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पीई कंपनियों की नजरे इनायत शिक्षा क्षेत्र पर
स्कूल और कॉलेज में 28 अरब डॉलर निवेश की गुंजाइश
कल्पना पाठक और रघुवीर बदरीनाथ / मुंबई, बेंगलुरु February 03, 2010

देश में करीब 350 प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटलिस्ट (पीई/वीसी) कंपनियों की निगाह शिक्षा के क्षेत्र पर है। करीब 20 अरब से ज्यादा फंड वाली इन कंपनियों की योजना 2,300 करोड़ रुपये निवेश करने की है। 

देश के शिक्षा और प्रशिक्षण बाजार में निवेशकों के लिए करीब 40 अरब डॉलर के मौके हैं। पीई खिलाडिय़ों का कहना है कि स्कूलों और कॉलेजों में 28 अरब डॉलर का निवेश किया जा सकता है। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष 2010 में वर्ष 2009 के मुकाबले दोगुना निवेश किया जाएगा जिससे यह क्षेत्र भी निवेश के तीन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा। ग्रैंड थॉर्टन डाटा के मुताबिक वर्ष 2009 में शिक्षा के क्षेत्र में पीई निवेश में तीन गुना बढ़ोतरी देखी गई। इस क्षेत्र में पीई निवेश वर्ष 2008 के 3.5 करोड़ डॉलर से बढ़कर अक्टूबर 2009 में 10.8 करोड़ डॉलर बढ़ गया।
 
कैजेन मैनेजमेंट एडवाइजर के एमडी संदीप अनेजा का कहना है, 'इस साल शिक्षा में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है क्योंकि इस साल शिक्षा के क्षेत्र में कुछ सुधार होने की उम्मीद है जिसका कुछ असर दिख सकता है। निवेशक इंतजार में हैं और वे नीति बनाने वालों की ओर से कुछ संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि इस क्षेत्र में दिलचस्पी के बावजूद इसमें कुछ बाधाएं भी हैं मसलन शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ज्यादा नियमन है। इससे बचने के लिए पीई खिलाड़ी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हुई सहायक सेवाओं मसलन बुनियादी ढांचा, तकनीक और सेवा सेगमेंट की ओर ध्यान दे रही है क्योंकि स्कूल का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट में निवेश की इजाजत नहीं है।

इस तरह के निवेश का ताजा उदाहरण आईएलऐंडएफएस एजुकेशन ऐंड टेक्नोलॉजी सर्विसेज में इंडिया इक्विटी पार्टनर्स का 172 करोड़ रुपये का निवेश है। विश्लेषकों का कहना है कि ज्यादातर स्कूल अपने बुनियादी ढांचे को अलग करते हैं और एक अलग कंपनी बना दी जाती है जो ट्रस्ट से अलग होता है। इसके लिए ट्रस्ट सालाना पट्टïे की रकम का भुगतान करती है। मुंबई के शिक्षा क्षेत्र के एक विश्लेषक का कहना है, पट्टï वाली कंपनी ज्यादा किराया ले सकती है और ट्रस्ट पट्टïे वाली कंपनी को मुनाफा देकर बे्रक इवन का प्रबंधन करती है। व्यावसायिक प्रशिक्षण, पूरक प्रशिक्षण, परीक्षा प्रशिक्षण और स्टेशनरी कारोबार में भी निवेश की संभावनाएं बन रही हैं। 

वर्ष 2009 में करीब 8 कंपनियों जिसमें ट्यूटर विस्ता, करियर प्वाइंट, एफआईआईटी जी, आईटीएम ग्रुप और एजुटेक शामिल है, में करीब 556 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। विश्लेषकों का कहना है कि शिक्षा का 75 फीसदी खर्च के-12 और उच्च शिक्षा के क्षेत्र से आ रहा है। एक उद्यमी के गणेश ने प्रमुख निवेशकों मसलन सिक्यूआ कैपिटल, लाइटस्पीड और मणिपाल ग्रुप से 200 करोड़ रुपये की उगाही की। उनका कहना है, 'भारतीय परिवारों के लिए खाने-पीने की चीजों के बाद शिक्षा ही दूसरी सबसे बड़ी खर्चीली चीज है। जबकि अमेरिका में यह सातवां सबसे बड़ा खर्च है जो डीवीडी और म्युजिक के बाद आता है। यह संभावनाएं निश्चित तौर पर बड़ी हैं।

वैश्विक शिक्षा की बड़ी कंपनी पियर्सन ने जब 125 लाख डॉलर चुका कर ट्यूटर विस्ता में 17 फीसदी हिस्सेदारी ली तब इन्हीं संभावनाओं के बारे में सोचा होगा। उस वक्त कंपनी के पास 50 लाख डॉलर से भी कम राजस्व था। हालांकि शिक्षा क्षेत्र के खिलाडिय़ों और विश्लेषकों के मुताबिक भारतीय शिक्षा क्षेत्र में बहुत बड़ा निवेश नहीं हो पाता है। पार्थेनॉन ग्रुप के साझेदार करण खामेका का कहना है, 'शिक्षा हमारी जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा है। सभी अर्थव्यवस्था में शिक्षा और हेल्थकेयर बड़े सेक्टर होते हैं। प्राइवेट इक्विटी कंपनियां 2.5 करोड़ डॉलर परिसंपत्तियों में लगाने के लिए मौके ढूंढ रही हैं जहां पर शिक्षा परिसंपत्तियों की संख्या सीमित है और वहां पूंजी लगाई जा सकती है।

अनेजा का कहना है, 'शिक्षा क्षेत्र के बारे में बहुत बात की जाती है और इस सेक्टर में कंपनियों के आकार की वजह से बहुत ज्यादा बड़े लेन-देन के सौदे नहीं देखे गए। कई कंपनियों की कमाई का दायरा 20-60 करोड़ रुपये के बीच है और वे औसतन 30 करोड़ रुपये का निवेश चाहती हैं। ज्यादातर बड़े सौदे जो बड़ी पूंजी चाहते हैं वे अवास्तविक योजनाएं बना रहे हैं। छोटे और मध्यम दर्जे की कई बेहतर कंपनियां हैं जो पीई फंडिंग की फिराक में हैं।

Keyword: PE, venture capitalist companies, india, education,
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