बिजनेस स्टैंडर्ड - बेहतर है उम्र के साथ बीमा राशि बढ़ने वाली पॉलिसी
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बेहतर है उम्र के साथ बीमा राशि बढ़ने वाली पॉलिसी
तिनेश भसीन /  February 17, 2010

वित्तीय योजनाकार कहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ आर्थिक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता ही जाता है और इसके लिए जरूरी है कि आपके पास पर्याप्त बीमा कवर हो।

अगर आप उम्र बढ़ने के साथ-साथ नई-नई पॉलिसियां लेने लगे तो उसे ट्रैक करना यानी कि उसका हिसाब किताब रखना मुश्किल हो जाएगा। इसका एक तरीका यह है कि आपके पास एक बीमा पॉलिसी हो जिसमें आपकी बढ़ती उम्र के साथ अतिरिक्त कवर मिले।

कई बीमा कंपनियां जैसे एगॉन रेलिगेयर, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस और आईडीबीआई फोर्टिस ने ऐसी योजनाएं लॉन्च की हैं जिसके तहत आपके जीवन चक्र और जरूरतों के हिसाब से कवर बढ़ाया जाता है। अच्छी बात यह है कि प्रीमियम परिपक्वता अवधि तक तक समान बना रहता है।

एगॉन रेलीगेयर लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी के एस गोपालकृष्णन का कहना है, 'बढ़ती आय और जीवन शैली के बदलाव को देखते हुए वैसे प्लान का विकल्प चुना जा सकता है जिसमें बीमित राशि हर साल बढ़ती हो।'

एगॉन रेलिगेयर की एक स्कीम, इंक्रीजिंग टर्म प्लान में शुरुआती बीमित राशि में हर साल 5 फीसदी की बढ़ोतरी होती है। 50 लाख रुपये कवर वाली स्कीम दूसरे साल में 52.5 लाख रुपये और तीसरे साल में 55 लाख रुपये हो जाएगी। कवर तब तक बढ़ता रहता है जब तक कि यह दोगुना न हो जाए, इसके बाद यह सपाट हो जाता है। पॉलिसी की न्यूनतम अवधि 10 साल और अधिकतम अवधि 20 साल है।

एसबीआई जीवन बीमा भी ऐसे टर्म प्लान का ऑफर देती है जिसमें बीमित राशि में बढ़ोतरी होती है। इस स्कीम को एसबीआई लाइफ-शील्ड प्लान के नाम से जाना जाता है जिसमें दो विकल्प हैं। बीमा कवर को हर साल 5 फीसदी या फिर हर 5 साल पर 50 फीसदी बढ़ाया जा सकता है। अवधि का दायरा 5 और 25 सालों के बीच है।

दूसरी ओर बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस इसका ऑफर यूलिप के राइडर के तौर पर करती है जिसके तहत ग्राहक अपनी यूलिप योजना में जीवन बीमा कवर को दोगुना कर सकते हैं। राइडर में अवधि की बाध्यता नहीं होती। यह तब खत्म होता है जब पॉलिसी परिपक्व हो जाती है। केवल दो बीमा कंपनियां घटती हुई बीमित राशि का ऑफर देती हैं।

एगॉन रेलिगेयर में में डिक्रिजिंग टर्म प्लान है जिसमें हर साल बीमा कवर में 5 फीसदी की कमी आती है। एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस में इसी तरह का कवर है लेकिन यह केवल आवास ऋण में है। टर्म प्लान में बीमा का सबसे सस्ता रूप है जिसकी सलाह वित्तीय विशेषज्ञ देते हैं क्योंकि मृत्यु की स्थिति में निर्भर रहने वाले परिवार के सदस्यों को एकमुश्त राशि मिल जाती है ताकि भविष्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा किया जा सके।

बीमा की राशि की गणना करने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला तरीका व्यय प्रतिस्थापन विधि है। बीमित राशि की गणना करने के लिए सबसे पहले सालाना खर्च की गणना की जाती है उसके बाद इसका समायोजन मुद्रास्फीति से किया जाता है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए की एक व्यक्ति का सालाना खर्च 360,000 लाख रुपये है और औसत मुद्रास्फीति करीब 6 फीसदी है।

