बिजनेस स्टैंडर्ड - बात निकली.. गई दूर तलक
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, December 06, 2021 08:01 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

बात निकली.. गई दूर तलक
दशक का दम : इस दशक में भारत के तमाम शहरों में दूरसंचार सेवा का जाल पूरी तरह बिछाया जा चुका है और पिछले 5 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही कारनामा दोहराने की कोशिश ऐसे की गई है मानो कोई जंग लड़ी जा रही हो। देश के 600,000 से अधिक गांवों में दूरसंचार सेवा के कदम पड़ चुके हैं। इसी दूरसंचार क्रांति पर नजर डाल रहे हैं
मनोज कोहली /  December 24, 2009

जब 1999 में नई दूरसंचार नीति की घोषणा हुई, तो बहुत कम लोगों को लग रहा था कि इसके तहत निर्धारित लक्ष्य वास्तविकता की कसौटी पर खरा उतर पाएंगे।

जो लोग ऐसा मानते थे, उनकी खिल्ली उड़ रही थी और कहा जा रहा था कि वे तो खुली आंखों से सपना देख रहे थे। हालांकि ऐसा कहने वाले भी गलत नहीं थे क्योंकि उस वक्त भारत में महज 2.3 फीसदी आबादी के पास ही दूरसंचार की सुविधा थी और केवल 310,000 गांवों को टेलीफोन मयस्सर हो पाए थे। लेकिन अब हालात बिल्कुल अलग हैं।

इस समय देश में 45 फीसदी लोगों के पास फोन हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। भारत के गांवों में जिस तरह से दूरसंचार सेवा का विकास हुआ है, वह वाकई हैरत में डालने वाला है।

सही मायनों में कहें तो इस दशक की शुरुआत दूरसंचार क्षेत्र को नई रफ्तार देने वाली साबित हुई। लाइसेंसिंग नीति और इस क्षेत्र से जुड़ी तमाम प्रक्रियाओं में ढील दिए जाने, निश्चित शुल्क वसूलने के बजाय निजी कंपनियों के साथ कमाई साझा करने से तस्वीर ही बदल गई और निजी कंपनियों की भीड़ इस क्षेत्र में बढ़ती गई।

जब 1999 में दूरसंचार नीति का खाका सामने रखा गया तो उसमें वर्ष 2010 तक देश में दूरसंचार घनत्व 15 फीसदी करने और ग्रामीण क्षेत्र में इसकी पहुंच 4 फीसदी तक करने की बात कही गई थी। लेकिन इस नीति की दूरदर्शिता ही कही जाएगी कि भारत इस लक्ष्य से कई गुना आगे निकल गया। यह कहने में हमें कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि आजाद भारत की सबसे सफल नीतियों में दूरसंचार नीति भी शामिल है।

तेज़ होती जा रही है घंटी

इस नीति की सफलता पर अगर किसी को शुबहा है, तो आंकड़े उसे आइना दिखा सकते हैं। पिछले एक दशक के दौरान दूरसंचार क्षेत्र में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 160 फीसदी बढ़ी है।

वर्ष 1995 और 2000 के बीच हर महीने औसतन 1 लाख नए ग्राहक जुड़ते थे, लेकिन वर्ष 2008 में यही आंकड़ा औसतन 1 करोड़ प्रतिमाह हो गया। इस समय हर महीने दूरसंचार क्षेत्र को लगभग 1.4 से 1.5 करोड़ नए उपभोक्ता मिल रहे हैं।

इस दशक में भारत के तमाम शहरों में दूरसंचार सेवा का जाल पूरी तरह बिछाया जा चुका है और पिछले 5 वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही कारनामा दोहराने की कोशिश ऐसे की गई है मानो कोई जंग लड़ी जा रही हो। देश के 600,000 से अधिक गांवों में दूरसंचार सेवा के कदम पड़ चुके हैं।

गांवों की हिस्सेदारी दूरसंचार में कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस समय देश की सबसे बड़ी कंपनी भारती एयरटेल को 40 फीसदी कमाई इन्हीं क्षेत्रों से होती है। देश में दूरसंचार सेवाओं का जाल बिछने से इसके फौरी फायदे भी दिखाई दे रहे हैं। इससे न सिर्फ लोगों के बीच दूरी खत्म हुई है, मूल्य-वर्धित सेवाओं, मौसम, कृषि, सूचना, खेल समाचार और मनोरंजन सभी क्षेत्रों में जैसे एक तेजी सी आ गई है।

