बिजनेस स?टैंडर?ड - छुपे रुस्तम सरकारी उपक्रम
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छुपे रुस्तम सरकारी उपक्रम
सरकार के विनिवेश प्रक्रिया को रफ्तार देने से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) में निवेश का अच्छा मौका मिल सकता है।
जितेंद्र कुमार गुप्ता /  January 18, 2010

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सरकारी दखल के कारण कई लोग निवेश से हिचकते रहे हैं। लेकिन अब पहले जैसी बात नहीं है।

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कई कंपनियों में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। खास बात यह कि लंबी अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का बाजार में प्रदर्शन अच्छा रहा है। पिछले 10 साल के दौरान बीएसई पीएसयू सूचकांक ने सालाना करीब 20 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि सेंसेक्स का सालाना रिटर्न करीब 13.85 फीसदी रहा।

सरकार के अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना के चलते पीएसयू इन दिनों चर्चा में है। बाजार भी विकास के लिहाज इन कंपनियों की क्षमता को स्वीकार करता है। सरकार की ओर से विनिवेश की प्रक्रिया को रफ्तार देने की योजना से बाजार में भरोसे का संचार हुआ है, वहीं इन कंपनियों के परिचालन में भी लचीलापन आएगा।

हाल के दिनों में पीएसयू सूचकांक का प्रदर्शन बेहतर रहा है, लेकिन बहुत सी सूचीबद्ध पीएसयू कंपनियां अपेक्षाकृत कम मूल्य पर कारोबार कर रही हैं। हालांकि इनमें लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन की संभावना है।

बीएसई के सदस्य रमेश दामाणी ने बताया कि कई पीएसयू कंपनियों के शेयर बेहतर मूल्य पर उपलब्ध हैं। अब जबकि सरकार विनिवेश योजना को अंजाम दे रही है तो इससे इन कंपनियों में निवेश का एक अच्छा मौका मिलेगा। साथ ही विनिवेश के बाद ये कंपनियां पहले से कहीं ज्यादा जिम्मेदारी से अपने कामकाज और परिचालन को अंजाम देंगी, जिससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद है।

पीएसयू का बेहतर प्रदर्शन

पिछले कुछ समय से पीएसयू के शेयरों में निवेश पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है। वहीं महत्त्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि ये सभी कंपनियां अपने क्षेत्र की दिग्गज हैं और मजबूत स्थिति में कारोबार कर रही हैं।

बीएचईएल, पावरग्रिड, एनएचपीसी, एनटीपीसी, ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, भारतीय स्टेट बैंक, बीईएमएल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, शिपिंग कॉरपोरेशन और कॉनकोर अपने क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां हैं और संबंधित कारोबार में उनका दबदबा है। इस क्षेत्र की कुछ कंपनियों की क्षमता और ग्राहकों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है, जिस तक पहुंचना अन्य कंपनियों के लिए कठिन कार्य है।

ऐसे में प्रतिस्पर्धी माहौल और विकासोन्मुख अर्थव्यवस्था के दौर में इन कंपनियों में निवेश का फायदा मिल सकता है। इनमें से ज्यादातर कंपनियां ऊर्जा, इंजीनियरिंग, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स आदि क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं, जिनमें विकास की अपार संभावनाएं हैं।

इन कंपनियों का न केवल बड़ा कारोबार है, बल्कि लाभांश देने में भी पीएसयू कंपनियों का रिकॉर्ड बेहतर रहा है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि कुछ सूचीबद्ध पीएसयू तो वास्तविक कीमत से कम मूल्य पर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में इन कंपनियों के शेयरों में भी निवेश किया जा सकता है।

बेहतर बदलाव के संकेत

सरकार की पहल से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के परिचालन में लचीलापन और क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हाल में सरकार की ओर से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले पीएसयू के लिए नई नीति की घोषणा की गई है।

इसके तहत वित्तीय और प्रबंधन स्तर पर इन कंपनियों को कहीं ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। इसके साथ ही सरकार कुछ पीएसयू को महारत्न का दर्जा भी दे रही है। इसके तहत उन कंपनियों को शामिल करने की बात है, जिनका सालाना शुध्द नेटवर्थ 15,000 करोड़ रुपये हो या पिछले तीन साल सालों में उनका शुद्ध मुनाफा 5,000 करोड़ रुपये का रहा है।

