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अब बारिश होगी नोटों की.. लेकिन थोड़ी थोड़ी...
साल 2010 में नौकरी की तलाश तो होगी पूरी, लेकिन अनाप शनाप तनख्वाह और पगार में मोटी बढ़ोतरी की उम्मीद करना होगा बेमानी
ऋषभ कृष्ण सक्सेना / नई दिल्ली January 04, 2010

मंदी का मारा 2009 अब ढल चुका है और 2010 अच्छी खबरें लेकर आ रहा है।

ऐसे में अच्छी नौकरी और मोटी पगार की उम्मीद होना लाजिमी है। लेकिन नौकरियां ज्यादा होने और तरक्की तेजी से होने की उम्मीद रखना आपके लिए फायदेमंद नहीं है। तमाम विशेषज्ञ यही मान रहे हैं कि बहुत अच्छे दिन 2010 में दिखना कुछ मुश्किल है।

अलबत्ता अच्छी खबर यह है कि बैंकिंग, वित्तीय सेवा, बीमा और बुनियादी ढांचा की रफ्तार इस बार सबसे तेज रहेगी। लेकिन रिटेल और रियल एस्टेट के दुर्दिन शायद अभी टले नहीं हैं।

भर्ती अक्ल से

मानव संसाधन से जुड़ी कंपनी टीमलीज सर्विसेज इंडिया के प्रबंध निदेशक अशोक रेड्डी के अनुसार रोजगार के बाजार में हलचल दिखना शुरू हो चुकी है।

वह कहते हैं, 'कंपनियां पहले की तरह अंधाधुंध भर्तियां तो बिल्कुल नहीं करेंगी। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) में भी अब एक साथ सैकड़ों कर्मचारी नहीं लिए जाएंगे। 2008 में हर महीने हम 10000 नई भर्तियां देखते थे, इस बार कंपनियां हर महीने कुल मिलाकर तकरीबन 3500 नई भर्तियों की बात कह रही हैं।'

हेड हंटर्स इंडिया के प्रबंध निदेशक के लक्ष्मीकांत के अनुसार इस बार भर्तियों में 10 से 12 फीसदी का इजाफा दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, 'कमोबेश सभी क्षेत्रों में और सभी स्तरों पर भर्तियां इस बार जोर पकडेंगी। आईटी जैसे क्षेत्रों में पिछले साल हुई छंटनी की भरपाई होगी।'

इस साल बैंकिंग और बीमा कंपनियों में भर्तियों की अच्छी खासी बयार दिखाई देगी। आईटी, बुनियादी ढांचा, एफएमसीजी, होटल और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी अच्छी हलचल की उम्मीद है। वैश्विक मानव संसाधन कंपनी मैनपावर ने पिछले महीने जारी अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा कि बुनियादी ढांचा, बैंकिंग और सेवा क्षेत्र की कंपनियां तेजी के साथ भर्तियां करेंगी। पहली तिमाही में रफ्तार कम रहेगी, बाद में इसके बढ़ने की संभावना है।

लक्ष्मीकांत कहते हैं, 'बैंकिंग क्षेत्र इस बार भर्ती के लिए तैयार है। भारतीय स्टेट बैंक तकरीबन 25000 भर्तियों की बात कह चुका है। आईसीआईसीआई बैंक भी 7 से 8000 नई भर्तियां करेगा। रही बात बीमा की, तो उसे मंदी भी मंद नहीं कर पाई थी।' उनका कहना है कि आईटी में छंटनी की वजह से पिछले साल खाली हुई जगहें अब भरी जाएंगी, इसलिए वहां भी रोजगार की अच्छी उम्मीद है।

रिटेल सुस्त

अनुसंधान फर्म इंडिया स्ट्रैट्स में प्रमुख (मीडिया, मनोरंजन और उभरते बाजार) सुनील कालरा ने कहा, 'अब उपभोक्ता सोच समझकर खर्च कर रहे हैं, जिससे रिटेल कंपनियों की हालत खराब है। ऐसे में इस क्षेत्र में नौकरियों की उम्मीद नहीं है। कंज्यूमर डयूरेबल्स कंपनियों में भी नौकरियां बहुत तेजी से बढ़ने के आसार नहीं हैं।'

एक नामी रिटेल कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि सुनहरा दौर लौटने की उम्मीद अभी नहीं है। पिछले साल छंटनी बहुत की गई थीं, इसलिए इस बार केवल खाली जगहें ही भरी जाएंगी। अलबत्ता मैनपावर की सहयोगी कंपनी राइट मैनेजमेंट की कंट्री प्रमुख अनीता बेलानी को रिटेल और वाहन उद्योग में भर्तियों की उम्मीद है।

काम के दाम

अगर आप पहली बार नौकरी करने जा रहे हैं तो ठीक ठाक वेतन की उम्मीद आप कर सकते हैं। उद्योग सूत्रों के मुताबिक महंगाई बढ़ने की वजह से किसी भी स्तर पर पगार में पिछले सालों के मुकाबले कमी नहीं आएगी। कालरा तो इसमें इजाफे की उम्मीद कर रहे हैं। लेकिन कंपनियां पगार सोच समझकर देंगी।

कालरा के मुताबिक अंधाधुंध वेतन अब नहीं मिलेंगे और पगार में तय राशि के बजाय प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा होगा। यानी आप जितना काम करेंगे, आपको उतनी ही रकम मिलेगी। रेड्डी के मुताबिक वेतन में इजाफा दहाई के अंकों में तो होगा, लेकिन 12 फीसदी से ज्यादा इजाफा शायद ही हो। लक्ष्मीकांत भी 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी की संभावना देख रहे हैं।

कौन है रोज़गार का सरकार

उद्योग                       नौकरी                 वेतन वृद्धि
बैंकिंग                       भरपूर                20 फीसदी
बुनियादी ढांचा          अच्छी                15 फीसदी
आईटी                     ठीकठाक          10-12 फीसदी
हॉस्पिटैलिटी           ठीकठाक             15 फीसदी
वाहन                     ठीकठाक                    --
शिक्षा                      अच्छी                       --
विनिर्माण               अच्छी                15 फीसदी
एफएमसीजी            भरपूर                      --
कंज्यूमर डयूरेबल्स   कम                       --
दूरसंचार                ठीकठाक              15 फीसदी
रियल्टी                    कम                         --
रिटेल                   बहुत कम                    --
आंकड़े उद्योग सूत्रों से बातचीत पर आधारित

Keyword: recession, jobs, industries, human resources, retail, banking,
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