बिजनेस स्टैंडर्ड - कम भाव पर लगाइए दाव
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कम भाव पर लगाइए दाव
पिछले एक साल के दौरान बाजार में आई तेज उछाल के बावजूद अभी भी कई अच्छी कंपनियों के शेयर आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हैं
जितेंद्र गुप्ता और राम प्रसाद साहू /  February 15, 2010

मंदी से जूझते पिछले साल में मार्च से लेकर अक्टूबर तक बाजार में उछाल जारी रही, लेकिन इसके बाद कारोबार अभी कोई निश्चित दिशा हासिल नहीं कर सका है।

अभी भी हालत यह है कि विभिन्न वैश्विक कारकों के चलते भारतीय शेयर बाजार की दिशा के बारे में कुछ कहना काफी कठिन है। हालांकि, हाल में सेंसेक्स और साथ ही मझोली और बड़ी कंपनियों में आई 8-9 फीसदी गिरावट ने कुछ बेहतर कंपनियों में निवेश का मौका तो दिया ही है।

'स्मार्ट इन्वेस्टर' ने ऐसी ही कुछ कंपनियों का चयन किया है जिनका बाजार पूंजीकरण 100 करोड़ रुपये है। इन कंपनियों के शेयरों का कारोबार कम कीमतों या इकाई अंकों के प्राइस-टू-अर्निंग अनुपात पर हो रहा है।

हालांकि, कम भावों का मतलब कतई नहीं है कि बाजार में गिरावट आने से इन कंपनियों के शेयरों के मूल्यांकन में कमी नहीं आएगी, लेकिन एक बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि अगर कंपनी बुनियादी रुप से मजबूत है तो उसमें बहुत गिरावट की संभावना नहीं होगी। साथ ही बाजार में कारोबार की दशा सुधरी तो इनके शेयरों को फिर से बढ़ने में भी अपेक्षाकृत कम समय लगेगा।

ये कंपनियां निवेश के लिहाज से कितनी फायदेमंद हो सकती हैं, इसके लिए विभिन्न मानदंडों पर इनके प्रदर्शन को आंका गया है जिनमें लाभांश वितरण का रिकॉर्ड, नकदी का प्रवाह, प्रतिफल का अनुपात, प्रबंधन क्षमता आदि प्रमुख हैं।

नीचे जिन कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे ज्यादातर मझोली और छोटी कंपनियों की श्रेणी में आती हैं, लेकिन इनमें से कुछ की अपनी क्षेत्र में अच्छी पहुंच है। सबसे अहम बात यह है कि इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें चढ़ने की संभावनाएं काफी प्रबल हैं।

आमरा राजा बैटरीज

भारत की दूसरी सबसे बड़ी बैटरी निर्माता कंपनी के राजस्व में वित्त वर्ष 2004-2009 की पांच वर्ष की अवधि में 50 फीसदी की चक्रवृध्दि दर से बढ़ोतरी दर्ज गई है।

कंपनी का राजस्व औद्योगिक और ऑटो सेगमेंट में बंटा हुआ है, और उम्मीद की जा रही है कि चालू वित्त वर्ष के अंत में इसका कुल राजस्व 1,400 करोड रुपये रहेगा। दिसंबर तिमाही में कंपनी का राजस्व 10 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 366 करोड रुपये रहा था, जबकि शुध्द मुनाफा दोगुनी बढ़ोतरी के  साथ 40 करोड रुपये था।

पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी के परिचालन मुनाफा मार्जिन में 500 आधार अंकों की बढ़ोतरी हुई थी और यह 19 फीसदी के स्तर पर रहा था। बैटरी बनाने में काम आने वाले कच्चे पदार्थ सीसे की कीमतों में पिछले एक साल में दोगुनी तेजी आई है, लेकिन आने वाले समय में इसकी कीमत घटकर 2200-2400 डॉलर के बीच स्थिर रह सकती है।

