बिजनेस स्टैंडर्ड - क्या राहत पैकेज में कमी करने के लिए मौजूदा समय उपयुक्त है?
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 28, 2020 12:02 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

क्या राहत पैकेज में कमी करने के लिए मौजूदा समय उपयुक्त है?
जिरह
बीएस /  February 17, 2010

राहत पैकेज में कटौती से हर्ज नहीं
इंद्रनील सेनगुप्ता
अर्थशास्त्री, इंडिया रिसर्च डीएसपी मेरिल लिंच लिमिटेड

अब जबकि अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, हमलोग यह मानकर चल रहे हैं कि सरकार को राहत पैकेज वापस ले लेना चाहिए। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि किसी मरीज को दवाई की जरूरत तब तक ही होती है जब तक वह बीमार है।

बीमारी खत्म होते ही दवाई बंद कर देनी पड़ती है। पिछले अपसाइकिल में अमेरिकी फे डरल बैंक के बाद  पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना और भारतीय रिजर्व बैंक वर्ष 2004 के मध्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने वाले पहले दो केंद्रीय बैंक थे। तब से लेकर चीन और भारत दोनों देशों की आर्थिक प्रगति में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और इसे महज एक संयोग नहीं कहा जा सकता है।

हम अपनी तरफ से यह मानकर चल रहे हैं कि रिजर्व बैंक वित्त वर्ष 2011 में बाजार से अतिरिक्त नकदी निकालने के लिए वित्त वर्ष 2011 में नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट पॉलिसी के तहत नीतिगत दरों में 150 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है।

बाजार में नकदी अधिक होने से महंगाई में बढ़ोतरी का खतरा मंडराता रहता है। इसके अलावा, इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि रिजर्व बैंक रियल एस्टेट क्षेत्र में कीमतों में  एक बार फिर से उफान आने की आशंका के बीच बैंकों को इस क्षेत्र को कम से कम कर्ज देने के लिए कह सकता है। इस बार के बजट में उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

इस समय एक सवाल सबके मन में यह उठ रहा है कि क्या राहत पैकेज वापस लिए जाने के बाद भी आर्थिक विकास की प्रक्रिया बदस्तूर जारी रहेगी? बिल्कुल जारी रहेगी, क्योंकि पहली बात यह है कि शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं में नौकरी के प्रति सुरक्षा का भाव एक बार फिर से जागृत होने के साथ ही वे ज्यादा खर्च करने लगे हैं।

दूसरी बात यह कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए और अगर 2011 में बारिश ठीक-ठाक हुई तो मांग में फिर से तेजी आ सकती है। तीसरी बात यह कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में 4 फीसदी सुधार की संभावनाओं के साथ ही निर्यात के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। वर्ष 2009 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 0.9 फीसदी के स्तर पर रह गई थी।

चौथी बात यह कि बुनियादी क्षेत्र में निवेश के एक बार फिर से पटरी पर आने की संभावना है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार इस क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए फिर से वित्तीय सहायता देने के लिए तैयार हो गया है। इधर देश के भीतर भी शहरी उपभोक्ताओं के विश्वास में बढ़ोतरी और मॉर्गेज दरों के कम रहने से निवेश में बढ़ोतरी हो रही है।

एक और सवाल यह उठ रहा है कि क्या राहत पैकेज वापस लिए जाने से अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे सुधार पर असर नहीं पड़ेगा? मुझे नहीं लगता कि इसका कोई असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि रिजर्व बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद भी अक्टूबर से शुरू होने वाले नए औद्योगिक सत्र से पहले बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेंगे।

इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है, क्योंकि हाल में ही आरबीआई द्वारा सीआरआर में 75 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद भी अधिकांश बैंक  घोषणा कर चुके हैं कि वे तत्काल दरों में बढ़ोतरी नहीं करने जा रहे हैं।

