बिजनेस स?टैंडर?ड - खनन पर कोयला मंत्रालय के सख्त दिशा-निर्देश
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खनन पर कोयला मंत्रालय के सख्त दिशा-निर्देश
संजय जोग / मुंबई February 17, 2010

कोयला और लिग्नाइट ब्लॉक धारकों की खनन योजना की तैयारी का मानकीकरण करने और इसमें एकरूपता लाने के लिए कोयला मंत्रालय ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं।

इसका लक्ष्य ब्लॉक का विकास जल्दी करना है। मंत्रालय का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने पहले से ही 1990 के दौरान सरकारी और निजी उत्पादकों को आवंटित किए गए घरेलू ब्लॉकों का आवंटन रद्द कर दिया गया है। इसकी वजह यह है कि कोयला उत्पादन को शुरू करने के लिए खदानों के विकास तेजी नहीं आई।

कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 140 से ज्यादा घरेलू कोयला ब्लॉकों का आवंटन पिछले दो दशकों से किया गया है। मंत्रालय ने 11वीं योजना के अंत तक घरेलू कोयला ब्लॉक से 10.4 करोड़ टन सालाना उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

हालांकि कोयला मंत्रालय ने ब्लॉक के विकास की रफ्तार को लेकर हमेशा चिंता जताई है और कभी-कभी राज्य सरकार की मदद भी मांगी है ताकि राज्य से जुड़े मसले का समाधान निकल सके।

सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि कोयला और लिग्नाइट ब्लॉक धारकों को अपनी खदान योजना में यह बात रखना होगा कि वे इसमे कोई फेरबदल कर सकते हैं या नहीं और इस खनन परियोजना से कितनी जरूरतें पूरी होंगी।

इसके अलावा यह भी बताना होगा कि इस परियोजना से होने वाली कोयले की आपूर्ति किसी मौजूदा लिंकेज की जगह लेगी या नहीं और कोयले के संतुलन की जरूरत को कैसे पूरा किया जाएगा। कोयले की लदाई का तरीका क्या होगा और कोयले की धुलाई किस जगह पर होगी।

ब्लॉक धारकों को खनन के लिए तय किए गए खदानों के बारे में जियोलॉजिकल रिजर्व को सूचित करने की जरूरत होगी। ओपनकास्ट खदान के बारे में सूचित करते वक्त यह बताना होगा कि इसका कट ऑफ अनुपात क्या है और इसका कोयले को खदान से निकालने का औसत अनुपात क्या है। मौजूदा खदान और पुराने खदान की बात करें तो भंडार में से पहले से ही खनन हो गया है।

सूत्रों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण से जुड़ी दिक्कतों और जरूरी क्लियरेंस से खदान विकास योजना में देरी के मद्देनजर मंत्रालय ब्लॉक धारकों से मौजूदा स्वामित्व और जमीन पर दखल और जंगल सहित भूमि का स्पष्ट ब्योरा चाहता है।

इसके अलावा ब्लॉक धारकों को कुल जमीन की जरूरतों का विवरण भी देना होगा जिसमें मौजूदा जमीन के इस्तेमाल और प्रस्तावित जमीन के इस्तेमाल की जानकारी भी हो। उन्हें यह भी संकेत देने की जरूरत है कि खनन ब्लॉक के लिए कितनी जमीन का प्रस्ताव रखा गया है।

अगर कोई जमीन आवंटित ब्लॉक में नहीं है तो उस पर खनन के पट्टे के लिए विचार नहीं किया जाएगा। इसी तरह ब्लॉक धारकों को ब्लॉक की सीमा के बाहर की जमीन का ब्योरा भी देना होगा अगर उस जमीन पर खनन का कोई प्रस्ताव रखा गया हो। जहां तक पर्यावरण प्रबंधन की बात है कोयला मंत्रालय ब्लॉक धारकों से खनन के असर का ब्योरा भी चाहती है।

Keyword: coal, lignite, blocks, mining plan, ministry of coal,
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