महारत्न का दर्जा मिलने के बाद कंपनियां सरकार से पूर्व अनुमति के बिना भी 5,000 करोड़ रुपये तक के निवेश का निर्णय ले सकेंगी। इससे कंपनियों को तेजी से विकास करने का अवसर मिलेगा, वहीं निर्णय लेने की आजादी भी हासिल हो सकेगी।

इसमें कोई शक नहीं कि सरकार को पैसे की जरूरत है, इसलिए वह पीएसयू के विनिवेश की योजना पर आगे बढ़ रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस कदम से विनिवेश की जानी वाली कंपनियों में पारदर्शित बढ़ेगी, वहीं परिचालन में भी सुधार आने की संभावना है। ऐसे में इन कंपनियों का प्रदर्शन भी बेहतर होगा और रिटर्न के मामले में भी ये बेहतर साबित हो सकती हैं।

सरकार की विनिवेश योजना के तहत करीब 50 गैर-सूचीबद्ध कंपनियों का आईपीओ आ सकता है, वहीं सूचीबद्ध कंपनियों की भी कुछ हिस्सेदारी बेची जा सकती है। मार्च 2010 तक जिन कंपनियों के फॉलोआन निर्गम और आईपीओ शेयर बाजार में आ सकते हैं, उनमें एनटीपीसी, इंजीनियर्स इंडिया, आरईसी, एनएमडीसी और एसजेवीएनएल प्रमुख हैं।

इसका मतलब यह है कि इन आईपीओ और एफपीओ में संस्थागत निवेशकों और खुदरा निवेशकों को निवेश का अच्छा मौका मिल सकता है। बाजार पूंजी के लिहाज से मौजूदा समय में एसऐंडपी निफ्टी में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का भारांक 28.58 फीसदी है। लेकिन वास्तविक रूप से उनका भारांक 14.18 फीसदी ही है। विश्लेषकों का मानना है कि विनिवेश से पीएसयू क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार आ सकता है।

मौके को कैसे भुनाएं

सब कुछ ठीक-ठाक रहने के बावजूद निवेशकों को सोच-समझकर बड़ी सावधानी से शेयरों का चयन करना चाहिए। दामाणी का कहना है कि पीएसयू के मामले में तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए। पहली, कुछ रकम नए पीएसयू के आईपीओ में निवेश करनी चाहिए।

दूसरी, ऐसी कंपनियों में निवेश करना चाहिए, जिनमें सरकारी हस्तक्षेप कम होने का अंदेशा है, मसलन-तेल कंपनियां। तीसरी, उन कंपनियों का चयन करना चाहिए, जिनके पास काफी परिसंपत्तियां (लैंड बैंक) हों।

विशेषज्ञों के मुताबिक सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त होने वाली कंपनियों-तेल एवं गैस, बैंकिंग, बीमा, ऊर्जा, खनन आदि में निवेश करना बेहतर रहेगा। इसी तरह कुछ कंपनियों के पास काफी नकदी और परिसंपत्तियां हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी कंपनियों में आरसीएफ, एमटीएनएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल और एफएसीटी प्रमुख हैं।

रेलीगेयर म्युचुअल फंड के इक्विटी प्रमुख वेत्री सुब्रमण्यम का कहना है कि निवेशकों को कंपनियों के मुख्य कारोबार पर भी ध्यान देना चाहिए। एमटीएनएल को देखें तो इसका शेयर काफी सस्ता है, लेकिन इन शेयरों में खास तेजी नहीं देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण कंपनी के कारोबार में विकास नहीं होने को माना जा सकता है।

वहीं गेल के मुख्य कारोबार में इजाफा हो रहा है, जिससे इसके शेयर भी चढ़ रहे हैं। स्पष्ट है कि पीएसयू में निवेश के लिए विभिन्न बातों का ध्यान रखना चाहिए। सूचीबद्ध पीएसयू में निवेश लंबी अविध में कंपनी के मुख्य कारोबार के विकास को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

दरअसल, ऐसी कंपनियों के पास काफी नकदी है, जिसका इस्तेमाल विस्तार योजनाओं को अंजाम देने में किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ प्रमुख पीएसयू के बारे में, जो निवेश का अच्छा विकल्प साबित हो सकती हैं...

