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साइबर जंग में भारत के हाथ तंग
लेस्ली डिमोंटी और शिवानी शिंदे /  February 04, 2010

पिछले सप्ताह अमेरिका की प्रतिनिधि सभा के 50 सदस्यों की एक आधिकारिक वेबसाइट को किसी ने हैक कर लिया।

सिक्योरिटी कंसल्टेंट प्रीटोरियन सिक्योरिटी ग्रुप के शोधकर्ताओं के अनुसार इस काम को ब्राजील के एक हैकर समूह रेड आई ने अंजाम दिया है। हाल के वर्षों में भी इंटरनेट हैकिंग की कई घटनाएं हुई हैं और माना जा रहा है कि इसके पीछे भी इसी समूह का हाथ है। हैकर टेलीकम्युनिकेशंस लिंक  को अक्षम बनाने के साथ ही सर्वर और कंप्यूटरों से बैंकिंग पासवर्ड चुरा लेते हैं।

इस तरह की चर्चाएं हैं कि कई देश तो अपने प्रतिद्वंद्वियों के सूचना तंत्र में सेंध लगाने के लिए हैकरों का समूह तैयार कर रहे हैं। मिसाल के तौर पर मार्च 2009 में साइबर स्पाई नेटवर्क चीन में कई सर्वरों का इस्तेमाल कर करीब 103 देशों की सरकारों और निजी संगठनों के गोपनीय कागजात में सेंध लगाने की कोशिश कर चुके हैं।

चीन ने इसमें अपना हाथ होने से इनकार कर दिया। इन खतरों से निपटने के लिए भारत कितना सक्षम है? भारत में केवल 2009 में करीब 6,000 वेबसाइटों के साथ छेड़छाड क़ी घटनाएं सामने आई हैं। मैकेफी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में साइबर सुरक्षा को लेकर कोई खास कदम नहीं उठाए गए हैं और जो भी हैं, वे अपर्याप्त हैं।

भारत की तैयारी

भारत किसी भी साइबर युध्द से निपटने में सक्षम है या नहीं, इस सवाल पर अधिकतर जानकारों का मानना है कि भारत की तैयारी अभी अधूरी है। अगर कोई देश किसी अन्य देश पर हमला करना चाहता है तो सबसे पहले वह उसकी उन प्रमुख वेबसाइटों को नष्ट करेगा, जिससे उस देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

उदाहरण के तौर पर हमलावर बैंकों के पास सुरक्षित सूचनाओं को नष्ट कर सकते हैं। हालांकि, इसके बाद बैंक फिर से सूचनाएं तैयार कर सकते हैं, लेकिन ऑनलाइन सिक्योरिटी कंपनी आरएसए के मुख्य तकनीकी सलाहकार (भारत और सार्क) विकास देसाई कहते हैं कि अगर हैकरों ने बैंकों से धीरे-धीरे रकम निकाल कर दूसरे बैंकों में डालनी शुरू कर दिया तो ऐसे में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इसी तरह, ऑनलाइन सिक्योरिटी जानकार विजय मुखी कहते हैं 'भारत में अधिकांश बैंकों के आंकड़े ऑनलाइन हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत में इनकी सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। साइबर अपराध को इस तरह से अंजाम दिया जाता है कि मात्र 24 घंटे के भीतर किसी देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ी जा सकती है। लेकिन इन तमाम खतरों के बावजूद हम साइबर सुरक्षा को लेकर सजग नहीं हुए हैं।'

विश्लेषकों का मानना है कि भारत में सुरक्षा को लेकर इसलिए भी बेहतर इंतजाम नहीं किए गए हैं, क्योंकि यहां पर साइबर अपराध का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है लेकिन सिर्फ आधार पर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से काम नहीं चल सकता है। समय के साथ साइबर अपराध के स्वरूप में भी बदलाव आए हैं।

इस बाबत मैकेफी के निदेशक, भारत-सार्क कार्तिक शहानी कहते हैं 'पहले के अपराध उतने पेचीदे नहीं हुआ करते थे।' उनकी कंपनी के ग्लोबल थ्रेट इंटेलीजेंस के आंकड़ों के  अनुसार भारत हैकरों के लिए पनाहगार बनता जा रहा है और भारत ने इस मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। साइबरक्राइम कंपनियां अधिकतर रियल-वर्ल्ड कंपनियों की तरह ही काम करती हैं।

सिक्योरिटी फर्म फिजान के अनुसार ये कंपनियां क्रमानुसार काम करती हैं, जिसमें से हरेक साइबर अपराधियों के काम बंटे होते हैं। उनके काम के आधार पर ही उन्हें मेहनताना मिलता है। पीडब्ल्यूसी के कार्यकारी निदेशक श्रीनिवास कृष्णन कहते हैं कि किसी भी तरह के साइबर अपराध से निपटने के लिए भारत को पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।

कृष्णन कहते हैं 'अगर कोई अमेरिका के बैंकों और खुदरा क्षेत्र की कमर तोड़ना चाहता है तो भारत उनके लिए एक आसान लक्ष्य हो सकता है,। भारत की सुरक्षा भी उच्च स्तरीय होनी चाहिए। हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते, क्योंकि इन दिनों ज्यादातर आवेदन ऑनलाइन हो रहे हैं।

Keyword: cyber war, india, USA, website, internet hacking,
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