।

इसके साथ इसमें यूआईडी संख्या, नाम, फोटो और फिंगर प्रिंट भी होंगे। निवास संबंधी किसी भी जानकारी में कोई गलती होने की स्थिति में कार्डधारक 15 दिन के भीतर  रजिस्ट्रार और या इस कार्ड को जारी करने वाली एजेंसी से संपर्क कर सकते हैं।

राजस्व की संभावना

यूआईडीएआई ने यूआईडी संख्या जारी किए जाने की पूरी प्रक्रिया में 288 करोड रुपये के राजस्व की प्राप्ति का अनुमान लगाया है। ऐसा तीन चरणों में किया जाएगा।

बुनियादी तौर पर पहचान का सत्यापन मुफ्त में होगा। दूसरी प्रक्रिया के तहत नागरिकों के स्थायी पता के सत्यापन के लिए 5 रुपये का शुल्क लिया जाएगा और इसकी वसूली तब की जाएगी जब ग्राहक बैंक में अपना खाता खुलवाने जाएंगे। तीसरे चरण के तहत बॉयोमेट्रिक कन्फर्मेशन के तहत हरेक नागरिक से 10 रुपये लिए जाएंगे।

पर कुछ चिंताएं भी...

यूआईडी पर भले ही जोर-शोर से काम चल रहा है लेकिन कुछ विशेषज्ञ इसके तहत दी जाने वाली जानकारियों की गोपनीयता के सुरक्षित रहने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

इनका तर्क है कि यूआईडी संख्या लोगों की व्यक्तिगत जानकारियों के आधार पर मुहैया कराई जाएंगी और इसके किसी भी कारणवश लीक हो जाने से गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक हो सकती हैं। इस बाबत नोकिया इंडिया के कानूनी सलाहकार दिनेश चरक कहते हैं 'यूआईडी संख्या जारी हो जाने के बाद इसमें उल्लिखित तमाम व्यक्तिगत जानकारियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।'

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