बीईएमएल : बीईएमएल की करीब 80 फीसदी आमदनी खनन और कंस्ट्रक्शन कारोबार से आती है। अर्थव्यवस्था में सुधार और देश में खनन गतिविधियों में तेजी का इसको फायदा मिल सकता है। कंपनी रक्षा क्षेत्र और रेलवे के लिए उपकरणों का निर्माण भी करती है।

ये दोनों सेगमेंट तेजी से विकास कर रहे हैं। बीईएमएल एयरोस्पेस कारोबार में भी उतर रही है। कंपनी के पास 6,000 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है, जिसके आधार पर कंपनी की आय में अगले दो साल तक 15-18 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स : भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) रक्षा क्षेत्र के लिए उपकरण आपूर्ति करने वाली बड़ी कंपनी है। देश के कुल रक्षा उपकरणों की आपूर्ति में इसकी हिस्सेदारी कारब 57 फीसदी है। कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहा है और लाभांश भी बढ़ रहा है। वहीं विकास की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

कंपनी की ऑर्डर बुक को देखते हुए कहा जा सकता है कि बीईएल में निवेश अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। कंपनी उन क्षेत्रों में भी निवेश कर रही हैं, जहां सरकार आयात पर निर्भरता कम करने की योजना बना रही है।

बीईएल के पास करीब 12,500 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है, जो वित्त वर्ष 2007-08 की आय से करीब 2.7 गुना ज्यादा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले दो साल तक कंपनी की आय सालाना 17 से 18 फीसदी की दर से बढ़ सकती है।

बीएचईएल : पिछले कुछ सालों से औद्योगिक पूंजी बढ़ने और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ने का फायदा बीएचईएल को मिल रहा है। इंजीनियरिंग और ऊर्जा उपकरणों के निर्माण में बीएचईएल का दबदबा है। कंपनी के पास करीब 125,000 करोड़ रुपये की ऑर्डर बुक है, जो वित्त वर्ष 2009 की आय से करीब 4.6 गुना ज्यादा है।

कंपनी कारोबार के विस्तार के तहत वर्ष 2012 के अंत तक अपनी क्षमता 10,000 मेगावाट से बढ़ाकर 20,000 मेगावाट करने की योजना बना रही है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की आय अगले दो साल तक सालाना 35 फीसदी की दर से बढ़ सकती है।

कॉनकोर : घरेलू लॉजिस्टिक उद्योग में कंटेनर कॉरपोरेशन सबसे बड़ी कंपनी है। बाह्य और घरेलू कारोबार बढ़ने से कंपनी को लंबी अवधि में फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि मंदी के चलते कंपनी के कारोबार पर थोड़ा असर पड़ा है, लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत नजर आ रहे हैं।

घरेलू कंटेनर लॉजिस्टिक्स सेगमेंट में कंपनी का एकाधिकार है। कंपनी की बैंलेंस शीट दुरुस्त है और वह लाभांश भी दे रही है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेश के लिए यह बेहतर विकल्प हो सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले दो साल तक कंपनी की आय 18 से 20 फीसदी की दर से बढ़ सकती है।

गेल : गैस पाइपलाइन नेटवर्क में कंपनी का एकाधिकार है। यही वजह है कि पिछले 19 साल के दौरान कंपनी की आय में कोई गिरावट नहीं देखी गई। कंपनी को पाइपलाइन नेटवर्क विकसित करने में एक बार पूंजी खर्च करनी पड़ती है। गेल लाभांश भी कााफी ज्यादा दे रही है। पिछले पांच सालों में कंपनी ने मुनाफे का करीब 30 से 40 फीसदी लाभांश बांटा है।

कंपनी पेट्रोकेमिकल कारोबार में भी उतर रही है। साथ ही केजी बेसिन में गैस मिलने से अगले पांच साल तक भारत में गैस की उपलब्धता सालाना 23 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। इससे गेल को फायदा मिल सकता है। कंपनी वर्ष 2012 तक ट्रांसमिशन क्षमता दोगुना करने पर भी काम कर रही है, जिससे कंपनी की आय में इजाफा होने की उम्मीद है।

