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कटरा नील का करोबार बढ़ा
महिला परिधान से जुड़े कारोबार में 25 फीसदी की तेजी
राजीव कुमार / नई दिल्ली January 13, 2010

महिलाओं के परिधान की बदौलत चांदनी चौक स्थित कटरा नील के कारोबार में हर साल 20 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो रही है।

इस कटरे में करीब 1000 कारोबारी है और यहां का सालाना औसत कारोबार लगभग 2000 करोड़ रुपये का है। नवीनतम फैशन के लेडीज सूट, साड़ी, लहंगा, चुन्नी एवं महिलाओं से जुड़े अन्य परिधानों के लिए देश भर में विख्यात हो चुके कटरा नील के कारोबार से 10,000 कारीगरों की रोजी-रोटी चल रही है।

दिल्ली के छोटे-छोटे मोहल्ले से लेकर बरेली तक के कारीगर अपने विशिष्ट काम से कटरा नील के कपड़ों को नई पहचान देने में जुटे हैं। परिधानों पर अधिकतम काम हाथ से होने के कारण कटरा नील में बिकने वाले लेडीज सूट की कीमत कम से कम 600 रुपये हैं। 2000-3000 रुपये प्रति सूट की बिक्री यहां के लिए आम बात है।

कटरा नील के कारोबारी विनोद शर्मा बताते हैं, 'पांच साल पहले यहां मुंबई और सूरत जैसी जगहों से माल आता था, लेकिन पिछले पांच सालों में ट्रेंड बदल गया है। अब हम मुंबई एवं सूरत से सिर्फ कपड़े मंगवाते हैं और उसे रंगने से लेकर डिजाइनिंग देने का सारा काम दिल्ली में होता है। यहां तैयार किए गए महिला परिधानों की मांग पूरे देश भर में है यहां तक कि अप्रत्यक्ष रूप से हम निर्यातक भी है।'

कारोबार में तेजी से हो रही बढ़ोतरी के बारे में पूछने कटरा नील के कारोबारी कहते हैं, 'हमलोग नवीनतम फैशन को लेकर काफी चौंकन्ने रहते हैं। हम इन बातों का पूरा ख्याल रखते हैं कपड़े को कौन सा रंग देना है और उस पर किस प्रकार की डिजाइनिंग होगी।'

दिलचस्प बात यह है कि इन कारोबारियों ने फैशन डिजाइनिंग का कोई प्रशिक्षण भी नहीं लिया है। कई बार इनके पास नवीनतम डिजाइन लेकर बड़े फैशन डिजाइनर भी आते हैं, लेकिन वे यूं ही उन्हें ऑर्डर नहीं देते। शर्मा कहते हैं, 'बाजार को भाने वाली डिजाइनिंग और रंग की तीव्र पहचान की बदौलत ही कटरा नील ने राष्ट्रीय पहचान बनाई है और किसी भी डिजाइन को बाजार में उतार कर हम उसे खोना नहीं चाहते।'

कटरा नील के कारोबार से सैकड़ों पारंपरिक व नए फैशन डिजाइनर जुड़े हैं। कपड़े को रंग देने का चयन करने के लिए अलग विशेषज्ञों की टीम है तो उस पर कशीदा करने या कोई अन्य डिजाइन गढ़ने का फैसला लेने के लिए अलग टीम। इस फैसले के बाद इन कपड़ों को कारीगरों के पास भेजा जाता है। यहां के कई कारोबारी सालाना 50 करोड़ रुपये तक कारोबार कर रहे हैं।

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