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नवरत्नों के ढेर में चमके तीन 'महारत्न'
बीएस संवाददाता/एजेंसियां / नई दिल्ली December 25, 2009

अभी तक बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली सरकारी कंपनियों को नवरत्न का दर्जा ही मिला हुआ था लेकिन अब सरकार इन कंपनियों को और भी बड़ा महारत्न का दर्जा देने जा रही है।

वैश्विक स्तर की महारथी कंपनी बनाने के मकसद से सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को और अधिकार देने का फैसला किया है। सरकारी कदम से इन कंपनियों को और अधिक स्वायत्तता मिलेगी और इन्हें बड़े फैसले खुद ही लेने का अधिकार मिल जाएगा।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय बैठक में यह फैसला लिया गया जिसका ऐलान सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने किया। सोनी ने कहा, 'महारत्न योजना का मुख्य मकसद है बड़े सरकारी उपक्रमों को शक्ति प्रदान करना है ताकि वे विस्तार कर सकें और वैश्विक स्तर की प्रमुख कंपनियां बन सकें।'

नवरत्न का दर्जा रखने वाली 18 सरकारी कंपनियों में से सेल, ओएनजीसी और एनटीपीसी सरकार द्वारा तय महारत्न की कसौटी पूरी करती हैं। महारत्न का दर्जा हासिल करने के लिए कंपनी का पिछले तीन साल में सालाना शुद्ध मुनाफा 5,000 करोड़ रुपये होना जरूरी है। इसके अलावा कंपनी का निवल मूल्य 15,000 करोड़ रुपये और कारोबार 25,000 करोड़ रुपये का होना आवश्यक है।

साथ ही कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध भी होनी चाहिए। महारत्न का दर्जा हासिल होने से कंपनी का निदेशक मंडल बिना सरकारी मंजूरी के 5,000 करोड़ रुपये तक के निवेश का फैसला ले सकेगा जबकि फिलहाल यह सीमा 1,000 करोड़ रुपए की है।

सोनी ने कहा कहा, 'जिन सरकारी कंपनियों में भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियां बनने की क्षमता है उन्हें महारत्न के अलग वर्ग के तौर पर जाना जा सकता है।' यह बात अलग है कि दलाल पथ पर सरकार के इस फैसले की मुहर नहीं लग पाई और गुरुवार को ओएनजीसी, सेल और एनटीपीसी जैसी दिग्गज सरकारी कंपनियों के शेयरों में बहुत ज्यादा तेजी देखने को नहीं मिली।

सोनी के मुताबिक इस योजना का मकसद है बड़ी सरकारी कंपनियों को और अधिक शक्तियां प्रदान करना है ताकि वे अपने परिचालन का विस्तार कर सकें और प्रमुख वैश्विक कंपनियों के रूप में उभर सकें।  फिलहाल नवरत्न कंपनियों की संख्या 18 है लेकिन सरकारी मानकों के मुताबिक केवल ओएनजीसी, सेल और एनटीपीसी महारत्न बनने की हकदार हैं।

नवरत्न कंपनियों को अब मिलेगा महारत्न कंपनी की दर्जा
महारत्न बनाने के लिए तय किए सरकार ने मानक
सालाना 5,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाती हो कंपनी
फिलहाल ओएनजीसी, सेल और एनटीपीसी ही होंगी हकदार

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