बिजनेस स?टैंडर?ड - साल 2012 तक हम तीन बड़े म्युचुअल फंडों में शामिल होंगे
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, October 04, 2022 10:10 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम बाजार खबर

साल 2012 तक हम तीन बड़े म्युचुअल फंडों में शामिल होंगे
सवाल-जवाब : अचल कुमार गुप्ता, प्रबंध निदेशक, एसबीआई म्युचुअल फंड
चंदन किशोर कांत /  December 23, 2009

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का म्युचुअल फंड कारोबार सबसे बड़ा वितरण नेटवर्क होने के बावजूद खुद को शीर्ष खिलाड़ियों में अब तक शामिल नहीं कर पाया है।

एसबीआई म्युचुअल फंड अभी अपना विस्तार कर रहा है ताकि बड़े और मझोले शहरों के और अधिक निवेशकों को आकर्षित कर सके। कंपनी अगले दो वर्षों में और 75 जगहों पर अपनी उपस्थिति बनाने का लक्ष्य कर रही है।

एसबीआई म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक अचल कुमार गुप्ता ने चंदन किशोर कांत को बताया कि चालू वित्त वर्ष में प्रवेश प्रभार पर पाबंदी लगाए जाने से लाभ पर दबाव रहेगा लेकिन यह नकारात्मक नहीं होगा। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश।

प्रवेश पर पाबंदी लगाए जाने के बाद सफर कैसा रहा है?

प्रवेश प्रभार (एंट्री लोड) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से इक्विटी फंडों में निवेश प्रभावित हुआ है। अगस्त में प्रवेश प्रभार पर पाबंदी के बाद वितरकों के लिए कारोबार में बदलाव आया है। वे योजनाओं को लेकर उतने अधिक उत्साहित नहीं हैं।

इक्विटी फंडों में आने वाला 90 प्रतिशत निवेश वितरकों के माध्यम से आता था, इसलिए इसका प्रभाव स्पष्ट देखा जा रहा है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि वितरकों को पहले की भांति कमीशन नहीं मिल सकता क्योंकि परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां इसे बरकरार रखनं में सक्षम नहीं हैं।

फंड कंपनियां बहुत कम लाभ पर परिचालन करती हैं और कई को घटा उठाना पड़ रहा है। इक्विटी परिसंपत्ति वर्ग में शुध्द निकासी देखने को मिली है। हालांकि, इसका श्रेय केवल प्रवेश पभार पर लगी पाबंदी को ही नहीं दी जा सकती। बाजार में भी महत्वपूर्ण रूप से बढ़त आई है और निवेशकों ने मुनाफावसूली की है।

क्या नियामक के लगातार हस्तक्षेप की वजह से फंड बाजार में अस्थिरता आ रही है?

णअगर कोई कदम अंतत: निवेशकों के हित के लिए है तो हमें उसका स्वागत करना चाहिए क्योंकि ग्राहक ही सब कुछ है। इन नियमों से हमारे कारोबार का प्रभावित होना तय है। अल्पावधि के लिए कारोबार प्रभावित होता देखा जाएगा लेकिन उद्योग जल्द ही इसके लिए कोई रास्ता बनाएगा।

स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों (आईएफए) के लिए ग्राहकों से सेवा शुल्क लेना मुश्किल हो रहा है। क्या वितरण के अन्य चैनलों ज्यादा फल-फूल रहे हैं?

बदली हुई इस परिस्थिति में हमारे लिए बैंकिंग चैनल महत्वपूर्ण हो गया है। वर्तमान में, बैंकिंग चैनल की हिस्सेदारी हमारे कुल कारोबार में 20 से 25 प्रतिशत की है। वितरण में स्टेट बैंक समूह की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत हो जाएगी और हम इस दिशा में पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। यह हमारी तरजीही सूची में है क्योंकि क्योंकि चैनल कीमतों के प्रति कम संवेदनशील है।

क्या आप यह कहना चाहते हैं कि अपेक्षाकृत छोटे वितरकों का नेटवर्क घटेगा...

भविष्य में इस बात की संभावना है कि जो आईएफए केवल म्युचुअल फंड बेचा करते हैं, उनकी संख्या घटेगी। हम कारोबार के 30 से 35 प्रतिशत के लिए आईएफए पर निर्भर करते हैं। हम जानते हैं कि प्रवेश प्रभार पर पाबंदी लगने के बाद यह चैनल सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। अगर कोई आईएफए बेहतर सेवाएं देता है और जानकारियां भी रखता है तो पहले की तुलना में वह ज्यादा आगे बढ़ेगा।

देश भर में सबसे बड़ा नेटवर्क (भारतीय स्टेट बैंक) होने के बावजूद एसबीआई का म्युचुअल फंड कारोबार अभी तक तीन शीर्षस्थ कंपनियों में क्यों नहीं शामिल हो सका है?

