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उचित समय पर जरूरी है स्वास्थ्य बीमा
स्वास्थ्य बीमा : आदर्श तौर पर एक टर्म पॉलिसी, एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी और एक दुर्घटना बीमा पॉलिसी लेना पर्याप्त माना जाता है
नेहा पांडेय /  January 18, 2010

हेल्थकेयर की बढ़ती कीमतों के साथ ही आज की तारीख में प्रत्येक व्यक्ति के पास पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा कवर होना जरूरी हो गया है।

आदर्श तौर पर एक टर्म पॉलिसी, एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी और एक दुर्घटना बीमा पॉलिसी लेना पर्याप्त होता है। अगर मामला व्यक्तिगत न होकर पारिवारिक है तो फ्लोटर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेनी चाहिए। हालांकि, पिछले दशक में बीमा कंपनियां गंभीर बीमारियों (क्रिटिकल इलनेस कवर) के लिए भी पॉलिसी लेकर आई हैं।

यह जीवन बीमा के साथ राइडर के तौर पर उपलब्ध होने के साथ ही अलग से भी उपलब्ध है। इसके अंतर्गत रोगी का घर पर इलाज करवाने का अतिरिक्त खर्च और बीमारी के कारण आय प्रभावित होने को कवर किया जाता है। बजाज आलियांज के स्वास्थ्य बीमा के प्रमुख श्रीराज देशपांडे ने बताया, 'क्रिटिकल इलनेस कवर गंभीर बीमारी भुगत रहे पॉलिसीधारक को आय की कमी से सुरक्षित रखता है।'

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति के पास स्वास्थ्य बीमा और क्रिटिकल इलनेस कवर दोनों है और उसे क्रिटिकल इलनेस के अंतर्गत आने वाली कोई बीमारी होती है तो स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के तहत उसके मेडिकल के खर्च तो वापस मिलेंगे ही क्रिटिकल इलनेस का सम एश्योर्ड भी उसे मिलेगा।

ऑप्टिमा इंश्योरेंस ब्रोकर्स के मुख्य कार्याधिकारी राहुल अग्रवाल ने कहा, 'इस प्रकार मिलने वाली राशि का इस्तेमाल वेतन की क्षतिपूर्ति या कर्ज चुकाने में की जा सकती है।' क्रिटिकल इलनेस कवर दो तरीके से ली जा सकती है- स्टैंडअलोन पॉलिसी के तौर किसी साधारण बीमा कंपनी से या जीवन बीमा पॉलिसी में राइडर के तौर पर।

स्टैंडअलोन पॉलिसी की तुलना में जीवन बीमा के राइडर सस्ते होते हैं। इसके अलावा बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने राइडर का प्रीमियम मुख्य पॉलिसी के 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है। इसका मतलब हुआ कि अगर आप जीवन बीमा के प्रीमियम के तौर पर सालाना 10,000 रुपये देते हैं तो बीमा कंपनी क्रिटिकल इलनेस राइडर के लिए 3,000 रुपये सालाना से अधिक नहीं ले सकती।

पॉलिसी राइडर

लेकिन राइडर के अपनी अलग सीमाएं हैं। अगर कोई व्यक्ति राइडर के तहत दावा करता है तो मुख्य बीमा पॉलिसी तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। इसके अतिरिक्त, अगर कोई व्यक्ति क्रिटिकल इलनेस राइडर का दावा करने के 2 या 3 महीने अंदर स्वर्गवासी हो जाता है तो राइडर के तहत दी गई राशि मृत्योपरांत होने वाले लाभ से काट ली जाती है।

हालांकि, अगर कोई व्यक्ति अलग से क्रिटिकल अलनेस कवर लेता है तो दावा केवल पहले से निर्धारित बीमारियों के लिए ही किया जा सकता है। इसके अलावा ऐसी पॉलिसियां पहले से वर्तमान किसी बीमारी को पॉलिसी लेने के 90 से 120 दिनों के भीतर कवर नहीं करती है।

इस प्रकार की पॉलिसियों के तहत कैंसर, पहला हृदयाघात, वृक्क का काम करना बंद कर देना, पमुख अंगों का प्रत्यारोपण, पक्षाघात, मुख्य धमनी की बाइपास शल्य चिकित्सा, प्राथमिक पल्मोनरी आर्टरियल हाइपरटेंशन और एओर्टा ग्राफ्ट सर्जरी तथा मल्टिपल स्क्लेरोसिस शामिल होते हैं। एक बीमा अभिकर्ता गोपाल झुनझुनवाला ने कहा, 'ऐसी पॉलिसी लेने की सलाह केवल उन लोगों को दी जाती है जो क्रिटिकल इलनेस कवर लेना चाहते हैं।'

क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी लेने से पहले यह देख लेना चाहिए कि कौन-कौन सी बीमारियां उसमें शामिल नहीं है और शर्तें क्या हैं। किसी हृदय रोगी को दावे की रकम पाने के लिए शल्य चिकित्सा के 90 दिनों बाद जक जीवित रहना जरूरी है।

अन्य कारक

अधिकांश वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि अगर पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा लिया जा चुका है तो फिर क्रिटिकल इलनेस कवर की जरूरत नहीं हो सकती है।

घल्ला ऐंड भंसाली के निदेशक मुकेश देढिया ने कहा, 'अगर आपने 5 लाख इससे अधिक का मेडिकल कवर लिया हुआ है तो आपको क्रिटिकल इलनेस कवर लेने की जरूरत शायद ही हो। बेहतर है कि पूरे परिवार के लिए एक फ्लोटर बीमा पॉलिसी ली जाए।'

देशपांडे ने कहा, 'स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के साथ क्रिटिकल इलनेस कवर होना बढ़िया है। लेकिन, क्रिटिकल इलनेस कवर को स्वास्थ्य बीमा की जगह नहीं लिया जाना चाहिए।' विशेषज्ञों ने बताया कि आदर्श तौर पर ऐसी पॉलिसियां एक खास उम्र वर्ग के लोग खरीदते हैं। 30 से 50 वर्ष के व्यक्ति मुख्य रूप से इस तरह की पॉलिसी खरीदते हैं।

अगर आप पर कोई आर्थिक रूप से निर्भर नहीं है तो करियर की शुरुआत में ऐसी पॉलिसी लेने का तुक नहीं बनता है। दिलचस्प बात यह है कि 50 साल के बाद इस तरह की बीमा पॉलिसी के प्रीमियम की राशि काफी बढ़ जाती है।

एक 25 वर्षीय व्यक्ति के लिए 20 वर्षों की एंडाउमेंट पॉलिसी के लिए, जहां सम एश्योर्ड 1 करोड रुपये और क्रिटिकल इलनेस कवर 5 लाख रुपये का है, प्रीमियम की राशि सालाना 24,863 रुपये बनती है। यही पॉलिसी अगर क्रमश: 40 और 50 वर्ष के व्यक्ति लें तो प्रीमियम क्रमश: 31,481 रुपये और 64,699 रुपये बनती है।

अगर कोई 50 वर्षीय व्यक्ति 12 लाख रुपये की स्टैंडअलोन पॉलिसी तीन साल के लिए लेता है तो उसे प्रीमियम के तौर पर लगभग 72,666 रुपये देने होंगे। ऐसी परिस्थिति में स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए म्युचुअल फंडों की योजनाबध्द निवेश योजनाओं (सिप) के जरिए एक कोष बनाया जा सकता है। जब आप 40-45 वर्ष की अवस्था में हो तभी से इसके लिए बचत शुरू कर दें।

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