अभी थोड़े और इंतजार की जरूरत
ए सुब्बा राव
समूह सीएफओ - जीएमआर ग्रुप

वित्त सचिव अशोक चावला ने हाल ही में कहा था 'जब शरीर बीमारी से उबर रहा हो तो वैसी स्थिति में आवश्यकता से अधिक दवाई खतरनाक हो सकती है।'

अर्थव्यवस्था को पटरी पर  लाने के लिए दिया गया राहत पैकेज स्टीरॉयड थेरेपी की तरह है, जिसके तहत कुछ टीके आपकी जान बचा सकते हैं, जबकि कुछ को रोक दिया जाना जानलेवा हो सकता है। सरकार को राहत पैकेज वापस लिया जाना चाहिए, इस बात पर उठ रहे विवाद को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।

जब अर्थव्यवस्था में जान फूंके जाने की जरूरत थी, उस समय सरकार ने कई चरणों में राहत पैकेज की घोषणा की थी। राहत पैकेज की घोषणा किए जाने और पिछली दो तिमाहियों से अर्थव्यवस्था में सुधार को देखते हुए आम धारणा यह बन रही है कि अब देश की अर्थव्यवस्था को जीवन रक्षक प्रणाली (राहत पैकेज) पर से हटा लेना चाहिए।

हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं कि राहत पैकेज जारी रहने से लंबी अवधि में इसके दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं, लेकिन साथ ही राहत पैकेज वापस लिए जाने से पहले यह बात सुनिश्चित की जानी चाहिए कि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से मंदी की गिरफ्त से निकल आई है।

इतना ही नहीं राहत पैकेज को एक ही बार में वापस लिए जाने के बजाय इसे धीरे-धीरे वापस लिया जाना चाहिए, ताकि दोबारा किसी तरह की परेशानी की नौबत नहीं आए। इसमें कोई शक नहीं कि  चारों तरफ से अर्थव्यवस्था में सुधार होने के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन ये अभी शुरुआती रुझान हैं और यह किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचने के लिए काफी नहीं हैं।

राहत पैकेज के वापस लिए जाने से पहले ये रुझान कितने स्थायी हैं, इस बात का निश्चित तौर पर पता लगाना चाहिए। अगर किसी एक कारण की वजह से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई होती तो राहत पैकेज के वापस लिए जाने के  बारे में सोचा जा सकता था, लेकिन चूंकि, सारी आफत वैश्विक आर्थिक संकट की वजह से आई है, इसलिए जल्दबाजी में कोई कदम उठाने से पहले गंभीरता से सोचना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, जापान और यूरोप अभी भी संकट से पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं, यूरोप के  कई भागों में मुसीबत से फिर से सिर उठाने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में यह मान कर चलना कि अर्थव्यवस्था संकट से पूरी तरह उबर चुकी है, आगे चलकर घातक हो सकती है।

सरकार ने जिन उपायों की घोषणा की है उनके दो महत्त्वपूर्ण भाग हैं, एक तो मांग और नकदी में बढ़ोतरी के लिए करों में कटौती तथा निवेश और मांग को बढ़ाने के लिए नीतिगत दरों को निचले स्तर पर रखा जाना। हालांकि, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मरीज का इलाज करते हुए डॉक्टर खुद ही न बीमार पड ज़ाए।

जरूरत इस बात की है कि राहत पैकेज को वापस लिए जाने से पहले पूरी तरह से सोच-विचार करना चाहिए। आगामी 26 फरवरी को पेश होने वाले बजट में करों में कटौती में थोड़ी फेरबदल हो सकती है यानी इसमें वापस 2 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।

लिहाजा अंत में यही कहा जा सकता है कि मरीज को सघन चिकित्सा कक्ष से निकाला जा सकता है, लेकिन डॉक्टर की नजर में रखा जाना जरूरी है।

Keyword: argument, jirah,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या वैश्विक सूचकांक में भारांश बढऩे से देश में आएगा निवेश?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.