बिजनेस स्टैंडर्ड - हवाई अड्डे की तैयारियां तेज
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हवाई अड्डे की तैयारियां तेज
वीरेन्द्र सिंह रावत / लखनऊ February 11, 2010

बौद्ध तीर्थ स्थल कुशीनगर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग चार इच्छुक पार्टियों के साथ 13 फरवरी को दिल्ली में एक प्री-बिड मीटिंग यानी बोली-पूर्व बैठक आयोजित करेगा। लगभग 650 एकड़ में फैले 750 करोड़ रुपये की लागत वाले इस हवाई अड्डे के लिए जीएमआर, जीवीके, एलऐंडटी और गैमन इंडिया ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) प्रक्रिया में भागीदारी की पात्रता हासिल कर ली है। 

इस हवाई अड्डे को पीपीपी के आधार पर डिजाइन बिल्ट फाइनैंस ऑपरेट ट्रांसफर (डीबीएफओटी) के तहत बनाया जाएगा। परियोजना के बारे में सूचना और स्पष्टीकरण हासिल करने के बाद ये कंपनियां 4 मार्च तक आरएफपी भेज सकती हैं।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन सचिव एवं राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक अवनीश अवस्थी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हम संबद्ध खरीददार के लिए भूमि खरीदेंगे जो 60 वर्षीय लीज पर भूमि हासिल करने के बाद हवाई अड्डे को विकसित करेगा।'

प्रस्तावित हवाई अड्डा उत्तर प्रदेश के इस पिछड़े इलाके में बौद्ध पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा देगा। यह क्षेत्र पूरी दुनिया से तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। अवस्थी ने बताया कि मूल हवाई अड्डा अगले दो साल की अवधि में इस्तेमाल के लिए तैयार हो सकता है। हमें उम्मीद है कि मार्च 2010 तक हम आशय पत्र हासिल कर लेंगे, हालांकि इसके शुरू होने में 6 महीने और लग जाएंगे।

सेंटर फॉर एशिया पैसीफिक एविएशन (सीएपीए) दक्षिण एशिया के मुख्य कार्याधिकारी कपिल कौल का कहना है कि इस इलाके में बौद्ध श्रद्धालुओं की आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण है। यहां हवाई अड्डे की सख्त जरूरत थी। बुद्धिस्ट सर्किट में सारनाथ, कुशीनगर, संकीसा, कौशांबी, श्रावस्ती और कपिलवस्तु पूरी दुनिया, खासकर जापान और दक्षिण पूर्व एशिया, से तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करते हैं।

कौल ने कहा, 'इस नई हवाई अड्डा परियोजना के पूरा होने में 7 से 10 साल का वक्त लगेगा और केंद्र सरकार भी इसमें अधिक दिलचस्पी दिखा सकती है।' सीएपीए पूरी दुनिया में स्वतंत्र विमानन बाजार की जानकारी, विश्लेषण और डाटा सेवाएं मुहैया कराता है।

यह हवाई अड्डा जापान, म्यांमार, कोरिया, चीन, थाईलैंड, भूटान और श्रीलंका को सीधे तौर पर कुशीनगर से जोड़ेगा। इन देशों से बड़ी तादाद में बौद्ध पर्यटक भारत आते हैं। सरकार के पास लगभग 100 हेक्टेयर भूमि है जबकि बाकी भूमि की खरीद की जाएगी।

अवस्थी ने बताया कि भारतीय वायुसेना (एआईएफ), भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) और डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने अपनी मंजूरी दे दी है और पर्यावरण मंत्रालय आदि से मंजूरी मिलनी अभी बाकी है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

दिल्ली में 13 फरवरी को बोली पूर्व बैठक होगी
प्रस्ताव के लिए आवेदन की तारीख 4 मार्च तक
750 करोड़ रुपये के निवेश से बनाया जाना है हवाई अड्डा

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