इसे एक अच्छे संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि कंपनी की लागत में कच्चे पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी होती है। अगर इनकी कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी हुई तो मार्जिन पर प्रतिकू ल असर पड़ सकता है। इस दबाव को तभी कम किया जा सकता है, जब कंपनी इसका भार ग्राहकों पर लादे।

दूरसंचार कारोबार में आई गिरावट से निपटने के लिए कंपनी रेलवे और यूटिलिटीज सेगमेंट पर ध्यान दे रही है। इस समय 152 रुपये के स्तर पर कंपनी के शेयरों का कारोबार वित्त वर्ष 2010-11 के 21 रुपये की अनुमानित ईपीएस के  7.2 गुना के स्तर पर हो रहा है और उम्मीद की जा रही है कि अगले एक साल में इसमें 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी होगी।

अपोलो टायर्स

वित्त वर्ष 2008-09 में ऑटो क्षेत्र का प्रदर्शन खस्ता रहने के बाद पिछले चार महीने में प्रमुख ऑटो श्रेणियों और व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में आश्चर्यजनक बढ़ोतरी हुई है।

मिसाल के तौर पर व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में जनवरी महीने में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। इससे देश के व्यावसायिक वाहनों की सबसे बड़ी टायर निर्माता कंपनी अपोलो टायर्स को काफी मदद मिल सकती है।

दिसंबर 2009 की तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड राजस्व 12.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,296 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी द्वारा टायरों में 5-10 फीसदी की बढ़ोतरी करने के बाद भी स्टैंडअलोन आधार पर कच्चे माल की कीमतों में आई तेजी से परिचालन मुनाफा मार्जिन 90 आधार अंकों की गिरावट के साथ 15.4 फीसदी रहा था।

चौथी तिमाही में कंपनी के मार्जिन पर दबाव बरकरार रह सकता है, क्योंकि प्राकृतिक रबर की कीमतें अभी भी काफी अधिक हैं। मार्जिन में गिरावट रोकने के लिए कंपनी को टायरों की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। इस समय 55 रुपये के स्तर पर अपोलो टायर के शेयरों का कारोबार वित्त वर्ष 2010-11 की अनुमानित आय के 7.3 गुना के स्तर पर हो रहा है।

भारती शिपयार्ड

कारोबार खस्ता रहने और नए ऑर्डरों की दयनीय स्थिति से शिपयार्ड कंपनियों के शेयरों का कारोबार कम कीमतों पर हो रहा है। हालांकि, जहां तक भारती शिपयार्ड की बात है, इसके खाते में अधिक से अधिक नए ठेके होने से इसकी स्थिति काफी मजबूत है।

इस समय कंपनी की झोली में 5,000 करोड रुपये के ऑर्डर हैं, जो इसके वित्त वर्ष 2008-09 की बिक्री की तुलना में 5 गुना अधिक हैं। यानी अगले दो सालों तक राजस्व के मोर्चे पर कंपनी के लिए संभावनाएं काफी अच्छी हैं। कंपनी के पास मौजूद ऑर्डरों को देखते हुए विश्लेषकों का लग रहा है कि वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी का राजस्व और शुध्द मुनाफा काफी बढ़िया रह सकता है।

ऑफशोर कारोबार में आई गिरावट से निपटने के लिए कंपनी अन्य क्षेत्रों जैसे प्रतिरक्षा क्षेत्र से ऑर्डर हासिल करने की कोशिश कर रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होने की स्थिति में भारती शिपयार्ड को दो तरीकों से फायदा हो सकता है। पहला जहाज निर्माण के कारोबार में इसकी उपस्थिति से और दूसरी हाल में ही ग्रेट ऑफशोर के अधिग्रहण की वजह से।

सी ऐंड सी कंस्ट्रक्शन

सी ऐंड सी कंस्ट्रक्शंस छोटे आकार की निर्माण कंपनी है, जिसका कारोबार कई जगह पर है। निर्माण क्षेत्र में बेहतर मौकों  की मौजूदगी के कारण कंपनी की ऑर्डर बुक में काफी बढ़ोतरी हुई है।

