बिजनेस स्टैंडर्ड - मोबाइल बैंकिंग की कमजोर घंटी
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मोबाइल बैंकिंग की कमजोर घंटी
मनोजीत साहा / मुंबई December 07, 2009

पैसों का अंतरण या शेष राशि पूछताछ जैसे आम काम के लिए मोबाइल हैंडसेट के इस्तेमाल की अनुमति भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल ही दे दी थी।

एक साल बाद भी, इस तरह की गतिविधियों में आशा के अनुरूप तेजी नहीं आई और इस वास्तविकता को केंद्रीय बैंक भी स्वीकार करता है। मोबाइल के जरिए बैंकिंग सेवाओं का लाभ काफी कम लागत पर किया जा सकता है। इसके लिए, 50 रुपये सालाना या फिर 2 से 4 रुपये प्रति लेन-देन का भुगतान करना होता है। 

हालांकि, यह शुल्क विभिन्न बैंकों के लिए भिन्न-भिन्न हैं। इसलिए, शुल्क और तकनीक ग्राहकों के लिए निश्चित ही कोई मुद्दा नहीं है। तो वजह क्या है कि ग्राहक इस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर रहे?

नियामक ने मोबाइल बैंकिंग की अनुमति 32 बैंकों को दी है जिनमें से 21 बैंक वर्तमान में यह सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं लेकिन जागरूकता और मोबाइल को बैंकिंग के लिए इस्तेमाल करने का भरोसा ग्राहकों में नहीं पनप पाया है। बुजुर्गों की बात करें तो मोबाइल बैंकिंग के बारे में उन्हें शायद ही कुछ मालूम हो।

कॉर्पोरेशन बैंक के महाप्रबंधक बी आर भट्ट ने कहा, 'मूलभूत बैंकिंग परिचालनों के लिए मोबाइल हैंडसेट के इस्तेमाल को लेकर बैंक के ग्राहकों में जागरूकता का अभाव है। और जिन्हें इसकी जानकारी है उनमें इसे तरह के लेन-देन करने का आत्मविश्वास नहीं है, खास तौर से पुरानी पीढ़ी के ग्राहकों में।'

कॉर्पोरेशन बैंक तकनीक के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों में अपेक्षाकृत अधिक उन्नत है। आरबीआई से अनुमति मिलने के कुछ दिनों बाद ही बैंक ने मोबाइल बैंकिंग सुविधा लॉन्च की थी। यद्यपि ऑनलाइन बैंकिंग के लिए इसके 1 लाख ग्राहकों ने पंजीकरण करवाया लेकिन 4,000 से 5,000 ग्राहक ही नियमित तौर पर इस सेवा का इस्तेमाल करते हैं।

इसी प्रकार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया भी मोबाइल बैंकिंग के क्षेत्र में सबसे पहले कदम रखने वाले बैंकों में शामिल था। इसके 26,246 मोबाइल बैंकिंग ग्राहकों का मात्र 10 प्रतिशत सेवा का लाभ उठा रहा है। आरबीआई ने प्रत्येक फंड ट्रांसफर के लिए 5,000 रुपये और दूकान पर किए जाने वाले भुगतान की सीमा 10,000 रुपये तय की थी।

बैंक इस वास्तविकता को समझ रहे हैं कि अधिकांश ग्राहक इस सीमा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कॉर्पोरेशन बैंक का औसत दैनिक लेन-देन मोबाइल बैंकिंग के जरिए 1,500 रुपये का है। लेकिन बैंक का मानना है कि लेन-देन की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। केंद्रीय बैंक भी लेन-देन की सीमा बढ़ाने की जरूरत समझ रहा है। हालांकि, सवाल यह भी है कि कम मूल्य वाले लेन-देन में बढ़ोतरी क्यों नहीं हो रही है।

शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती ने कहा, '5,000 रुपये और 10,000 रुपये के लेन-देन सीमा को बढ़ाए जाने की जरूरत है। बैंकों का कहना है कि इस सीमा के भीतर हवाई जहाज के टिकट आदि की खरीदारी नहीं की जा सकती है।' हालांकि, चक्रवर्ती का कहना है कि बैंकों के इस निवेदन पर विचार किया जा रहा है लेकिन नियामक को इससे जुड़ी कुछ चिंताएं भी हैं।

चक्रवर्ती ने कहा, 'क्या बैंक केवल उन्हीं ग्राहकों को लक्ष्य कर रहे हैं जो हवाई यात्रा के लिए टिकट बुक कर सकते हैं या केवल इस प्रकार के बड़े-लेन देन कर सकते हैं? कम मूल्य वाले लेन देन में बढ़ोतरी क्यों नहीं हो रही?' बैंकरों ने सुझाया है कि एटीएम लेन-देन की तरह ही मोबाइल बैंकिंग के लेन-देन की सीमा बढ़ा कर 25,000 रुपये कर दी जाए।

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