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टाटा पावर : तिमाही नतीजे नहीं हैं बेहतर
दिशासूचक
विशाल छाबड़िया और सुनयना वासुदेव /  February 15, 2010

कम ऊर्जा उत्पादन और प्राप्तियों की वजह से दिसंबर 2009 की तिमाही में टाटा पावर की शुद्ध बिक्री में सालाना 12 फीसदी की गिरावट आई और यह 1,528 करोड़ रुपये हो गया।

हालांकि परिचालन आय और शुद्ध लाभ में क्रमश: 42 फीसदी और 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 364 करोड़ रुपये और 148 करोड़ रुपये हो गया। ईंधन की कम लागत का फायदा ग्राहकों को मिला जिससे प्राप्तियों में कमी आई।

ट्रॉम्बे की दो इकाइयों के बंद होने से और वर्ष 2009 में 500 मेगावॉट की क्षमता के जुड़ने के बावजूद ऊर्जा उत्पादन सपाट रहा। विद्युत उत्पादन की प्रति यूनिट ईंधन लागत दिसंबर 2008 की तिमाही के 3.31 रुपये से कम होकर ताजा तिमाही में यह 2.46 रुपये हो गया। 

ईंधन मिश्रण में बदलाव की वजह से ईंधन लागत में 26 फीसदी की बचत हुई। इसका फायदा उपभोक्ताओं पर डाला गया नतीजतन सालाना 12 फीसदी की कमी आई और यह एक साल पहले की अवधि के 4.7 रुपये की तुलना में इस तिमाही में 4.1 रुपये प्रति यूनिट हो गया।

विश्लेषकों के मुताबिक वाणिज्यिक बिक्री के लिए औसत टैरिफ में गिरावट आई और यह पहले की तिमाही के 5.5-6.5 रुपये से 5.37-6.21 रुपये हो गया।  परिचालन स्तर पर उत्पादन और बिक्री सपाट रहे। पूरी तरह से एबिटा मार्जिन में सालाना 9.5 फीसदी अंकों का विस्तार हुआ और यह 26.8 फीसदी हो गया। हालांकि इसमें क्रमिक आधार पर 265 आधार अंक की कमी आई।

कंपनी फिलहाल सही रास्ते पर है और यह वर्ष 2011-12 के अंत तक अपनी उत्पादन क्षमता को लगभग दोगुना करने की कोशिश में है। ज्यादातर परियोजनाएं अपने समयानुसार चल रही हैं। मैथॉन संयंत्र वर्ष 2010-11 में शुरू हो जाएगा। वहीं मुंद्रा यूएमपीपी में 2011-12 में परिचालन शुरू होगा।

कंपनी को मंदाकिनी कोल ब्लॉक में खनन योजना के लिए स्वीकृति मिली है और इसके लिए ज्यादातर औपचारिकता पहले से ही पूरी हो चुकी हैं। विश्लेषकों के मुताबिक कोयला उत्पादन जुलाई 2011 से शुरू होने की उम्मीद है। टयूब्ड ब्लॉक खनन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और इसे राज्य सरकार के पास जमा कर दिया गया है। वर्ष 2012 से उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

टाटा पावर ने बुमी समूह के दो इंडोनेशियाई कोयला खदानों में अपने अधिग्रहण की हिस्सेदारी खरीदी है। बुमी 2.93 करोड़ टन का खनन किया जिसकी औसत लागत वर्ष 2009-10 की पहली छमाही में 60 डॉलर प्रति टन थी। विश्लेषकों का कहना है कि कोयले की कीमत में करीब 11 फीसदी की तेजी आई है और यह नवंबर 2009 से करीब 90 डॉलर प्रति टन हो गया है।

इस महीने के बाद में जो आंकड़े आएंगे उसे देखना दिलचस्प रहेगा। दूसरी सकारात्मक बात करीब 500 मेगावॉट को मुक्त करना है जिसकी आपूर्ति पहले मुंबई में रिलायंस इन्फ्रा को की जाती थी। करीब 200 मेगावॉट वाणिज्यिक कारोबार के लिए उपलब्ध होगा और बाकी की बिक्री नियमित आधार पर अप्रैल 2010 से होगी।

