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सिंह अमर ने 'वीर' पर छोड़ा रोक का तीर
बीएस संवाददाता / लखनऊ 02 08, 2010

राजनीति में अलग-थलग पड़ते जा रहे अमर सिंह ने अब क्षत्रियों की सियासत के जरिए अपनी हैसियत जताने का मन बनाया है।

क्षत्रिय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अमर सिंह ने उत्तर प्रदेश की मुखिया मायावती से वीर फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि वीर में ठाकुरों का अपमान किया गया है जो वह सहन नहीं कर सकते हैं।

अमर सिंह के खास सिपहसलार और क्षत्रिय महासभा के हरवंश सिंह ने बाकायदा एक खत लिख मायावती से फिल्म पर रोक लगाने की मांग की है। अमर सिंह अब सपा की सियासत में अलग-थलग पड़ गये हैं तो ऐसे राजनैतिक संकट काल में उन्हें सबसे बड़ा जन समर्थन और मंच दिया है, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष कुवर हरिवंश सिंह ने।

वाराणसी में महासभा की भारी भीड़ के बीच अमर सिंह को सपा से झटका मिलने के बाद पहला मंच मिला जहां उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ पहली बार अलग पूर्वांचल राज्य का नारा बुलंद किया। पूर्वांचल और बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर क्षत्रिय महासभा का प्रदेश व्यापी जनचेतना अभियान इस वक्त रफ्तार में है।

गोरखपुर में महासभा के इस अभियान में भारी भीड़ जुटी और वहां भी अमर सिंह को न सिर्फ बड़ा मंच मिला बल्कि वह अब अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के संरक्षक भी बन चुके हैं। हरिवंश सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में साफ किया कि उनका शीर्ष एजेंड़ा पूर्वांचल और बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने का है और इस अभियान में उनको जितना बड़ा जनसमर्थन मिल रहा है उससे सभी राजनितिक दलों में हड़कंप है।

सिंह ने कहा कि अलग राज्य बनाने संबंधी मुख्यमंत्री द्वारा प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का महासभा ने खुले दिल से स्वागत किया है लेकिन सिर्फ इससे बात नहीं बनने वाली है। उन्होने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर आग्रह किया है कि विधानसभा के मौजूदा सत्र में ही इस बावत प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाए।

उन्होने कहा कि नए पूर्वांचल राज्य की राजधानी गोरखपुर अथवा वाराणसी के बजाय लखनऊ होना चाहिए क्योंकि नई राजधानी बनाने के लिए हजारों करोड़ रुपये की अवस्थापना व्यवस्था करना आसान नहीं है।

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