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एफएम ऑपरेटरों की रेडियो लाइसेंस बढ़वाने की दरकार
आशीष सिन्हा / नई दिल्ली November 25, 2009

वित्तीय घाटे के दिन प्रतिदिन बढ़ने की वजह से निवेश्कों और प्रवर्तकों के बढ़ते दबाव के चलते कई रेडियो कंपनियों ने सरकार से उनके मौजूदा 10 वर्षीय रेडियो लाइसेंस (2006 से 2015) को और पांच साल (2020 तक) बढ़ाने की गुहार लगाई है।

रेडियो ऑपरेटर चाहते हैं कि उनकी लाइसेंस अवधि में यह इजाफा एफएम रेडिया के तीसरे चरण (एफएम-3) के लिए नीति की घोषणा से पहले ही किया जाए। फिलहाल कुल 250 परिचालित एफएम रेडियो स्टेशनों का घाटा पिछले चार साल में 500 करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुका है।

रेडियो कंपनियों के मुताबिक लाइसेंस की अवधि के पांच साल बढ़ जाने से उन्हें उनके कारोबार के लिए निवेशकों से अधिक मूल्यांकन हासिल करने में मदद मिलेगी। जबकि अभी कंपनियों को होते नुकसान के मद्देनजर निवेशक ऐसा करना नहीं चाहते।

फिलहाल देश में रेडियो स्टेशनों को चलाने के लिए 40 रेडियो कंपनियों के पास लाइसेंस हैं। इन ऑपरेटरों ने नीलामी प्रक्रिया के बाद कुल मिलाकर 1,300 करोड़ रुपये का 'एक बारगी प्रवेश शुल्क' (ओटीईएफ) चुका कर 2006 में लाइसेंस हासिल किए थे।

रेडियो मिड-डे (पश्चिम) इंडिया, के प्रबंध निदेशक विनीत सिंह हुक्मानी का कहना है, 'एक बार जब ओटीईएफ की अवधि मौजूदा 10 साल की जगह 15 साल हो जाएगी तो अवधि पर आधारित मूल्यकांन के चलते रेडियो उद्योग, निवेश के लिहाज से और लुभावना हो जाएगा।'

रेडियो मिड-डे अपनी रेडियो सेवाएं रेडियो वन 94.3 एफएम ब्रांड नाम के तहत चलाती है जो मिड डे और बीबीसी वर्ल्डवाइड का एक संयुक्त उपक्रम है। एफएम-3 नीति में सरकार लगभग 800 एफएम रेडियो फ्रीक्वेंसियों की नीलामी कर सकती है। हर फ्रीक्वेंसी यानी एक एफएम रेडियो चैनल।

सूत्रों का कहना है कि एफएम-3 नीति की घोषणा जनवरी, 2010 में की जा सकती है। इसलिए मिड-डे, इंडिया टुडे, टाइम्स समूह, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और मलयालम मनोरमा आदि के साथ भारतीय रेडियो ऑपरेटर संघ (एआरओआई) को उम्मीद है कि एफएम-3 नीति की घोषणा से पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय रेडियो लाइसेंसिंग की अपनी शर्तों में संशोधन करेगी।

संघ को उम्मीद है कि सरकार रेडियो क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मौजूदा 20 फीसदी से बढ़कर कम से कम 26 फीसदी करेगी। गैर-समाचार सामग्री वाली रेडियो कंपनियों के लिए यह सीमा 49 फीसदी है।

एआरओआई प्रमुख और मुख्य कार्याधिकारी, रेडियो सिटी अपूर्वा पुरोहित का कहना है, 'रेडियो के विकास को अगले स्तर तक ले जाने के लिए यह सही समय है। यह सिर्फ नीति में आगे ढील देने के साथ-साथ समय रहते और त्वरित समाधानों के साथ हो सकता है।'

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