20 सालों के बाद किसी को वैसी जीवन शैली को बरकरार रखने के लिए करीब 11.6 लाख रुपये की जरूरत होगी। अगर एक व्यक्ति अपने खर्च को पूरा करने के लिए 1.45 करोड़ रुपये की पूंजी जुटा रहा है और उसने बिना किसी देनदारी के 45 लाख रुपये का प्रबंध कर लिया है। उसे 1 करोड़ रुपये के कवर खरीदने की जरूरत होगी ताकि अगर कमाने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो उस पर निर्भर रहने वाले परिवार के सदस्य आराम से रह सके।

अगर किसी के पास होम लोन जैसी देनदारियां हैं तो बीमा कंपनियां उस पर ज्यादा गौर करती हैं और अतिरिक्त कवर मुहैया कराया जाता है। हालांकि इस तरह के कवर को पाने के लिए कुछ सख्त नियम हैं और किसी व्यक्ति के जीवन चक्र को कवर करने के लिए अवधि थोड़ी कम होती है।

एक वित्तीय योजनाकार का कहना है, 'बीमा कंपनियां वैसी बीमा कवर नहीं मुहैया करा सकती जिसके लिए लोग कहते हैं। टर्म प्लान सस्ता है, किसी भी संभावित दुरुपयोग के मद्देनजर बीमर्ाकत्ता के पास खुद की सुरक्षा के लिए सख्त पॉलिसी है। वे आय को एक श्रेणी के तौर पर लेते हैं ताकि वे कवर का फैसला ले सकें और जिस बीमित राशि का ऑफर दिया जाता है वह इसका 10-12 गुना होता है।'

किसी व्यक्ति को 1 करोड़ रुपये का बीमा कवर पाने के लिए 8 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई दिखाने की जरूरत होती है। अगर आप अपने मनमाफिक बीमा कवर को पाने में सक्षम नहीं हैं तो बेहतर होगा कि आप विविध पॉलिसी का विकल्प अपनाएं।

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी बीमा योजनाओं की अधिकतम अवधि 20 वर्षों की है। इसलिए अगर आप 20 साल की पॉलिसी 35 साल की उम्र में लेते हैं तो यह 55 वर्ष की आयु के समाप्त हो जाएगा। ऐसी परिस्थिति में दूसरी टर्म इंश्योरेंस योजना लेनी महंगी पड़ेगी क्योंकि उम्र के साथ ही मर्त्यता शुल्क में बढ़ोतरी होती है।

उदाहरण के लिए अगर कोई 55 वर्षीय व्यक्ति 20 साल के लिए बढ़ती बीमित राशि की पॉलिसी लेता है तो उसे सालाना 1,04,399 रुपये का प्रीमियम देना होगा। सामान्य टर्म पॉलिसी के मामले में इसके लिए सालाना मात्र 72,577 रुपये देने होंगे।

सामान्य टर्म के मुकाबले बढ़ी बीमित राशि वाली टर्म पॉलिसी कहीं अधिक महंगी है। अगर कोई 35 वर्षीय व्यक्ति 50 लाख का बीमा कवर 20 साल के लिए लेता है तो उसे सालाना 20,075 रुपये प्रीमियम के तौर पर देना होगा। जबकि, सामान्य टर्म प्लान के लिए प्रीमियम की राशि केवल 13,848 रुपये बनती है।

प्रमाणित वित्तीय योजनाकार लोवाई नवलखी ने कहा, 'किसी व्यक्ति को टर्म पॉलिसी लेने से पहले सामान्य पॉलिसी और बढ़ती बीमित राशि वाली पॉलिसी के प्रीमियम की तुलना कर लेनी चाहिए।'

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है स्थिर प्रीमियम वाली बढ़ती बीमित राशि वाला बीमा कवर 25 से 30 वर्ष की आयु वाले व्यक्तियों के लिए ज्यादा बढ़िया है क्योकि ये अन्य पॉलिसियों की तुलना में सस्ते होते हैं। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति 50 साल के बाद ऐसी पॉलिसी लेता है तो यह काफी महंगा पड़ेगा।

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