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परियोजना प्रबंधन को सहारा
कारोबारी शिक्षा : बुनियादी ढांचा उद्योग की तेजी से कुशल पेशेवरों की मांग बढ़ी
बीएस संवाददाता / मुंबई January 04, 2010

लगभग आठ वर्ष पहले इंजीनियरिंग एवं निर्माण कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), बंबई के शैलेश जे मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के साथ समझौता करने का फैसला किया था।

इस गठजोड़ का मकसद था उद्योग में मानव संसाधन (एचआर) की खाई को पाटने के लिए परियोजना प्रबंधन में एक पाठयक्रम तैयार करना। हालांकि उद्योग ने इस आइडिया पर अमल करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। शैलेश जे मेहता स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के एक अधिकारी ने कहा, 'हम अपने छात्रों की भर्ती के लिए एलऐंडटी पर पूरी जिम्मेदारी डाल कर कार्यक्रम के साथ आगे नहीं बढ़ सकते।'

तब एलऐंडटी ने स्वयं ही वेंच बनाने का फैसला किया और अपने 29,000 कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए गुजरात के वडोदरा में पिछले साल एलऐंडटी इंस्टीटयूट ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट तैयार किया। औद्योगिक सूत्रों का कहना है कि हीरो होंडा, पुंज लॉयड, भारती एयरटेल और टीवीएस मोटर्स भी एलऐंडटी के फॉर्मेट पर अमल करने की संभावना तलाश रही हैं।

एलऐंडटी इंस्टीटयूट ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के डीन प्रो. कृष्णा मूर्ति ने कहा, 'परियोजना प्रबंधन कभी भी किसी भी स्कूल में नहीं सिखाया गया। प्रमुख बिजनेस स्कूलों में भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया जहां विशिष्ट प्रबंधन विषयों पर जोर दिया जाता है। इसे देखते हुए कंपनियां अपने स्वयं के पाठयक्रम तैयार करने और अपने अधिकारियों को प्रशिक्षित करने की संभावना तलाश रही हैं।'

इस उद्योग की कंपनियों का कहना है कि मौजूदा समय में बुनियादी ढांचा उद्योग अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा पर बड़े पैमाने पर निर्भर है। इस उद्योग में परियोजना प्रबंधकों, इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण ठेकेदारों और प्रौद्योगिकी उन्नयन का अभाव है।

परियोजना प्रबंधन पेशे के लिए गैर-लाभकारी संगठन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट इंस्टीटयूट का कहना है कि भारत में मौजूदा समय में परियोजना प्रबंधन पेशेवरों की मांग 10 लाख सालाना है। अनुमान है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-12) में 514 अरब डॉलर का निवेश बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए प्रस्तावित है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर 10 फीसदी परियोजना प्रबंधन पेशेवरों जबकि आईटी क्षेत्र भारत में लगभग 50 फीसदी परियोजना प्रबंधन पेशेवरों को आकर्षित करता है। आउटसोर्सिंग और विदेशी ग्राहकों से राजस्व एक प्रमुख कारक है।

नैशनल इंस्टीटयूट ऑफ कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट ऐंड रिसर्च (एनआईसीएमएआर) के महा निदेशक मंगेश कोरगांवकर कहते हैं, 'मौजूदा समय में परियोजनाएं काफी बड़ी और जटिल हैं और इनका औसतन बजट 600 करोड़ रुपये का है। इन परियोजनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमें सभी स्तरों पर मानव संसाधन पूंजी की जरूरत है। हमें आईआईटी और आईआईएम की तुलना में अधिक विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों की जरूरत है।'

भारतीय निर्माण उद्योग द्वारा 1983 में महाराष्ट्र के पुणे में एनआईसीएमएआर की स्थापना की गई थी। कोरगांवकर कहते हैं, 'बुनियादी ढांचा उद्योग मौजूदा समय में सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है। इसमें 3.2 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। मौजूदा समय में यह जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए हमें श्रम बल के इस आंकड़े को दोगुना किए जाने की जरूरत होगी। इसलिए कुशल पेशेवरों की जरूरत समय की मांग है।'

Keyword: project management, L&T, IIT, human resources, L&T institute of project management, Dean Prof. krishna murthy,
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