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बाल्को मसले पर नहीं बढ़ी गाड़ी
शेष हिस्सेदारी पर अप्रैल में फिर होगी आर्बिट्रेशन की बैठक
अभिनीत कुमार / मुंबई February 04, 2010

भारत एल्युमीनियम कंपनी में सरकार की बची हुई हिस्सेदारी पर आर्बिट्रेशन पैनल ने तीन दिनों तक चर्चा की, लेकिन इस बारे में मंगलवार तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका।

अब पैनल की बैठक अप्रैल के मध्य में फिर होगी, जिसमें सरकार और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के पक्ष को सुना जाएगा। बाल्को में स्टरलाइट की 51 फीसदी हिस्सेदारी है। इस घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि आर्बिटेशन की बैठक फिर होगी।

उसके मुताबिक, अरसे से लंबित पड़े इस मामले को जल्द सुलझाया जा सकता है, क्योंकि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का विनिवेश कर बुनियादा ढांचा के विकास के लिए फंड जुटाने में लगी है। सुनवाई के दौरान पूर्व कानून मंत्री शांती भूषण स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की ओर से अपना पक्ष रखा, वहीं वरिष्ठ वकील एके गांगुली ने सरकार की और से तर्क पेश किया।

स्टरलाइट लंदन में सूचीबद्ध वेदांत समूह की सहायक इकाई है। स्टरलाइट ने मार्च 2001 में 552 करोड़ रुपये में बाल्को की 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। सौदे के मुताबिक स्टरलाइट को तीन साल की अवधि के दौरान कंपनी की शेष हिस्सेदारी खरीदने का अधिकार दिया गया था। लेकिन सरकार और कंपनी के मूल्यांकन को लेकर विवाद होने के चलते यह मामला अब तक अटका हुआ है।

मार्च 2004 में शेष शेयरों की खरीद की अवधि खत्म होने के बाद स्टरलाइट ने सरकार को कॉल नोटिस और 1,099 करोड़ रुपये का चेक भेजा, ताकि बाल्को की बची हुई हिस्सेदारी खरीदी जा सके। लेकिन यूपीए की सरकार बनने के बाद बची हुई हिस्सेदारी के मूल्यांकन को लेकर मई 2004 में विवाद शुरू हो गया। उसके बाद सरकार ने इस मामले को अटॉर्नी जनरल के पास भेजा दिया।

जिसने कंपनी कानून की धारा 111 ए के तहत कॉल ऑप्शन को अवैध करार दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि बची हुई हिस्सेदारी को बाजार मूल्य पर बेचा जा सकता है। 2006 में स्टरलाइट इस मामले में अंतरिम राहत के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंच गई, ताकि सरकार बाल्को की बची हुई हिस्सेदारी किसी और को न बेच सके। कोर्ट ने इस मामले को आर्बिट्रेशन में ले जाने को कहा।

उसके बाद सरकार ने इस मामले का हल निकालने के लिए सचिवों की एक समिति का गठन किया। पिछले साल मई में समिति ने सुझाव दिया कि गैर-सूचीबद्ध कंपनी में 10 फीसदी हिस्सेदारी के लिए आईपीओ लाया जाए। जुलाई में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी।

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