बिजनेस स?टैंडर?ड - सस्ते ऋण के बहकावे में न आएं
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सस्ते ऋण के बहकावे में न आएं
होम लोन
अमर पंडित /  February 08, 2010

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने होम लोन की सस्ती दरों (टीजर रेट) को लेकर बैंकों को चेतावनी दी है।

आरबीआई का कहना है कि ऐसे ऋण के लिए मार्जिन दर 30 से 35 प्रतिशत होना चाहिए। आरबीआई को इस बात की चिंता है कि टीजर रेट से होम लोन के मामले में डिफॉल्ट की संभावनाओं में इजाफा होगा जैसा कि साल 2007 और 2008 में ब्याज दरों के बढ़ने के समय में देखा गया था।

इस चिंता की वजह सही है क्योंकि अमेरिकी वित्तीय प्रणाली के टूटने का श्रेय स्पष्ट रूप से होम लोन के उस डिफॉल्ट को जाता है जो दरें बढ़ने पर सामने आई थीं। टीजर रेट होम लोन के ब्याज की वह दर है जो शुरुआती कुछ वर्षों में तो कम होती हैं लेकिन समय के साथ उनमें बढ़ोतरी होती है।

ऐसी योजनाओं की ब्याज दरें शुरुआती 2-3 वर्षों में 8-8.5 प्रतिशत के बीच फिक्स्ड होती हैं लेकिन इसके तुरंत बाद दरें बाजार की फ्लोटिंग दरों में बदल जाती हैं। अब आप समझ रहे होंगे कि आरबीआई चिंतित क्यों है। रियल एस्टेट के किसी भी लेन देन में तीन महत्वपूर्ण कारक होते हैं- कीमत, ब्याज दरें और आय में परिवर्तन।

रियल एस्टेट की कीमतों में आई तेजी अधिकांश रूप से तब देखी गई जब से तीनों कारक अपेक्षाकृत निम् स्तरों पर थे। साल 2003 में कीमतों और ब्याज दरें काफी कम थीं और लोगों की आय बढ़ रही थी और उसके बाद हर किसी ने देखा कि साल 2005 में इन्हीं कारकों की वजह से रियल एस्टेट क्षेत्र में जबरदस्त तेजी आई।

आज की बात करें तो कीमतें अधिक है, आय में बढ़ोतरी नहीं हो रही लेकिन ब्याज दरें कम हैं। इस प्रकार टीजर होम लोन लोगों को ऋण लेने के लिए इस भरोसे के साथ उकसा रहे हैं कि आने वाले कुछ वर्षों में आय बढ़ेगी और कीमतें भी।

बहुत कम लोगों ने सोचा होगा कि अगर कीमतें घटती हैं तो क्या होगा या अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं और आय में इजाफा नहीं होता तो क्या होगा? दन दोनों प्रश्नों का मतलब है कि बैंक ग्राहकों से मार्जिन मनी की मांग कर सकते हैं। एक उदाहरण के माध्यम से इसे समझते हैं।

मान लीजिए आप टीजर लोन से प्रभावित होकर 15 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान करते हुए 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी खरीदते हैं। चलिए मान लेते हैं कि रियल एस्टेट की कीमतों में 40 प्रतिशत की गिरावट आती है जो पूर्णत: असंभव है। ऐसे में बैंक होम लोन एग्रीमेंट के डेप्रिसीएशन ऑफ सिक्योरिटी के शर्तों पर काम करना शुरू करेगा और ग्राहक से एकमुश्त राशि मांगेगा।

बैंक यह कदम इसलिए उठाएगा जिस प्रॉपर्टी की कीमत 1 करोड़ रुपये थी वह घट कर अब 60 लाख रुपये हो गई है और बैंक का निवेश उसमें मात्र 60 लाख रुपये का 85 प्रतिशत या 51 लाख रुपये है। लेकिन बैंक ने आपको उस जायदाद के लिए 85 लाख रुपये उधार दिए थे और अब आपको तुरंत ही 85 लाख रुपये में से 51 लाख रुपये घटा कर शेष राशि का भुगतान बैंक को करना पड़ेगा।

अगर आप इसका भुगतान नहीं करते हैं तो आप डिफॉल्टर की श्रेणी में आएंगे, भले ही आप मासिक किस्तों का भुगतान समय पर क्यो न कर रहे हों। और, इस प्रकार पूरी ऋण राशि का भुगतान उधार लेने वाले को तुरंत करना होता है। इसी प्रकार अगर कुछ वर्षों बाद ब्याज दरें बढ़ती हैं तो आपकी मासिक किस्तों में भी इजाफा होगा।

अगर दरें 2 से 3 प्रतिशत बढ़ती है तो होम लोन पर इसका भारी प्रभाव होगा। सबसे पहले तो ऋण की अवधि बढ़ जाएगी और फिर मासिक किस्त बढ़ाई जाएगी (अगर ऋण की अवधि बढ़ाने की गुंजाइश नहीं रही)। यही वजह है कि आरबीआई बैंकों से अधिक मार्जिन राशि लेने की बात कह रहा है।

आरबीआई चाहता है कि टीजर लोन लेने वाले ग्राहक से मार्जिन की राशि के तौर पर कुल मूल्य का 30 से 35 प्रतिशत लिया जाए। आरबीआई ऐसा इसलिए चाहता है ताकि केवल ऋण का भुगतान करने में सक्षम ग्राहक ही टीजर लोन ले पाएं।

व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि किसी व्यक्ति को घर की खरीदारी तभी करनी चाहिए जब उसे इसकी जरूरत हो और कीमत का भुगतान करने में वह सक्षम हो। किसी व्यक्ति को मकान की खरीदारी केवल इसलिए नहीं करनी चाहिए कि ब्याज दरें कम हैं। मकान की खरीद तभी की जानी चाहिए जब दरें बढ़ने के बावजूद किसी तरह की आर्थिक समस्या न उत्पन्न हो।

हालांकि, अगर शुरुआत में ब्याज दरें काफी कम या शून्य ही हों लेकिन बाद में आप उसकी मासिक किस्तों का भुगतान नहीं कर सकते तो क्या फायदा होगा? कभी न कभी आप डिफॉल्ट करेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि कम या अधिक ब्याज दरों को लेकर चिंचा नहीं करनी चाहिए।

चिंता इस बात की होनी चाहिए कि मासिक किस्तों के भुगतान में कभी कोई अड़चन तो नहीं आएगी। वर्तमान बाजार परिस्थितियों को देखते हुए घर की खरीदारी तभी करें जब आप आसानी से उसकी मासिक किस्तों का भुगतान ऋण अवधि के दौरान कर सकते हैं।

लेखक माई फाइनैंशियल एडवाइजर के निदेशक हैं।

Keyword: RBI, home loan, teaser rate, US financial system, real estate,
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