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केबल टीवी के तार से ब्रॉडबैंड का विस्तार
आईपीओ समीक्षा : केबल के बाद कंपनी का ध्यान ब्रॉडबैंड सेवा पर है, 2010-11 में 16-18 फीसदी आमदनी की है उम्मीद
शरत चेल्लुरी /  February 08, 2010

डीटीएच जैसी डिजिटल सेवा की शुरुआत के बाद अब ग्राहक केबल के मामले में भी अच्छी से अच्छी सेवा की मांग करने लगे हैं।

लोगों को बेहतर देने की कोशिश और सरकारी नीतियों के दबाव ने भारतीय केबल टीवी उद्योग में भी समेकन और अधिग्रहण की लहर शुरू कर दी है। भारत का केबल उद्योग फिलहाल करीब 1,000 से भी ज्यादा मल्टी-सर्विस ऑपरेटरों (एमएसओ) के हाथों में बंटा है।

हैथवे केबल और डाटाकॉम जैसी बड़ी केबल कंपनियां छोटी कंपनियों का अधिग्रहण कर रही हैं और ग्राहकों को बढ़िया डिजिटल सेवा दे रही हैं। हैथवे देश के प्रमुख एमएसओ से एक है। इसकी पहुंच देश के 125 शहरों में करीब 82 लाख घरों तक है।

केबल टीवी के क्षेत्र में कंपनी अपनी क्षमता और पहुंच में और अधिक विस्तार की योजना बना रही है। इसके लिए कंपनी की योजना ताजा आईपीओ के जरिए करीब 480-530 करोड़ रुपये जुटाने की है। विजया बैंक ने कंपनी के लिए 50 करोड़ रुपये के कर्ज के लिए भी हामी भरी है। इसका इस्तेमाल भी कंपनी की विस्तार योजनाओं में किया जाएगा।

मौकों की बहार

मीडिया पार्टनर एशिया के मुताबिक 2007-08 और 2011-12 के बीच डीटीएच ग्राहकों की संख्या में 32 फीसदी विकास का अनुमान है। वहीं, केबल के मामले में यह अनुमान महज 3.5 फीसदी का है।

पहले से ही ज्यादा घरों में केबल सेवा होने की वजह से आधार ज्यादा है और इसलिए विकास दर कम दिखती है। पर, आंकड़ों की बात करें, तो 2011-12 तक केबल से जुड़े घरों की संख्या 9.5 करोड़ तक पहुचने का अनुमान है। 2007-08 तक यह आंकड़ा 8.3 करोड़ तक पहुंचा था।

उद्योग की रफ्तार से ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैथवे कंपनियों के लिए यह सुनहरे मौके से कम नहीं है। हैथवे ने 21 एमएसओ और करीब 500 लोकल केबल ऑपरेटर इकाइयों में हिस्सेदारी खरीदी है। इसकी मदद से 2006-07 के बाद से कंपनी की ग्राहक संख्या में सालाना 32 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई है।

केबल बाजार में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए कंपनी आगे भी कई केबल ऑपरेटरों के पूर्ण अधिग्रहण या उनके साथ गठजोड़ की योजना बना रही है। आईपीओ से होने वाली कमाई में से करीब 245 करोड़ रुपये ग्राहक हथियाने पर ही खर्च किए जाने का अनुमान है।

ब्रॉडबैंड है नया विस्तार क्षेत्र

डिजिटल केबल टीवी के मामले में कंपनी के ग्राहकों की संख्या 2006-07 के बाद से 3.6 गुना बढ़ चुकी है। फिलहाल यह 10 लाख के स्तर पर है, जो तुलनात्मक रूप में सबसे ज्यादा है।

कंपनी 2010-11 तक अपने सेट-टॉप बॉक्स की संख्या दोगुनी कर 20 लाख तक पहुंचाना चाहती है। विस्तार के लिए एक और क्षेत्र केबल आधारित ब्रॉड बैंड है। हैथवे अपने केबल टीवी ग्राहकों को ब्रॉडबैंड सेवा बेचने में कामयाब रहा है। कंपनी ने इस क्षेत्र में 2006-07 के बाद से औसतन 43 फीसदी की बढ़त दर्ज की है।

अनुमान है कि 2010-2011 में कंपनी की कुल आमदनी में ब्रॉडबैंड सेवा का योगदान 16-18 फीसदी तक होगा। आईपीओ की कमाई का करीब 42 फीसदी यानी लगभग 240 करोड़ रुपये मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर को डिजिटल रूप देने और ब्रॉडबैंड सेवा के विकास में खर्च किए जाएंगे।

राहों में रोड़े हैं अभी बाकी

केबल टीवी बाजार की सबसे बड़ी संख्या छिपे हुए ग्राहकों की है। अंतिम रूप से ग्राहकों से जुड़ने वाले स्थानीय केबल ऑपरेटरों की मदद से हासिल होने वाली कमाई पर गहरी पकड़ की जरूरत है।

हैथवे की अनुमानित पहुंच 82 लाख घरों तक है, लेकिन वास्तव में भुगतान करने वाले ग्राहकों की संख्या 16-16.1 लाख के करीब है। ग्राहकों को डिजिटल सेवा से जोड़ने के लिए हैथवे और डेन जैसी कंपनियों ने सेट-टॉप बॉक्सों की कीमतों में काफी कमी की है। शुरुआती चरण में इस काम में काफी खर्च की जरूरत होती है, लेकिन इससे छिपे हुए ग्राहकों से छुटकारा पाने में मदद मिल रही है।

2007-09 के दौरान कंपनी की कुल आमदनी 48 फीसदी के औसत से बढ़ी। केबल टीवी से होने वाली आमदनी में औसतन 53 फीसदी का इजाफा हुआ। परिचालन के स्तर पर  कंपनी मुनाफे में बढ़ोतरी दिखाती आई है। कंपनी की एबिटा मार्जिन 2007-08 में 5 फीसदी से बढ़कर 2008-09 में 15 फीसदी हो गई।

2009-10 के पहले भाग में एबिटा मार्जिन 20 फीसदी के स्तर पर पहुंच चुकी है। कम परिचालन लागत की वजह से कंपनी को फायदा हो रहा है। 2009-10 के पहले भाग में कंपनी ने परिचालन खर्चों और ब्याज लागतों के बाद 43.9 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। पर, स्थिति इतनी भी आकर्षक नहीं है।

क्षय लागतों (डेप्रीसिएशन कॉस्ट) के काफी ज्यादा होने की वजह से शुद्ध रूप से कंपनी को घाटा हो रहा है। 2009-10 के पहले भाग में कंपनी को शुद्ध रूप में 27.1 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कंपनी की विस्तार योजनाओं और पूंजीगत खर्चों को देखते हुए क्षय लागतों के और ज्यादा बढ़ने का अनुमान है।

कंपनी आईपीओ की कमाई में से 97 लाख रुपये कर्जों के भुगतान में लगाएगी। इससे कंपनी के डेट-इक्विटी अनुपात को कम कर 0.3 तक लाने में मदद मिलेगी।

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