वर्ष 2010 की शुरुआत से इसके शेयर का प्रदर्शन बीएसई सेंसेक्स के समान ही हुआ है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर इस कंपनी के शेयर 1,239.85 रुपये पर बंद हुए। विश्लेषकों के मुताबिक इसका कारोबार 2010-11 की प्रति शेयर कमाई के अनुमान से 15.4 गुना पर हो रहा है। विश्लेषक के मुताबिक शेयर की कीमत 1,500 रुपये होने का अनुमान है। इससे ऊपरी बढ़त के संकेत मिलते हैं।

एशियन पेंट्स : रंगत है खुशनुमा

कारोबार में जबरदस्त वृद्धि और इनपुट की कम लागत से एशियन पेंट्स ने तिमाही में उम्मीद से कहीं बेहतर नतीजे दिए। अक्टूबर 2009 से एशियन पेंट्स के शेयर का प्रदर्शन सेंसेक्स के मुकाबले बेहतर रहा।

पिछले पखवाड़े में उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन होने से तिमाही के नतीजे अच्छे रहे। 25 जनवरी को सेंसेक्स में 5 फीसदी गिरावट के मुकाबले शेयर में लगभग 12 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। हालांकि दिसंबर 2009 की तिमाही में बिक्री में वृद्धि हुई और यह विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक ही था।

परिचालन और शुद्ध लाभ उम्मीद से कहीं आगे था। कंपनी की कमाई वृद्धि 26.8 फीसदी रही और इससे तेज कारोबारी वृद्धि में मदद मिली, विश्लेषकों के मुताबिक यह 20 फीसदी ज्यादा था। शहरी बाजार और मझोले और छोटे बाजारों में ज्यादा मांग से कारोबार में वृद्धि हुई।

परिचालन स्तर पर एकल मार्जिन में तेजी आई और यह दिसंबर 2008 की तिमाही के महज 8 फीसदी की तुलना में 20.35 फीसदी हो गया। इससे परिचालन लाभ में 223 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 260 करोड़ रुपये हो गया।

कच्चे माल की लागत में कम वृद्धि से मुनाफा मिला जिसमें सालाना 11.5 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 711 करोड़ रुपये हो गया या यूं कहें कि शुद्ध बिक्री का यह 55.6 फीसदी था। दिसंबर 2008 की तिमाही के नतीजे असंतोषजनक थे जबकि कच्चे माल की लागत में 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि बिक्री में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

पेंट बनाने के लिए एक इनपुट के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले टाइटैनियम डाइऑक्साइड की कीमत में भी तेजी आई जिससे कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ा। इसी वजह से नतीजे के बाद शेयर में गिरावट आई और यह एक हफ्ते में ही 923 रुपये के स्तर से गिरकर 750 रुपये पर चला गया। हाल की तिमाही में परिचालन स्तर पर मुनाफे में सुधार बेहतर रहा।

विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी ने कम इनपुट लागत की वजह से सभी मुनाफे का फायदा ग्राहकों को नहीं दिया। सभी दूसरी लागत में भी धीमी रफ्तार से बढ़त हुई जिससे मुनाफे में बढ़ोतरी हुई। कंपनी की शुद्ध लाभ वृद्धि 256 फीसदी पर बेहतर रही और इसमें कम कर दर से मदद मिली।

कंपनी की कुल बिक्री में भी सालाना 22.5 फीसदी की दर से वृद्धि हुई और यह 1,600 करोड़ रुपये हो गई जबकि शुद्ध लाभ में 236.5 फीसदी की उछाल आई और यह दिसंबर की तिमाही में 198.6 करोड़ हो गया। कंपनी के प्रबंधन को ऐसा लगता है कि भविष्य में मार्जिन को बरकरार रखने में मुश्किल आएगी।

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि मांग में सुधार और कंपनी की पहल से उद्योग के मुकाबले कारोबार में वृद्धि बेहतर होना चाहिए। उम्मीद से कहीं बेहतर नतीजे और बेहतर नजरिये की वजह से विश्लेषकों ने वर्ष 2010-11 में कंपनी के लिए कमाई के अनुमान की समीक्षा की।

हालांकि कमाई में सुधार के बाद और 1,933 रुपये की मौजूदा कीमत की वजह से शेयर का कारोबार 2010-11 की अनुमानित कमाई से 22 गुना ज्यादा है और इसका मूल्यांकन बेहतर लगता है। भविष्य में उम्मीद है कि शेयर का प्रदर्शन, बाजार के अनुमान के मुताबिक ही होगा।

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