वित्त वर्ष 2004-05 में जहां कंपनी के पास महज 109 करोड रुपये के ऑर्डर थे, वहीं मौजूदा समय में यह बढ़कर 3,100 करोड रुपये के स्तर पर पहुंच चुके हैं। यह आंकड़ा 2008-09 के राजस्व का 4 गुना है और इसकी मदद से अगले दो से तीन सालों में कंपनी के कारोबार में विकास की काफी संभावनाएं बन रही हैं।

कंपनी वाटर और पावर ट्रांसमिशन कारोबार में भी अपने पांव पसार रही है और पावर ग्रिड की तरफ से इसे 400 केवी ट्रांसमीशन लाइन की आपूर्ति और इसे खडा करने का ऑर्डर मिल चुका है। विश्लेषकों के अनुसार वित्त वर्ष 2009-10 के लिए कंपनी के राजस्व में सालाना आधार पर 50 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।

निर्माण क्षेत्र में बेहतर अवसरों को देखते हुए  कहा जा सकता है कि वित्त वर्ष 2010-11 के बाद भी कंपनी के लिए विकास की संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि, 2007 के आस-पास कंपनी अपना आईपीओ लाई थी और इसके बाद से यह पिछले सात सालों से निवेशकों को लाभांश देती आ रही है।

डिशमैन फार्मास्युटिकल्स

क्रेम क्षेत्र की अग्रणी कंपनी डिशमैन फार्मास्युटिकल्स की बिक्री में वित्त वर्ष 2004-09 की अवधि में 27 फीसदी की चक्रवृध्दि दर से बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही मुनाफे में 37 फीसदी की तेजी आई है। कंपनी का कारोबार चार विभिन्न क्षेत्रों में बंटा हुआ है जो इसके मुख्य कारोबार सीआरएमएस के अतिरिक्त है।

एक ओर जहां कांट्रैक्ट रिसर्च कारोबार की संभावनाएं बेहतर नजर आ रही हैं, वहीं बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शोध और विकास (आरऐंडडी) में कटौती और कारोबार की पुनर्संरचना से निकट अवधि में कंपनी के लिए संभावनाएं अनिश्चित लग रही है।

कंपनी अपने कार्बोजेन कारोबार की पुनर्संरचना कर रही है, क्योंकि दिसंबर तिमाही में साल-दर-साल आधार पर इस कारोबार से प्राप्त होने वाले राजस्व में 41 फीसदी की गिरावट आई है और यह महज 67 करोड रुपये रहा था।

अमेरिका में एफडीए द्वारा कंपनी के प्लांटों की तलाशी लिए जाने के कारण उसे अपने प्लांटों को बंद करना पड़ा था, जिससे एमऐंडएम डिवीजन में 48 फीसदी की गिरावट आई थी। इस गिरावट की वजह से कंपनी के दिसंबर 2009 की तिमाही के कुल राजस्व में 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

कंपनी प्रबंधन वित्त वर्ष 2010-11 में कुल राजस्व में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हासिल करने के लिए प्रयास कर रहा है। मौजूदा समय में 207 रुपये के स्तर पर कंपनी के शेयरों का कारोबार वित्त वर्ष 2010-11 के लिए?अनुमानित 18.5 रुपये ईपीएस के 11 गुना के स्तर पर हो रहा है।

जिंदल सॉ

कंपनी के पाइपों की पोर्टफोलियो में खासी विविधता होने से यूजर इंडस्ट्री खासकर भारत में जिंदल शॉ के लिए कारोबार की संभावना काफी बेहतर है। कंपनी ऑटो, पावर, वाटर, सीवेज और तेल एवं गैस क्षेत्र के ग्राहकों को पाइप की आपूर्ति करती है।

