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मुंबई सेज़ छोड़ेंगे मुकेश!
सेज़ के लिए ज़मीन अधिग्रहण का काम कर दिया अनिश्चितकाल तक बंद
संजय जोग / मुंबई 01 06, 2010

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी और आनंद जैन द्वारा प्रवर्तित मुंबई सेज लिमिटेड की विवादित महामुंबई विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) योजना खटाई में पड़ती दिख रही है।

कंपनी तटवर्ती जिले रायगढ़ में इस परियोजना को विकसित करना चाहती है लेकिन जमीन अधिग्रहण से जुड़े मसले का समाधान न होते देख कंपनी यह कदम उठाने को मजबूर हो सकती है। 

दरअसल सेज अधिनियम में एक प्रावधान है कि कंपनी के पास एकमुश्त कम से कम 1,000 हेक्टेयर जमीन होनी चाहिए। इस कसौटी पर खरा न उतर पाने की वजह से कंपनी इस परियोजना को रद्द कर सकती है। वैसे तो कंपनी ने अभी तक 1,500 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत कर ली है लेकिन यह छिटकी हुई जमीन है जो एक साथ लगी हुई नहीं है।

कंपनी ने प्रति एकड़ 10 लाख रुपये चुकाकर यह जमीन ली है। इस सेज परियोजना में एक गैस आधारित बिजली परियोजना के साथ-साथ बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई अन्य परियोजनाएं विकसित करने की योजना रही है।

मुंबई सेज इस मामले में संसद में रखे जाने जमीन अधिग्रहण (संशोधित) विधेयक का इंतजार कर रही है। इसमें प्रावधान है कि अगर कंपनी ने 70 फीसदी जमीन एकमुश्त ले ली है तो 30 फीसदी भी उसे अनिवार्य अधिग्रहण के तहत मिल ही जाएगी। मुंबई सेज के प्रवक्ता ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

हालांकि इस मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फिलहाल इस परियोजना पर काम रुक गया है और मामला अब राज्य सरकार के पाले में चला गया है। सरकार ने भी इस मामले में अभी तक एक रुख नहीं अपनाया है और इस बात को लेकर दुविधा में है कि वाणिज्य विभाग इस परियोजना को एक बार फिर मंजूरी दे।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सेज अधिनियम के तहत एक परियोजना को केवल तीन बार ही विस्तार दिया जा सकता है। सेज अधिनियम के हिसाब से एकमुश्त जमीन अधिग्रहण न होने की वजह से इस परियोजना में कोई प्रगति नहीं हो पा रही है। इस मामले पर सरकार भी दुविधा में है कि जमीन अधिग्रहण के मामले में वह आगे आए या नहीं।

जब 2008 में इस परियोजना के लिए अध्यादेश लाया गया था तब इलाके के किसानों ने इसका पुरजोर विरोध किया था। इसके मद्देनजर सरकार अगर आगे आती है तो उसे सौ दफे सोचना होगा। उम्मीद की जा रही है कि राज्य के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण इस मामले में उद्योग मंत्री राजेंद्र दरदा से जवाब तलब करेंगे और मामले की समीक्षा कर उन्हें रिपोर्ट सौंपने को कहेंगे।

इस मामले में सेज का विरोध कर रहे किसानों की ओर से मोर्चा संभालने वाले विवेक पाटिल का कहना है कि अगर सरकार जमीन अधिग्रहण की सिफारिश करती है तो इस मामले में उसका हरसंभव विरोध किया जाएगा।

चुभने लगा है कांटा

भूमि अधिग्रहण की कील चुभ सकती है सेज़ को
मुकेश अंबानी और आनंद जैन जुड़े हैं सेज़ से
एकमुश्त ज़मीन हासिल नहीं कर पाई है कंपनी
इलाके के किसानों का एक तबका कर रहा है विरोध 
संसद में पेश होने वाले विधेयक पर रहेगी कंपनी की नज़र

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