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तीन महीने में जबरदस्त मुनाफावसूली से इक्विटी योजनाएं हुई हलकान
म्युचुअल फंडों की इक्विटी योजनाओं से इस साल अगस्त में 4,178 करोड़ रुपये, सितंबर में 5,945 करोड रुपये और अक्टूबर में 6,384 करोड़ रुपये की निकासी की गई
जयदीप घोष / मुंबई November 24, 2009

इसे महज एक इत्तेफाक कहें या निवेशकों की घटती दिलचस्पी, लेकिन 1 अगस्त से प्रवेश प्रभार पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से इक्विटी योजनाओं का संग्रह काफी हद तक प्रभावित हुआ है।

इसके साथ ही भारी मुनाफावसूली किए जाने से इक्विटी योजनाओं से पैसों का शुध्द बहिर्प्रवाह बढ़ा है। तीन महीनों में, बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 13.34 प्रतिशत बढ़ा है।

 हालांकि, एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों की मानें तो इक्विटी योजनाओं से इस अवधि के दौरान शुध्द रूप से 4,021 करोड़ रुपये की निकासी की गई। यह निकासी प्रमुख रूप से मुनाफावसूली के तौर पर की कई। पिछले तीन महीने में निवेशकों ने 16,507 करोड़ रुपये के यूनिट बेचे हैं।

एक फंड प्रबंधक ने कहा, 'यह कोई असामान्य बात नहीं है। जब बाजार में तेजी आती है तो निवेशक हमेशा ही मुनाफावसूली को तरजीह देते हैं।' अपेक्षाकृत कम संग्रह की वजह से भी फंड कंपनियां प्रभावित होती नजर आती है। इस अवधि के दौरान फंड कंपनियों ने मात्र 12,486 करोड रुपये का संग्रह किया और इस प्रकार मामला शुध्द निकासी का ही रहा।

तुलनात्मक रूप से जुलाई और दिसंबर 2007 के दौरान जब बाजार में तेजी जारी थी तो फंड कंपनियों से 44,914 करोड़ रुपये की निकासी की गई थी। लेकिन, सकारात्मक पहलू यह था कि इसी अवधि के दौरान कुल 59,601 करोड़ रुपये का संग्रह किया गया जिससे शुध्द प्रवाह 14,687 करोड़ रुपये का था।

हालांकि, हाल की अवधि में मुनाफावसूली में काफी वृध्दि हुई है लेकिन संग्रह उस हिसाब से नहीं बढ़ा है। बाजार में आई तेजी के आरंभिक चरण में संग्रह में तेजी आई थी। लेकिन अब हालात कुछ और हैं और इनमें कमी दिख रही है। मार्च के मध्य से बाजार में तेजी का सिलसिला शुरू होने के बाद निवेशकों की दिलचस्पी म्युचुअल फंडों में बढ़ी है।

परिणामस्वरूप, मार्च से लेकर जुलाई के अंत तक फंड कंपनियों ने 23,273 करोड़ रुपये का संग्रह किया। केवल जुलाई महीने की बात करें तो फंड कंपनियों ने अच्छा-खासा 23,273 करोड़ रुपये का संग्रह किया जो इस साल का सर्वाधिक है। हालांकि इस महीने में 15,844 करोड़ रुपये की मुनाफावसूली भी की गई थी लेकिन फंडों में पैसों का शुध्द प्रवाह भी स्रंग की वजह से बरकरार रहा।

लेकिन एक अगस्त से, जबसे प्रवेश प्रभार पर पाबंदी लगी है, संग्रह में भारी गिरावट आई है और इस महीने में फंड कंपनियों का संग्रह मात्र 4,036 करोड़ रुपये का रहा। सितंबर और अक्टूबर में भी संग्रह क्रमश: 4,189 करोड़ रुपये और 4,261 करोड़ रुपये का रहा।

यूनिट भुनाने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। अगस्त में 4,178 करोड़ रुपये, सितंबर में 5,945 करोड रुपये और अक्टूबर में 6,384 करोड़ रुपये की निकासी की गई। स्पष्ट है कि वितरक इक्विटी योजनाओं को बेचने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

एक म्युचुअल फंड कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कहा, 'कुछ जाने-माने म्युचअल फंड वितरक अब बीमा योजनाओं की बिक्री की शुरुआत की है क्योंकि इन पर उन्हें कमीशन अधिक मिलता है। इसलिए, शुरुआती शुल्क देने से भी हालात ज्यादा नहीं सुधर रहे हैं।'

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार और बैंकों को म्युचुअल फंड योजनाओं की बिक्री से अब पहले जैसा फायदा नहीं हो रहा है। स्मार्ट निवेशक स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों के जरिए निवेश कर सकते थे, लेकिन नए ग्राहकों की कमी थी। प्रबंध निदेशक ने कहा, 'चिंता की बात यह है कि यूनिटों को भुनाकर निकाले गए पैसों का एक हिस्सा यूनिट संबंध्द बीमा योजनाओं में लगाया जा रहा है।'

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