इंडियन ऑयल : देश के कुल खुदरा ईंधन की बिक्री में आईओसी की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है, वहीं रिफाइनिंग क्षमता करीब एक-तिहाई है। कंपनी के पास करीब 17,000 रिटेल आउटलेट हैं और 10,000 किमी पाइपलाइन है।

चालू वित्त वर्ष में कंपनी को खुदरा ईंधनों की बिक्री में 45,000 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। हालांकि घाटे के कुछ हिस्से की भरपाई सरकार कर सकती है। कंपनी वर्ष 2012-13 तक सालाना 15 टन रिफाइनरी क्षमता विकसित करने की तैयारी में है। वहीं ईऐंडपी कंपनियों के अधिग्रहण की भी योजना है।

नाल्को : नाल्को घरेलू एल्युमीनियम उद्योग की प्रमुख कंपनी है, जिसकी क्षमता सालाना 345,000 टन एल्युमीनियम उत्पादन की है। घरेलू बाजार में एल्युमीनियम की खपत बढ़ने का फायदा नाल्को को मिलने की उम्मीद है। कंपनी कम लागत पर एल्युमीनियम का उत्पादन करती है, जिससे भी इसे फायदा हो रहा है।

कंपनी की एल्युमीनियम उत्पादन लागत 1,300 डॉलर प्रति टन है। इसकी वजह से जिंसों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी मुनाफा कमाने की स्थिति में रहती है। नाल्को अपनी उत्पादन क्षमता में इजाफा भी कर रही है। वैश्विक मंदी के बादल छंटने से कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है।

एनटीपीसी : देश के कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में से पांचवां हिस्सा एनटीपीसी का है। कंपनी को 14 फीसदी का पक्का रिटर्न मिलता है, वहीं उत्पादन क्षमता बढ़ने से इसमें और इजाफे की उम्मीद है। वर्ष 2011-12 तक एनटीपीसी 8,000 मेगावाट के संयंत्र स्थापित करेगी।

उसके बाद 2016-17 तक क्षमता में हर साल 6,000 मेगावाट इजाफा करने की योजना है, जिससे कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 75,000 मेगावाट हो जाएगी। कंपनी को सालाना 10,000 करोड़ रुपये की नकदी मिलती है, जिससे विस्तार योजनाओं को पूरा करने में आसानी होगी।

सरकार एनटीपीसी को मौजूदा क्षमता का 15 फीसदी बिजली ऊंची दरों पर बेचने की अनुमति दे सकती है, जिससे कंपनी का मुनाफा बढ़ सकता है। वर्ष 2010-11 के आय के अनुमान के आधार पर कंपनी के शेयर 2.7 गुना ज्यादा कारोबार कर रहे हैं, जो निजी कंपनियों के शेयरों के मुकाबले कहीं कम है।

पावर ग्रिड : सरकार के प्रायोजित ऊर्जा संबंधित कार्यक्रमों को चलाने वाली नोडल एजेंसी के रूप में पावर ग्रिड काम करती है। यह देश के विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा पारेषण भी करती है। टीऐंडडी के क्षेत्र में यह देश की सबसे बड़ी कंपनी है। 11वीं पंचवर्षीय योजना में कंपनी ने 55,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है।

सरकार वर्ष 2012-17 तक 100,000 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन क्षमता में इजाफा करने की योजना बना रही है, जिसका फायदा पावर ग्रिड को मिलेगा। अगले दो साल तक कंपनी का शुद्ध मुनाफा 30 फीसदी की दर से बढ़ सकता है।

भारतीय स्टेट बैंक : हाल के दिनों में एसबीआई के शेयरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर नहीं रहा है। हालांकि अर्थव्यवस्था में सुधार और कम एनपीए से बैंक का मुनाफा बढ़ सकता है। वर्ष 2010-11 की आय के अनुमान के आधार पर एसबीआई के शेयर 1.6 गुना ज्यादा पर उपलब्ध हैं, जबकि निजी बैंकों के शेयर 1.8 से 3.5 गुना ज्यादा पर कारोबार कर रहे हैं।

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