बिजनेस स?टैंडर?ड - शैक्षणिक सुधारों और संघर्ष से जूझता रहा 2009
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, December 01, 2022 08:02 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

शैक्षणिक सुधारों और संघर्ष से जूझता रहा 2009
कारोबारी शिक्षा : 10वीं बोर्ड परीक्षा की समाप्ति से लेकर निराशाजनक प्लेसमेंट और कैट की विफलता से छात्रों को रूबरू होना पड़ा
बीएस टीम /  December 28, 2009

हालांकि वर्ष 2009 सुधार की कुछ घोषणाओं के साथ शिक्षा क्षेत्र के लिए खुशियां भी लेकर आया, लेकिन यह एक ऐसा वर्ष माना जाएगा जिसे छात्र और कैम्पस जल्द से जल्द भुलाना चाहेंगे।

इस साल निराशाजनक प्लेसमेंट, कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) की गड़बड़ी और वेतन एवं नियुक्तियों को लेकर फैकल्टी सदस्यों के विरोध आदि के बारे में बिजनेस स्टैंडर्ड की एजूकशेन टीम ने विस्तृत रूप से जायजा लिया।

फाइनल प्लेसमेंट

भारतीय प्रबंध संस्थानों (आईआईएम) में प्लेसमेंट अक्सर सुर्खियों में रहा है, लेकिन इस साल फरवरी में इनके फाइनल प्लेसमेंट सत्र के दौरान ऑफर और औसतन वेतन पैकेजों में बड़ी गिरावट देखी गई।

इसे देखते हुए सभी आईआईएम ने अपने फाइनल प्लेसमेंट की अवधि बढ़ा दी थी, लेकिन फिर भी इस साल ज्यादातर छात्रों के लिए वेतन पैकेजों में बढ़ोतरी नहीं हुई और अगर हुई भी तो यह बहुत मामूली बढ़ोतरी थी।

मोटे वेतन पैकेजों के लिए चर्चा में रहने वाले आईआईएम-अहमदाबाद में छात्रों को इस बार 12.17 लाख रुपये के औसतन घरेलू वेतन की पेशकश की गई थी जो पिछले साल के 17.85 लाख रुपये के वेतन पैकेज की तुलना में 31 फीसदी की कटौती है।

हालांकि उम्मीद की जो किरण दिखाई दी, वह यह थी कि इस बार निजी क्षेत्र की कंपनियों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) ने कैम्पसों का अधिक दौरा किया। हालांकि प्लेसमेंट के संदर्भ में गैर-आईआईएम सामान्य स्थिति में रहे, लेकिन इनके छात्रों को दिए जाने वाले वेतन पैकेजों में गिरावट देखी गई।

इस साल अप्रैल में इनके प्लेसमेंट के दौरान निजी कंपनियों की दिलचस्पी घटने से जो खाई पैदा हुई थी, उसे पीएसयू ने काफी हद तक पाटने में अहम भूमिका निभाई। बिजनेस स्कूलों ने छात्रों की भर्ती के लिए कैम्पसों में आने वाली पीएसयू के पंजीकरण में 20-25 फीसदी की उछाल दर्ज की।

ज्यादातर गैर-आईआईएम ने 6 से 10 लाख रुपये की रेंज के औसतन वेतन पर ही संतोष करना मुनासिब समझा। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस हैदराबाद ने पहली बार अपने प्लेसमेंट सत्र को अनिश्चितकालीन समय के लिए बढ़ाया।

कपिल सिब्बल के हाथ में एचआरडी मंत्रालय

कपिल सिब्बल ने इस साल मई में केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एमएचआरडी) मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली और यह स्पष्ट किया कि पिछली सरकार द्वारा तैयार किए गए फॉरेन एजूकेशन बिल और राइट टु एजूकेशन बिल को आगे बढ़ाया जाएगा।

एमएचआरडी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच तालमेल के कायम हुआ। सिब्बल ने कहा कि उनके नए मंत्रालय द्वारा इस सहयोग का इस्तेमाल किया जाएगा।

नई जिम्मेदारी संभालने के बाद सिब्बल ने नैशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी एजूकेशनल इंस्टीटयूट्स ऐक्ट में सुधार, इसे मजबूत बनाए जाने, विभिन्न भागीदारों के कॉपीराइट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों द्वारा पेशेवर पाठयक्रमों के लिए लिए जाने वाले शैक्षणिक ऋण पर ब्याज सब्सिडी की नई स्कूल लॉन्च किए जाने आदि के लिए कानूनी मुद्दों पर काम किया।

उन्होंने 10वीं बोर्ड कक्षा के लिए अंकों के स्थान पर ग्रेडिंग प्रणाली की सिफारिश की। देश से बाहर कैम्पसों की स्थापना के लिए आईआईएम के पर लगी पाबंदियों को दूर करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

यशपाल समिति की सिफारिशें

वैज्ञानिक यशपाल द्वारा गठित यशपाल कमेटी ने जून 2009 में 'रिनोवेशन ऐंड रिज्यूवनेशन ऑफ हायर एजूकेशन' पर अपनी निर्णायक रिपोर्ट सौंपी। देश में उच्च शिक्षा प्रणाली का अध्ययन करने और सुधार के उपाय सुझाने के उद्देश्य से 2008 में इस कमेटी का गठन किया गया।

