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उच्चतम न्यायालय ने सीमा शुल्क में छूट का दावा किया नामंजूर
अदालत से
बीएस /  February 15, 2010

सर्वोच्च न्यायालय ने सीमा शुल्क के एक मामले में मैसर्स सांघवी रिकंडीशनर्स लिमिटेड के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए की गई अपील खारिज कर दी है।

इस मामले में फर्म ने सीमा शुल्क में छूट का दावा किया था। यह कंपनी एक आयातक और पोतों की मरम्मत करने वाली यूनिट है और नौवहन महा निदेशालय में पंजीकृत है। पूछताछ के दौरान सीमा शुल्क अधिकारियों को पता चला कि कंपनी ने 1983 की अधिसूचना के तहत गुपचुप तरीके से आयात शुल्क में छूट का लाभ प्राप्त किया।

इंजीनियरिंग सामान की विविध खेप के आयात में 'पोतों के कल पुर्जों' के रूप में यह छूट हासिल की गई। बाद में पता चला कि यह कंपनी कुछ सौदों में छूट की पात्र नहीं थी। निपटान आयुक्त को पता चला कि इस मामले में तथ्यों को छुपाया गया और उसने शुल्क की मांग की।

उच्च न्यायालय ने इन निष्कर्षों को सही पाया और उसने आगे और आपत्तियां उठाने की अनुमति नहीं दी। सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले का अनुमोदन किया।

दोषी कर्मचारी को जांच रिपोर्ट देना जरूरी नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह अपने एक फैसले में कहा कि दुर्व्यवहार के लिए दंड का सामना कर रहे एक बैंक कर्मचारी को जांच रिपोर्ट नहीं दिए जाने से दंड गैरकानूनी नहीं हो जाता। दोषी कर्मचारी को यह साबित करना था कि रिपोर्ट न दिए जाने से उसके साथ पक्षपात हुआ जिससे उसके साथ अन्याय हुआ।

सर्वोच्च न्यायालय ने सर्व यूपी ग्रामीण बैंक बनाम मनोज कुमार मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को निरस्त कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में कर्मचारी की तनख्वाह छह चरणों में काटने की बैंक की कार्रवाई को सही ठहराया।

कर्मचारी की दलील थी कि उसे जांच रिपोर्ट की प्रति नहीं दी गई जो बुनियादी सिध्दांतों का उल्लंघन है और इस वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई गैर-कानूनी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वह यह साबित नहीं कर सका कि इससे उसके साथ पक्षपात हुआ।

चीनी फूड ट्रेड मार्क के मामले में फैसला नेस्ले के पक्ष में

दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पिछले सप्ताह ट्रेड मार्क के मामले में मूड हॉस्पिटेलिटी लिमिटेड के खिलाफ नेस्ले इंडिया लिमिटेड की याचिका स्वीकार कर ली।

मूड का कहना था कि यो! और यो! चाइना उसकी कंपनी की विशिष्ट पहचान बन चुकी है। इसलिए उसने चीनी फूड रेस्टोरेंट स्थापित करने और संचालित करने में इस ट्रेड मार्क का इस्तेमाल करने के विशेष अधिकार पर दावा किया। उसका कहना था कि उसकी भारत के 15 शहरों में ऐसे करीब 40 रेस्टोरेंट की चेन है।

न्यायालय के एकल पीठ ने नेस्ले के इन ट्रेड मार्कों के इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी। खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि मूड का पंजीकृत ट्रेड मार्क यो! है, न कि यो चाइना!, इसलिए यो! चाइना को एकसाथ मानते हुए 'यो' से भ्रमित नहीं होना चाहिए।

किंग ट्रेड मार्क पर रोक का आदेश खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने किंग शब्द वाले ट्रेड मार्क पर लगी रोक पिछले सप्ताह हटा दी।  इस शब्द को लेकर जेके ऑयल इंडस्ट्रीज और अदाणी विल्मर लिमिटेड के बीच विवाद चल रहा था।

जेके ऑयल का आरोप था कि अदाणी ने अपने सामान और सेवाओं में एक ट्रेड मार्क (लेबल)के रूप में किंग्स लेबल का इस्तेमाल किया जो उसके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऑयल किंग के जैसा है। इसके अलावा अदाणी ने जेके ऑयल की ही तरह आइडिया और अन्य विशेषताओं का इस्तेमाल किया।

हालांकि न्यायालय ने पहले इस पर स्थगनादेश दे दिया था लेकिन बाद में उसने इसे खारिज कर दिया। उसका कहना था कि अन्य कई कंपनियों ने किंग शब्द का अपने ट्रेड नेम की तरह इस्तेमाल किया है और उनका पंजीकरण भी कराया है। किंग अंग्रेजी का एक सामान्य शब्द है और इसे जेके ऑयल के उत्पादों के विशेष शब्द के रूप में दावा नहीं किया जा सकता।

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