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मुकेश अंबानी गुजरात ले जाएंगे अपना मुख्यालय!
मुंबई से रिलायंस इंडस्ट्रीज का कार्यालय गुजरात शिफ्ट करने की योजना
रंजू सरकार / मुंबई February 15, 2010

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अकेले ऐसे कंपनी के मुखिया नहीं हैं, जो अपनी कंपनी का पंजीकृत मुख्यालय मुंबई से हटाकर गुजरात ले जाने की योजना बनाई है।

बल्कि ऐसी कंपनियों की लंबी कतार है, जिन्होंने प्रशासनिक सुविधा की वजह से अपना कार्यालय का स्थानांतरण किया है। हालांकि रिलायंस ने मुख्यालय बदलने के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की। पिछले तीन साल के दौरान करीब 150 कंपनियों ने अपने पंजीकृत कार्यालय का स्थानांतरण किया है। इनमें से कई कंपनियां अपना कार्यालय एक राज्य से दूसरे राज्य में ले गई हैं।

टेक्सटाइल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी आलोक इंडस्ट्रीज अपना पंजीकृत कार्यालय मुंबई से हटाकर सिलवासा ले गई। आलोक इंडस्ट्रीज के सीएफओ सुनील खंडेलवाल ने बताया कि ऐसा करने के पीछे वाजिब तर्क है। उनका कहना है कि कंपनी ने अपना करीब 70 फीसदी निवेश सिलवासा में किया है, वहीं कंपनी के करीब 70 फीसदी से ज्यादा कर्मचारी भी सिलवासा से ही आते हैं।

जीएमआर समूह के सीएफओ सुब्बा राव का कहना है कि आमतौर पर कंपनियां प्रशासनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अपना कार्यालय शिफ्ट करती हैं। या फिर कंपनी की गतिविधियों और आयकर व रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) को ध्यान में रखते हुए अपना कार्यालय स्थानांतरित करने का निर्णय लेती है, ताकि तमाम तरह की सुविधाएं एक साथ एक ही जगह पर उपलब्ध हो सके।

इसी को ध्यान में रखते हुए जीएमआर ने भी अपने सभी कंपनियों के पंजीकृत कार्यालयों को बेंगलुरु में स्थापित की है, ताकि आयकर विभाग और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के साथ काम करने में आसानी हो। कंपनियों के लिए यह जरूरी होता है कि वे सभी जरूरी दस्तावेजों, जिनमें आयकर आदि शामिल हैं, उसे उन्हीं जगहों पर फाइल करने होते हैं, जहां पंजीकृत कार्यालय स्थित हो।

कार्वी ग्रुप के चेयरमैन सी. पार्थसारथी का कहना है कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी कंपनियों के लिए निर्माण इकाई या कारखाने के पास पंजीकृत कार्यालय का होना फायदेमंद है। कई मामलों में ऐसा होता है कि जो राज्य किसी परियोजना को सहायता देते हैं, वह चाहता है कि कंपनी का पंजीकृत कार्यालय उसी राज्य में हो। इससे राज्य और वहां के लोगों को भी फायदा होता है। राज्य को स्टांप डयूटी और अन्य गतिविधियों से आर्थिक लाभ मिलता है।

हालांकि पार्थसारथी का कहना है कि कंपनियां अपना पंजीकृत कायार्यलय किसी एक कारण के चलते नहीं करते हैं, बल्कि अलग-अलग कंपनियों के मामले में इसकी वजह अलग-अलग होती है। बजाज हिंदुस्तान शुगर ऐंड इंडस्ट्रीज की ओर से प्रतापपुर शुगर ऐंड इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण करने के बाद इसका पंजीकृत कार्यालय को कोलकाता से मुंबई ले जाया गया।

इसी तरह इमामी ने अधिग्रहण के बाद झंडु फार्मास्यूटिकल वर्क्स का पंजीकृत कार्यालय मुंबई से कोलकाता ले गई। जयपुर एक्सप्रेस वे पर काम शुरू करने के बाद जीवीके पावर ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर ने अपना पंजीकृत कार्यालय दिल्ली में स्थापित किया। लेकिन 2007 में वह अपना पंजीकृत कार्यालय प्रशासनिक सुविधा के लिहाज से सिकंदराबाद ले गई।

जीवीके के एक अधिकारी ने बताया कि हमारी कंपनी मुख्य रूप से हैदराबाद की है। ऐसे में कंपनी की सालानास आम बैठक दिल्ली में करने का कोई मतलब नहीं बनता था।
    (साथ में अशोक दिवासे, बीएस रिसर्च ब्यूरो ) 

कंपनियों के कार्यालयों का स्थानांतरण

वर्ष                              कंपनी                     पहले           अब
2009                  एडवांटा इंडिया             बेंगलुरु    सिकंदराबाद
2008                 बिनानी मेट्ल्स              मुबंई        कोलकाता
2006                  ईसाब इंडिया                मुंबई         चेन्नई
2008                गायत्री प्रोजेक्ट्स            मुंबई        हैदराबाद
2009            जीएमआर इंडस्ट्रीज       हैदराबाद       बेंगलुरु
2007                जीवीके पावर            नई दिल्ली   सिकंदराबाद
2009        एचएफसीएल इन्फोटेल        पंजाब          मुबंई
2007         स्टरलाइट इंडस्ट्रीज       औरंगाबाद     तूतीकोरिन
2009               झंडु फार्मा                     मुंबई        कोलकाता
(स्त्रोत: बीएस रिसर्च ब्यूरो)

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