इन कुछ सिफारिशों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजूकेशन (एआईसीटीई) जैसी नियामक संस्थाओं की जगह नैशनल कमीशन फॉर हायर एजूकेशन ऐंड रिसर्च 'एनसीएचईआर) नाम से नियामक संस्था के गठन, डीम्ड यूनिवर्सिटी के दर्जे को समाप्त किए जाने और आईआईटी एवं आईआईएम के लिए विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की सिफारिशें भी शामिल हैं।

कुछ शिक्षाविदों ने यह कहते हुए इस रिपोर्ट की आलोचना की थी कि मौजूदा नियामकों को इस व्यवस्था से दूर किए जाना इस समस्या का समाधान नहीं है।

एचआरडी का 100 दिवसीय एजेंडा

उच्चतर शिक्षा और शोध के लिए व्यापक स्वायत्तता वाले प्राधिकरण की स्थापना के उद्देश्य के साथ केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस साल जून में एक 100-दिवसीय एजेंडा पेश किया था।

इसमें 10वीं बोर्ड परीक्षा को वैकल्पिक बनाए जाने, डीम्ड विश्वविद्यालयों की कार्य प्रणाली की समीक्षा, गरीब छात्रों द्वारा लिए गए शैक्षणिक ऋणों पर ब्याज राहत दिए जाने, स्कूल शिक्षा में सार्वजनिक निजी भागीदारी जैसे मुद्दे शामिल थे।

एनसीएचईआर यशपाल कमेटी और राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों पर आधारित है और यह यूजीसी, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और एआईसीटीई जैसे एजेंसियों के वर्ग में शुमार होगा। कानून एवं मेडिकल स्कूलों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों आदि के लिए यह नीतियां बनाएगा।

इसके अलावा एजेंडे में विदेशी शैक्षिणक प्रदाताओं के भारत में प्रवेश और परिचालन के लिए एक कानून का भी जिक्र किया गया जो इन विदेशी शैक्षणिक कंपनियों को नियंत्रित करेगा और सिर्फ अच्छे विदेशी विश्वविद्यालयों को ही देश में प्रवेश की अनुमति होगी।

ऑस्ट्रेलिया की बदनामी

इस साल जून में भारतीयों पर नस्लवादी हमलों के बाद शैक्षणिक ठिकाने के रूप में ऑस्ट्रेलिया की साख को नुकसान पहुंचा और वहां अब तक दर्जनों कॉलेज बंद हो चुके हैं। नवंबर में प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री वयलार रवि ने कहा था कि आस्ट्रेलिया में इस साल भारतीयों पर हमलों के 94 मामले दर्ज किए गए जो 2008 में ऐसे 17 मामलों की तुलना में काफी अधिक है।

उच्चतर शिक्षा के बजट में इजाफा

2009-10 के लिए उच्चतर शिक्षा का कुल योजना बजट अंतरिम बजट अनुमान में 2000 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है। जुलाई, 2009 में संसद में बजट पेश करते वक्त केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह घोषणा की थी।

सरकार ने मान्यताप्राप्त संस्थानों में तकनीकी और पेशेवर पाठयक्रमों के लिए गरीब छात्रों द्वारा लिए जाने वाले शैक्षणिक ऋण पर ब्याज में पूरी राहत देने का प्रस्ताव रखा। पूरे भारत में आईआईटी और एनआईटी के लिए भी 2,113 करोड़ रुपये आवंटित हुए। 

7 नए आईआईएम बनाने की घोषणा

इस साल अगस्त में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत तमिलनाडु, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में 7 नए आईआईएम की स्थापना को मंजूरी दे दी।

एमएचआरडी के अनुसार इन संस्थानों की स्थापना के लिए लगभग 1,057 करोड़ रुपये के कुल कोष की जरूरत होगी। इन 7 नए आईआईएम में एक संस्थान 'राजीव गांधी इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट' का गठन हो चुका है।

कैट में समस्या

संस्थानों को कैट को लेकर तकनीकी गड़बड़ियों से जूझना पड़ा। तकनीकी गड़बड़ी की वजह से परीक्षा के पहले तीन दिनों में पूरे भारत में लगभग 20,000 छात्र परीक्षा में भाग लेने से विफल रहे।

'कनफिकर' नामक वायरस ने सिस्टम में गड़बड़ी पैदा कर दी और अपने भागीदारों प्रोमेट्रिक और एनआईआईटी समेत आईआईएम को काफी समस्या का सामना करना पड़ा। छात्रों को लॉग इन करने, डाटाबेस में अपने नाम तलाशने, विकल्पों पर क्लिक करने जैसी दिक्कतों से जूझना पड़ा।

(अर्चना प्रसन्ना, विनय उमरजी, चित्रा उन्नीथन, कीर्तिका सुनेजा, प्रदीप्ता  मुखर्जी और कल्पना पाठक द्वारा जुटाई गई जानकारी पर आधारित)

Keyword: education sector, placement, CAT issue, IIT strike, HRD minister kapil sibal, IIMs,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जीडीपी वृद्धि को सेवा क्षेत्र से मिलेगी और मजबूती
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.