बिजनेस स्टैंडर्ड - अरबपतियों की गज़ब कहानी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, December 06, 2021 02:20 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

अरबपतियों की गज़ब कहानी
दशक का दम : मुफलिसी और संभावनाओं के विरोधाभासों वाला भारत अरबपतियों के नए केंद्र के तौर पर तब्दील होता जा रहा है। देश में बढ़ती जा रही है इनकी तादाद।
प्रणव सिरोही /  December 14, 2009

संयुक्त राष्ट्र मानव विकास सूचकांक की रपट के मुताबिक भले ही भारत की गिनती गरीब मुल्कों में की जाती हो लेकिन मशहूर अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची इसका एकदम विरोधाभास पेश करती है।

फोर्ब्स की 2009 की सूची में 52 अरबपति ऐसे हैं जिनका भारत से ताल्लुक है। अगर इस सदी के पहले साल यानी 2000 से इस आंकड़े की तुलना करें तो उस साल फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में महज 11 भारतीय नाम थे।

मतलब साफ है कि इस दौरान करीब 41 भारतीय कारोबारियों ने फोर्ब्स की अरबपतियों की सूची में दस्तक दी। जब 2007 में देसी शेयर बाजार एकदम उफान पर थे तब उस साल 53 भारतीयों ने इसमें जगह बनाई थी। 'मनी मेक्स मनी' की धारणा काम करती रही और भारतीय कारोबारियों के खाते और मोटे होते रहे।

वर्ष 2000 में जो भारतीय अरबपति संपत्ति के लिहाज से शीर्ष पर थे अब उतनी संपत्ति कई भारतीय  कारोबारियों के पास है। जिन दो भाइयों मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी की कुल संपत्ति वर्ष 2000 में महज 6.6 अरब डॉलर थी और वे वैश्विक सूची में 45 वें पायदान और भारतीय सूची में दूसरे स्थान पर थे।

वहीं अंबानी बंधु आज अलग-अलग होकर भी उस मुकाम से काफी आगे निकल गए हैं। फोर्ब्स की 2009 की सूची में मुकेश अंबानी 32 अरब डॉलर और अनिल अंबानी 17.5 अरब डॉलर के मालिक हैं और भारतीय अरबपतियों की सूची में बड़े भाई मुकेश शीर्ष पर हैं वहीं अनिल भी तीसरे स्थान पर काबिज हैं। कई दूसरे अरबपतियों के बारे में ऐसा ही रुझान रहा।

यही बात देश के 'पहले अरबपति' विप्रो के अजीम प्रेमजी के बारे में भी कही जा सकती है। 2000 की सूची में भारतीय अरबपतियों की सूची में 6.9 अरब डॉलर की पूंजी के साथ सबसे ऊपर थे जबकि वैश्विक सूची में प्रेमजी 43वें स्थान पर थे।

उफान का तूफान

दरअसल 1990 के दशक में आर्थिक सुधारों के जरिये जो फसल बोई गई उसकी कटाई इस सदी के पहले दशक में शुरू हुई। कई भारतीय कारोबारियों ने इस दौरान सफलता की नई इबारत लिख दी।

इसका ही नतीजा है कि 2004 में बंटवारे से पहले जिन अंबानी बंधुओं की कुल संपत्ति 6 अरब डॉलर थी 2009 में उन्हीं अंबानी बंधुओं की कुल संपत्ति बढ़कर 49.5 अरब डॉलर (मुकेश अंबानी-32 अरब डॉलर और अनिल अंबानी 17.5 अरब डॉलर) हो गई।

2007 में तो अकेले मुकेश अंबानी की ही संपत्ति 49 अरब डॉलर थी और अनिल की संपत्ति उनसे केवल 4 अरब डॉलर कम थी। वर्ष 2007 स्टील किंग के नाम से मशहूर लक्ष्मी निवास मित्तल के नाम रहा था। उस साल उनकी कुल संपत्ति 51 अरब डॉलर रही थी।

2004 में फोर्ब्स की सूची में मित्तल के खाते में 6.2 अरब डॉलर थे और वह वैश्विक सूची में 61 वें स्थान पर थे भारतीयों में उनसे आगे अजीम प्रेमजी थे जिनकी कुल संपत्ति 6.7 अरब डॉलर आंकी गई थी और भारतीयों में सरताज होने के साथ-साथ वह वैश्विक सूची में भी 58 वें स्थान पर थे।

हालांकि मंदी ने भारतीय अरबपतियों की हालत भी खस्ता कर दी थी और फोर्ब्स की ऐसी सूची में केवल 27 भारतीय नाम रह गए थे। मगर वक्त ने जैसे ही पलटी खाई अरबपतियों की तादाद फिर से बढ़ गई।

दबदबे का दशक

दस साल के सफर में भारती एयरटेल के सुनील भारती मित्तल, एस्सार समूह के शशि और रवि रुइया, यूनिटेक के रमेश चंद्रा, आदित्य बिड़ला समूह के कुमार मंगलम बिड़ला, सुजलॉन एनर्जी के तुलसी तांती, जिंदल समूह की सावित्री जिंदल, वेदांत समूह के अनिल अग्रवाल, अदाणी समूह के गौतम अदाणी और गोदरेज समूह के अदि गोदरेज सहित कई नाम कारोबारी फलक पर जबरदस्त तरीके से चमके।

दुनिया भर में आज इनका डंका बज रहा है। मसलन दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी आर्सेलर-मित्तल का मुखिया भारतीय पासपोर्टधारक ही है। मुकेश अंबानी पेट्रोरसायन कारोबार के महारथी हैं जो कई दूसरे क्षेत्रों में भी अपना दखल बढ़ा रहे हैं।

के पी सिंह दुनिया के दिग्गज डेवलपरों में शामिल हैं। तुलसी तांती पवन ऊर्जा कारोबार के सिरमौर बनकर उभरे हैं। रुइया बंधु अफ्रीका के केन्या से लेकर उत्तरी अमेरिका के कनाडा तक मौजूद हैं। कुमार मंगलम सीमेंट से लेकर एल्यूमीनियम जैसे जिंसों के बादशाह हैं।

चीन की चुनौती

चीन के विकास की चकाचौंध से भले ही दुनिया हैरान हो लेकिन अरबपतियों के मामले में कहीं हमारा पड़ोसी हमसे तो कहीं हम अपने इस पड़ोसी से आगे हैं। चीन में अरबपतियों की संख्या भले ही भारत से ज्यादा हो लेकिन अरबपतियों की कुल संपत्ति के मामले में भारत चीन से आगे है।

मसलन चीन के शीर्ष 100 अरबपतियों के पास कुल 170 अरब डॉलर हैं वहीं 100 आला भारतीय अरबपतियों के खाते में कुल 276 अरब डॉलर हैं। इस अंतर की एक बड़ी वजह यही है कि चीन में असली खेल अभी भी सरकार के हाथ में है जबकि भारत में निजी उद्यमियों के पास फलने-फूलने का पूरा मौका है।

भारतीय अरबपतियों के पास मौजूदा दौर में 276 अरब डॉलर की संपत्ति है जो देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के एक चौथाई के बराबर है।

(कम से कम एक अरब डॉलर की संपत्ति वालों को ही फोर्ब्स की सूची में जगह मिलती है।)

Keyword: billionaries, UN human resource index, forbes list, money makes money, indian business tycoons, wipro, azim premji, economic reforms,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या देश में कोविड टीके की बूस्टर खुराक लगाई जाएं?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.