बिजनेस स्टैंडर्ड - 'वायरस की समस्या का अनुमान लगाना मुश्किल'
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'वायरस की समस्या का अनुमान लगाना मुश्किल'
सवाल-जवाब : सतीश देवधर, कन्वीनर (कैट) और आईआईएम फैकल्टी
चित्रा उन्नीथान और विनय उमरजी /  December 03, 2009

आईआईएम का कंप्यूटर आधारित कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) इन दिनों चर्चा में है। दरअसल, तकनीकी और अन्य समस्याओं के चलते परीक्षा लेने में परेशानी आ रही है।

प्रोमेट्रिक के साथ बैठक के बाद कैट के कन्वीनर और भारतीय प्रबंध संस्थान के फैकल्टी सतीश देवधर से बात की चित्रा उन्नीथान और विनय उमरजी ने। पेश हैं मुख्य अंश :

कैट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि संस्थान और परीक्षार्थियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस बारे में आप क्या कहेंगे?

शुरुआती दिनों में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन अब चीजें ठीक हो रही हैं। जिन छात्रों को परीक्षा देने में समस्या आई, उन्हें हम अगली तिथि को परीक्षा में बैठने की सुविधा मुहैया करा रहे हैं। छात्रों को परीक्षा देने में आ रही दिक्कतों के लिए हमें खेद है।

परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कंप्यूटर आधारित परीक्षा को चुना गया था। वैसे भी कोई नई चीज की शुरुआत करने पर इस तरह की समस्याओं से दो-चार होना ही पड़ता है।

कई लोग इस बात को मानने से इनकार कर रहे हैं कि वायरस के चलते इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ा...

हमने इस बारे में प्रोमेट्रिक और एनआईआईटी से बात की है। दोनों अपने क्षेत्र की जानी-मानी संस्थाएं हैं। संस्थाओं के अनुभव के बावजूद इस तरह की समस्या से दो-चार होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

वैसे, कोई भी यह समझ सकता है कि पहली बार किसी नई चीज की शुरुआत करने पर शत-प्रतिशत सफलता नहीं मिल सकती। वायरस की समस्या के बारे में भी कुछ कहा नहीं जा सकता। इस समस्या पर पूरी तरह से काबू पाने में थोड़ा समय लगेगा।

आईआईएम की छवि को नुकसान और छात्रों को होने वाली परेशानी की भरपाई प्रोमेट्रिक करेगी?

फिलहाल हमारी प्राथमिकता सही तरीके से परीक्षा आयोजित करने की है। हमारी कोशिश सभी छात्रों को सुचारू रूप से परीक्षा दिलाने की है। बाकी चीजों पर निर्णय आईआईएम के निदेशकों को लेना है।

इस तरह की भी खबरें आईं कि केंद्र पर एनआईआईटी, प्रोमेट्रिक और आईआईएम के अधिकारियों के मौजूद रहने के बावजूद छात्रों की समस्याओं को हल नहीं किया गया?

पिछले साल तक आईआईएम अपने स्तर से परीक्षा का संचालन किया था। इस बार प्रोमेट्रिक और एनआईआईटी को इसका जिम्मा दिया गया, वहीं कन्टेंट की जिम्मेदारी आईआईएम की थी। हमने कंप्यूटर आधारित परीक्षा लेने का प्रयोग किया, लेकिन दुर्भाग्यवश यह सुखद नहीं रहा।

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