बिजनेस स्टैंडर्ड - दफ्तर के घर-कार पर कर की मार
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दफ्तर के घर-कार पर कर की मार
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली December 19, 2009

अगर अपने दफ्तर की ओर से आपको कार या घर मिला है, तो उसकी चोट अपनी जेब पर सहने के लिए तैयार रहिए।

दरअसल मूल वेतन पर तो सरकार कर वसूलती ही थी, अब उसकी नजर आपको मिलने वाले भत्तों और फायदों पर भी टिक गई है। सभी कर्मचारियों को अपनी कंपनियों से मिलने वाली सुविधाओं पर भी अब कर देना पड़ेगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अधिसूचना जारी कर कंपनी से मिलने वाले लाभों के मूल्यांकन का नियम लागू कर दिया।

इससे आपको तकलीफ होगी, लेकिन आपके बॉस को खुश होने का मौका मिल सकता है। दरअसल इस नियम के लागू होने के साथ ही वेतनेतर लाभ कर (एफबीटी) को खत्म कर दिया जाएगा। एफबीटी के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले कार, शेयर विकल्प और आवास संबंधी भत्तों पर उनके नियोक्ता को कर देना पड़ता था। अब पूरा कर कर्मचारी से ही वसूला जाएगा।

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 2005 में एफबीटी लागू किया था। उससे पहले भत्तों पर कर वसूली के जो नियम थे, इस बार भी नियम कमोबेश वैसे ही हैं। यदि कर्मचारियों को 1.6 लीटर से कम क्षमता वाली कार मिली है, तो उनके लिए हर महीने कार का भत्ता 1,800 रुपये और ड्राइवर का भत्ता 500 रुपये माना जाएगा और उस पर कर वसूला जाएगा।

इससे अधिक क्षमता वाली कार होने पर ये भत्ते क्रमश: 2,400 रुपये और 900 रुपये महीने माने जाएंगे। एफबीटी से पहले हर महीने 1,200 रुपये के भत्ते माने जाते थे। एफबीटी के जरिये सरकार को सालाना 6,000 करोड़ रुपये की कमाई हो रही थी। नए नियमों का विशेषज्ञ स्वागत कर रहे हैं और उनके मुताबिक इन्हें लागू करने से सरकार की कमाई में मामूली कमी ही आएगी।

डेलॉइट के वरिष्ठ निदेशक राजेश श्रीनिवासन ने कहा, 'कमाई पर कुछ असर तो पड़ेगा ही क्योंकि एफबीटी के मुकाबले इसमें कर वसूली वाली सुविधाओं का सीधा जिक्र है।' श्रीनिवासन कहते हैं कि एफबीटी की वजह से कंपनियों को दिक्कतें आ रही थीं क्योंकि उसमें कुछ पहलू अभी तक साफ नहीं हुए थे।

उन्होंने कहा, 'कुल मिलाकर यह अच्छा कदम है। बुनियादी फर्क यही है कि कर नियोक्ता दे रहे थे, अब उनका हिसाब किताब कर्मचारियों से मांगा जाएगा।' नए नियमों के बाद भी अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों के बारे में बातें स्पष्ट नहीं हैं। एफबीटी में सरकार ने नियुक्ति के बारे में कई सवाल-जवाब जारी कर दिए थे। श्रीनिवासन के मुताबिक अब एक बार फिर सवाल-जवाब जारी करने होंगे।

दफ्तर से घर मिलने या शेयर मिलने की सूरत में कर वसूली के नियम एफबीटी की तरह ही रहेंगे। कंपनी से मिले शेयरों या इसॉप्स का मूल्यांकन सूचीबद्ध और गैर सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों के बीच अंतर पर आधारित होगा। इस पर कर कर्मचारियों को ही देना होगा।

घर के मामले में सरकारी कर्मचारियों को शहर के मुताबिक मूल्यांकन करने के बाद उसमें से लाइसेंस शुल्क घटाने के बाद बची रकम पर कर देना होगा। लेकिन प्रतिनियुक्ति पर आए सरकारी कर्मचारियों को पूरी रकम पर कर देना होगा।

कार : 1.6 लीटर से छोटी कार पर भत्ता 1800 रुपये, ड्राइवर पर 500 रुपये और बड़ी कार पर 2,400 और 900 रुपये महीने मानकर लगेगा कर।
घर : सरकारी कर्मचारियों से शहर के मुताबिक मूल्यांकन कर लाइसेंस शुल्क घटाने के बाद वसूला जाएगा कर। प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों से पूरे मूल्यांकन पर कर।
इसॉप्स : एफबीटी की ही तरह नियम

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