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कर्मचारी घटे पर उत्पादकता में हुई बढ़ोतरी
निजी जीवन बीमा कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या लगभग 34,000 घटी पर एजेंटों की तादाद में हुआ इजाफा
बीएस संवाददाता / मुंबई February 15, 2010

हो सकता है कि कंपनियां एक बार फिर नियुक्तियों का दौर शुरू कर रही हों लेकिन निजी जीवन बीमा कंपनियों की कर्मचारियों की संख्या अप्रैल से दिसंबर 2009 की अवधि में लगभग 34,000 या 18 प्रतिशत कम हुई है।

निजी जीवन बीमा कंपनियों ने खर्च कम करने की दिशा में यह कदम उठाया था। जीवन बीमा परिषद के नवीनतम आंकडों के अनुसार कर्मचारियों की संख्या दिसंबर 2008 के अंत में जहां 1,88,645 थी वहीं दिसंबर 2009 में यह घट कर 1,52,874 रह गई।

जीवन बीमा कंपनियों के वितरण नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अभिकर्ताओं के अलावा कंपनियां वेतन के आधार पर भी कर्मचारियों को नियुक्त करती हैं। इस अवधि के दौरान एजेंटों की संख्या 7.59 प्रतिशत बढ़ कर 29.80 लाख पर पहुंच गई जबकि एक साल पहले की अवधि में यह संख्या 27.70 लाख थी।

एक तरफ इस अवधि (दिसंबर 2009 में समाप्त हुई नौ महीने की अवधि) के दौरान कर्मचारियों की संख्या घटने के बावजूद बिक्री में बढ़ोतरी हुई। इस अवधि में नई पॉलिसियों की बिक्री से होने वाली आय में 25 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। व्यक्तिगत स्तर पर कंपनियों ने वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या बताने से इनकार कर दिया।

निजी बीमा कंपनी एसबीआई लाइफ के मुख्य वित्तीय अधिकारी अभिजीत गुलानिकर ने कहा, 'नौकरी बदले जाने की वजह से कर्मचारियों की संख्या घटी है। लेकिन यह संख्या मामूली है क्योंकि इस अवधि के दौरान नियुक्तियां भी की गई थी।'

आईडीबीआई फोर्टिस कि प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी जी वी नागेश्वर राव ने कहा, 'बीमा कंपनियां लाभोत्पादकता पर ध्यान दे रही है और अक्रिय कर्मचारियों के मामले में कटौती कर रही है। कर्मचारियों की संख्या घटने से उत्पादकता में भी बढ़ोतरी हुई है।'

एक जीवन बीमा कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'जब कोई कर्मचारी बपने बिक्री के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाता तो कंपनी छोड़ने के लिए बाध्य होना होता है। पिछले साल कंपनियों ने बिक्री का लक्ष्य बढ़ा दिया था क्योंकि वे क्षमता बढ़ाना चाहते थे। इस अवधि के दौरान कर्मचारियों की भी उत्पादकता बढ़ी है।'

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