निर्यात बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और निवेश में सुधार के साथ ही जिंदल शॉ को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। इस समय कंपनी के पास 3,400 करोड रुपये की ऑर्डर बुक है (इसमें 1,200 करोड रु पये के निर्यात के ऑर्डर भी हैं) जो मध्यम अवधि में इसके बेहतर कारोबार की तस्वीर पेश करते हैं।

जल और तेल एवं गैस क्षेत्रों में पाइपों की बढ़ती मांग के चलते घरेलू पाइप कारोबार में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। नए गैस क्षेत्रों की खोज और उत्पादन पर अधिक से अधिक खर्च किए जाने से नए ऑर्डर तेजी से मिल रहे हैं।

जिंदल सॉ अपनी क्षमता को और अधिक बढ़ाने में जुटी है और यह 200,000 टन डक्टाइल पाइप क्षमता और 100,000 टन की एचएसएडब्ल्यू क्षमता स्थापित कर रही है जो क्रमश: जून 2011 और 2010 तक शुरू हो जाएंगे।

विस्तार योजनाओं और इस क्षेत्र में कारोबार की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए कंपनी के राजस्व और आय में अगले दो-तीन सालों में सालाना 18-20 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद जाहिर की जा रही है।

जे कुमार इन्फ्रा

अपेक्षाकृत मझोले आकार की निर्माण कंपनी जे कुमार इन्फ्रा की परियोजनाओं में अगले दो सालों में 50 फीसदी से अधिक की बढाेतरी होने की संभावना है। इस उम्मीद की मुख्य वजह कंपनी के पास पड़े 1,300 करोड रुपये के ऑर्डर हैं, जो इसके वित्त वर्ष 2008-09 के राजस्व का तीन गुना है।

कंपनी के 3,000 करोड रुपये मूल्य की परियोजनाओं की बोली लगाने से इसकी  ऑर्डर बुक में और अधिक बढ़ोतरी होने की संभावना है। कंपनी के कारोबार में काफी विविधता है और यह परिवहन, सिंचाई, पाइल बनाने, ब्रिज, एयरपोर्ट रनवे और बिल्डिंग के निर्माण का काम करती है।

ध्यान रहे कि कंपनी ज्यादातर सरकारी एजेंसियों की परियोजनाओं पर ही काम करती है, जहां निवेश काफी अधिक होता है और आर्थिक मंदी से यह बहुत अधिक प्रभावित नहीं होता है। इस समय कंपनी के शेयरों का कारोबार 187 रुपये के स्तर पर हो रहा है जो वित्त वर्ष 2010-11 की आय पर 5.5 गुना की छूट पर उपलब्ध हैं।

केपीआईटी कमिंस

केपीआईटी कमिंस के शेयर हाल में काफी बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों की सूची में शुमार रहे हैं। पिछले छह महीनों की अवधि के दौरान इसमें दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसकी तुलना में बीएसई आईटी सूचकांक और बीएसई सेंसेक्स का प्रतिफल सपाट रहा है।

कुल मिलाकर दिसंबर 2009 की तिमाही में केपीआईटी के राजस्व में क्रमागत आधार पर 4.4 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। कीमतों में भी क्रमागत आधार पर सुधार हुआ है और स्पार्टा के शामिल होने (कंपनी ने नवंबर में इसका अधिग्रहण किया था) से कंपनी के शेयरों की कीमतों में तेजी आई है, साथ ही अमेरिका से बेहतर राजस्व की प्राप्ति भी हुई है।

हालांकि, 20 फीसदी के ऊपर मार्जिन अच्छी स्थिति में है, लेकिन रुपये में आई मजबूती, वेतन में बढ़ोतरी और कम उपयोगिता से दिसंबर तिमाही में कंपनी पर बुरा असर पड़ा। इसकी वजह से आने वाली कुछ तिमाहियों में मार्जिन पर दबाव बरकरार रह सकता है।