मोबाइल फोन छोटे कारोबारों के लिए बाजार बढ़ाने में बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। इसकी मदद से सूचनाओं का प्रवाह पहले से कहीं बेहतर हुआ है और परिचालन खर्च में कमी के साथ समय की बचत जैसे कई फायदे भी देखे जा रहे हैं। मिनट की बात तो छोडिये, सेकंड में लोग एक दूसरे से संपर्क स्थापित कर लेते हैं, जिससे लोगों की सोच का दायरा भी बढ़ता जा रहा है।

तमाम अध्ययनों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि किसी भी देश में दूरसंचार सेवाओं का स्तर और पहुंच जितनी बेहतर होती है, उसका आर्थिक विकास भी उतनी ही तेजी के साथ होता है। उपभोक्ताओं की संख्या में 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने से यह अंतर 1.2 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाता है।

मोबाइल फोन न सिर्फ विकास दर में तेजी लाने में मददगार साबित होते हैं, बल्कि यह विकास का फायदा देश के विभिन्न वर्गों के लोगों तक पहुंचाने में भी सहायक होते हैं।

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च इन इंटरनैशनल इकोनॉमिक रिलेशंस(आईसीआरआईईआर) ने एक अध्ययन में पाया है कि दूरसंचार सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच होने से उत्पादन क्षमता और कार्यक्षमता दोनो में खासी बढ़ोतरी होती है, लिहाजा, आर्थिक विकास का लाभ आम लोगों तक पहले की अपेक्षा अधिक मिल रहा है।

कई क्षेत्रों को मिली संजीवनी

मोबाइल तकनीक बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों के लिए भी वरदान साबित हुई है। यहां तक कि ऊर्जा क्षेत्र में यह काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार के लोगों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने और एक दूसरे से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों जैसे आईसीटी, राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क  और राष्ट्रीय ई-प्रशासन राष्ट्रीय विकास में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

वेब कनेक्टिविटी के लिए भी मोबाइल फोन एक उपयोगी जरिया साबित हुआ है। आने वाले कुछ सप्ताहों में स्पेक्ट्रम और थ्री जी तकनीकी पर जल्द ही कोई फैसला होने वाला है, जिससे इन सेवाओं की गुणवत्ता में काफी ज्यादा फर्क आएगा। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की बीच की खाई को पाटने में ये तकनीक खासी मदद पहुंचा सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को लेकर उठाए जा रहे कदमों जैसे ई-प्रशासन, ई-स्वास्थ्य और ई-शिक्षा को इस तकनीक से काफी बल मिल सकता है। विकास और ई-गवर्नेंस के इस दौर में मोबाइल तकनीक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि क्योंकि विकास कार्यों कीसमीक्षा कर पाने में इससे काफी मदद मिलती है।

मौजूदा दशक 2जी और 2.5जी मोबाइल सेवाओं का रहा, जबकि आने वाला दशक नई तकनीक यानी 3जी से जाना जाएगा।

बात करने के बढ़ते गए बहाने

इस दशक की शुरुआत में देश में महज 2.3 फीसदी आबादी के पास दूरसंचार की सेवा और सुविधा उपलब्ध थी
लैंडलाइन फोन पर ही आम तौर पर सब थे निर्भर और पीसीओ के बाहर लगती थीं कतारें
आज 45 फीसदी आबादी के पास फोन हैं और इसमें ग्रामीण क्षेत्र की भागीदारी हैरत में डालने वाली है
1995 से 2000 के बीच औसतन 1 लाख ग्राहक हर महीने जुड़ते थे, अब डेढ़ करोड़ नए ग्राहक हर माह जुड़ते हैं
देश की सबसे बड़ी निजी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल को 40 फीसदी कमाई होती है गांवों से
3 जी की तरफ बढ़ती सरकार देश में अगले दशक में दे सकती है नई दूरसंचार क्रांति को जन्म

Keyword: telecom industry, history of decade, telecom policy, rural region, mobile phone, small traders,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या देश में कोविड टीके की बूस्टर खुराक लगाई जाएं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.