प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति फंड कंपनियों के स्थान निर्धारण करने का एकमात्र तरीका नहीं है। कुछ दूसरे महत्वपूर्ण मानदंड भी हैं जैसे खुदरा ग्राहकों की संख्या, लाभोत्पादकता, ग्राहक-संतुष्टि। ये सब भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इन मानदंडों के हिसाब से एसबीआई म्युचुअल फंड शीर्ष तीन फंड कंपनियों में हो सकता है।

एसबीआई का वितरण नेटवर्क बड़ा होने से एसबीआई म्युचुअल फंड को खुदरा ग्राहक पाने में मदद मिली है। एसबीआई और एसबीआई म्युचुअल फंड एसबीआई के वितरण नेटवर्क का पूरा इस्तेमाल करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2012 तक प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति के नजरिये से शीर्ष तीन कंपनियों में शामिल होंगे, ऐसी उम्मीद है। लेकिन हमारा अधिक ध्यान खुदरा ग्राहकों पर होगा।

उपस्थिति बढ़ाने की आपकी कोई योजना है?

वर्तमान में अगर हम एसबीआई की शाखाओं को छोड़ दे तो 100 जगहों पर अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। अगले दो वर्षों में हम 75 और स्थानों पर अपनी उपस्थिति बनाएंगे और इनमें से अधिकांश पहले और दूसरे दर्जे के शहर होंगे।

छोटे शहरों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का प्रयास हम जारी रखेंगे क्योंकि इन क्षेत्रों से हमें अधिक ग्राहक मिलेंगे और हम उन्हें अपनी सेवाएं उपलब्ध कराना चाहते हैं। इसके बावजूद, हम उन 8-10 शहरों को नजरंदाज कर नहीं चल सकते जहां से हमारे कारोबार का एक प्रमुख हिस्सा आता है।

लाभोत्पादकता के लिए वित्त वर्ष 2010 आपके लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण होगा?

हमारी लाभोत्पादकता में कमी आएगी। अगर प्रवेश प्रभार पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश नहीं आया होता तो हमारी लाभोत्पादकता बढ़ती। अगस्त से कमीशन का एक हिस्सा हमारी जेब से जा रहा है, इसलिए इसका प्रभाव तो होगा ही। हम इसकी भरपाई अन्य माध्यमों जैसे पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के जरिए करने का प्रयास करेंगे।

यह कहना तो मुश्किल होगा कि क्या हम इससे घाटे की भरपाई कर पाएंगे लेकिन यह तय है कि हम घाटे में नहीं आएंगे और हमारी लाभोत्पादकता बनी रहेगी। अभी भी हम लाभ में हैं।

हाल ही में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एम्फी की इस बात को दोहराया है कि निवेशकों को अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने के लिए बाध्य न किया जाए...

कुछ अनियमितताओं की वजह से उद्योग प्रभावित हुआ है। हमें नियमों के साथ चलना चाहिए। यह कहना कठिन है कि अगर ग्राहक वितरक बदलते हैं तो खुदरा कमीशन के साथ क्या होने वाला है। इस मामले में स्पष्टता की जरूरत है।

दोनों पक्षों की तरफ से तर्क दिए जा रहे हैं कि वितरक बदलने के बाद वर्तमान वितरक को ट्रेल कमीशन क्यों मिलना चाहिए और यह नए ब्रोकर को क्यों नहीं मिलना चाहिए। लेकिन इसका कोई एक जवाब अब तक सामने नहीं आया है।

Keyword: SBI MF, MD achal kumar gupta, entry load, equity funds, SEBI,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:

स्मार्ट इंवेस्टर

अच्छे शेयरों के चयन वाला बाजार

Investmentsसवाल जवाब बाजार की नजर इस सप्ताह होने वाली आरबीआई की मौद्रिक बैठक के परिणाम

बाजार हलचल

स्पे​शियल्टी में सुधार आने से सन फार्मा को मिलेगी मजबूत खुराक

आय में बढ़त से तय होगी शेयर बाजार की चाल

पीवीआर के शेयर का बढ़ेगा खुमार!

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.