इस समय 112.2 रुपये के स्तर पर कंपनी के शेयरों का कारोबार वित्त वर्ष 2010-11 की अनुमानित आय के 8.8 गुना के स्तर पर हो रहा है। उम्मीद है कि अगले एक साल में 15-20 फीसदी का प्रतिफल दे सकता है।

सासकेन कम्युनिकेशन

वित्त वर्ष 2004-2009 की अवधि में टेलीकॉम सॉल्यूशन कंपनी सास्केन की बिक्री में सीएजीआर पर 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सास्केन कंपनियों को कम्युनिके शंस स्पेस के क्षेत्र में चिप सुविधा मुहैया कराती है।

कंपनी का कारोबार टेलीकॉम सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट, सर्विस ऐंड ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल और यूटिलिटी क्षेत्रों में संगठित है। हालांकि, कंपनी के टॉपलाइन में सॉफ्टवेयर का योगदान 40 फीसदी का होता आया है, लेकिन इस समय इसका कं पनी के राजस्व में 95 फीसदी का योगदान है।

कंपनी वित्त वर्ष 2008-09 में अपने मार्जिन को बढ़ाकर 23.5 फीसदी तक करने में कामयाब रही है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2007-08 में यह आंकड़ा मात्र 14 फीसदी था। हालांकि, आरऐंडी पर होने वाले खर्च में संचार कंपनियों द्वारा कटौती किए जाने से मौजूदा वित्त वर्ष में कंपनी के राजस्व और मुनाफे पर बुरा असर पडा है।

दिसंबर 2009 की तिमाही में 9 महीने की अवधि में बिक्री में 21 फीसदी की कमी दर्ज की गई जबकि परिचालन मुनाफा मार्जिन में 37 फीसदी की गिरावट आई और मार्जिन 17.6 फीसदी के स्तर पर रहा था।

आगे चलकर मार्जिन की क्या हालत रहेगी, यह मुख्य तौर पर संचार कंपनियों के आईटी पर किए जाने वाले खर्च पर निर्भर करेगा। इस समय 178 रुपये के स्तर पर इसके शेयरों का कारोबार वित्त वर्ष 2010-11 की अनुमानित 25 रुपये की आय के 6.5 गुना के स्तर पर हो रहा है।

सुनील हाईटेक इंजीनियर्स

बिजली क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ ही सुनील हाईटेक को इसका काफी फायदा मिलने की उम्मीद है। इस समय इस क्षेत्र में इंजीनियरिंग सर्विसेस मुहैया करने वाले कंपनियों की कमी है।

इस समय कंपनी के पास 2,062 करोड़ रुपये का ऑर्डर हैं, जो वित्त वर्ष 2008-09 की आय के 3.5 गुना है और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इसके साथ ही अगले दो सालों में कंपनी के  कारोबार की संभावनाएं काफी प्रबल हैं। कंपनी ने अपनी इंजीनियरिंग वैल्यू चेन में बढ़ोतरी के प्रयासों के तहत महाजेनको और एल ऐंड टी से बैलेंस ऑफ पावर (बीओपी) परियोजना हासिल की है।

यह परियोजना हासिल करने के साथ ही कंपनी ने न सिर्फ 250 मेगावाट की बीओपी कांट्रैक्ट लेने की पात्रता हासिल कर ली है बल्कि इसी सेगमेंट में कंपनी बड़े आकार की परियोजना हासिल करने पर ध्यान दे रही है जिससे इसे और अधिक राजस्व की प्राप्ति हो सकती है।

सुनील हाईटेक के शेयरों का कारोबार इस समय 8 के पीई मल्टीपल पर हो रहा है जो कंपनी के लिहाज से काफी आकर्षक है। ऐतिहासिक तौर पर कंपनी के शेयरों का कारोबार 10-22 मल्टीपल के  दायरे में होता आया है जो मौजूद पीई की तुलना में अधिक है। इस शेयर में निवेश से न केवल बढ़ोतरी हासिल की जा सकती है बल्कि मुनाफा भी कमाया जा सकता है।

साथ में शरत चेल्लुरी

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