बिजनेस स्टैंडर्ड - महिंद्रा ने कहा, 'जियो'
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महिंद्रा ने कहा, 'जियो'
अपने ब्रांड जियो के बाजार में उतारने के साथ ही महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को उम्मीद है कि वह तिपहिया वाहनों और छोटे ट्रकों के खरीदारों को अपनी ओर खींचने में सफल होगी
सायंतनी कार /  November 23, 2009

करीब दो साल पहले महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने तिपहिया वाहनों के कारोबार में चुपके  से कदम रखा था।

ये तिपहिया वाहन विश्व में होने वाली मोटर प्रदर्शनी में भले ही अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए, लेकिनछोटे शहरों और कस्बों में, जहां बडे ट्रकों का जा पाना मुश्किल होता है, वहां के लिए ये वाहन काफी फायदेमंद साबित हुए।

इसे महिंद्रा ऐंड महिंद्रा की बेहतर कारोबारी रणनीति ही कही जा सकती है कि इसने इस कारोबार में पहले से ही अपनी धाक जमा चुके बजाज और पियाजियो को पछाड़कर बाजार में 17 फीसदी हिस्सेदारी पर कब्जा जमा लिया। इसकी प्रतिद्वंद्वियों को यह भी मालूम नहीं था कि कंपनी अपने इस नायाब प्रदर्शन के साथ ही कुछ अन्य योजनाओं के लिए जमीन तैयार कर रही है।

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने छोटे ट्रक (जियो) के साथ बाजार में कदम रखा है, जिसकी कीमत तिपहिया वाहनों से कुछ ही अधिक है, लेकिन टाटा मोटर्स और पियाजियो के छोटे ट्रकों से कम है। जियो की कीमत 1,67,000 रुपये है, जबकि तिपहिये की कीमत 1,40,000 रुपये बैठती है। टाटा मोटर्स के छोटे ट्रक एस की कीमत 2,78,000 रुपये है।

महिंद्रा ऑटोमोटिव के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (विपणन) विवेक नायर कहते हैं 'कारोबार में बदलाव लाने के लिए हमें कुछ अलग हटकर करने की जरूरत है। कॉम्पैक्ट ट्रक या छोटे ट्रकों का एक अलग सेगमेंट लाकर हमने कुछ ऐसा ही किया है।' यह बात पूरी तरह स्पष्ट है कि नायर और उनकी टीम तिपहिया और छोटे ट्रकों के खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहती है।

इन वाहनों का कारोबार काफी बडा है। इस बाबत अर्न्स्ट ऐंड यंग के पार्टनर राकेश बत्रा कहते हैं कि ट्रांसपोर्टर हरेक साल 65,000 से 70,000 के बीच तिपहिये की खरीदारी करते हैं, जिसकी कुल कीमत 1,000 करोड रुपये बैठती है।

इसी तरह, ऐसे छोटे ट्रक जो एक टन से अधिक माल की ढुलाई कर सकते हैं, उनकी सालाना बिक्री 90,000 से 1,10,000 यूनिट होती है। इसमें टाटा एस की हिस्सेदारी लगभग 80 फीसदी तक  है। अगर इसे कीमतों में बदलें तो यह सालाना 2,500 करोड़ रुपये की बिक्री है।

जियो का यूएसपी

बत्रा कहते हैं कि तिपहिये और इससे अलग दायरे के वाहन जो 1 टन सामान का परिवहन कर सकते हैं उनके बीच कीमतों में एक बडा अंतर है। लिहाजा, अगर कोई उत्पाद बाजार में आता है जिसकी कीमत इन दोनों के बीच में होती है, साथ ही ईंधन के लिहाज से भी बेहतर होते हैं, वह बाजार में अच्छा कारोबार कर सकती है।

इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि ज्यादातर ट्रांसपोर्टर तिपहिया वाहन किस्तों पर  खरीदते है, इसलिए जियो की खरीदारी करने के लिए उन्हें कोई ज्यादा मशक्कत करने की जरूरत नहीं होगी। खरीदारों के लिए कर्ज के लिए बेहतर विकल्प है जो 18 फीसदी ब्याज पर मिल जाते हैं, जबकि तिपहिये के लिए यह दर 24 फीसदी है।

यहां पर एक महत्त्वपूर्ण सवाल यह खडा होता है कि कंपनी इतनी कम कीमत में बाजार में उत्पाद लाने में कैसे सफल रही? आप मानें या न मानें जियो के विकास में कंपनी को सिर्फ 25 करोड रुपये की लागत आई है। जियो का उत्पाद उत्तराखंड के हरिद्वार में किया जा रहा है जहां पर करों में काफी रियायत दी जाती है।

कीमत ही नहीं, कंपनी का यह भी मानना है कि जियो की क्षमता विकसित करने में वह पूरी तरह सफल रही है। इसकी क्षमता आधा टन माल ढुलाई की है, लेकिन 800 किलोग्राम तक का वजन यह आराम से ढो सकती है। तिपहिया वाहन 300 किलोग्राम से ज्यादा भार वहन नहीं कर सकते हैं।

टाटा मोटर्स के अधिकारी जियो की अपनी ही कंपनी के अन्य वाहनों के साथ किसी तरह की प्रतिस्पध्र्दा नहीं देखते हैं। सभी का यही मानना है कि जियो काफी अच्छा कारोबार करेगी। बकौल कंपनी, सारे अनुमान यही बता रहे हैं कि लंबी दूरी के लिए बड़े ट्रक का इस्तेमाल होता रहेगा, जबकि शहरों में एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल की ढुलाई के लिए छोटे ट्रकों का इस्तेमाल होगा।

जिस बाजार पर पहले हल्के वाणिज्यिक वाहनों का कब्जा था, अब उस पर छोटे ट्रकों का आधिपत्य हो जाएगा। इस बाबत नायर कहते हैं 'शहरों में माल की आंतरिक ढुलाई के लिए छोटे ट्रक काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।'  हालांकि, पियाजियो व्हीकल इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रवि चोपडा की सोच इससे कुछ हटकर है।

चोपडा कहते हैं 'तिपहिया वाणिज्यिक वाहनों की भूमिका को कभी भी कम कर के नहीं आंका जा सकता है। आने वाले समय में कारोबार में गांव-देहात की भूमिका काफी बढ़ेगी और इन क्षेत्रों में तिपहिया वाहन खासे फायदेमंद साबित होंगे। '

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा का दावा है कि जियो एक लीटर में 27 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है, जबकि इसकी तुलना में एस एक लीटर में 16-18 किलोमीटर की दूरी ही तय कर सकती है।

जियो से है उम्मीद

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा अपना सारा ध्यान खर्च की गणना पर ही केंद्रित नहीं करना चाहती है। इसके अलावा थोडा नरम पहलू है जिस पर यह काम कर रही है। यह थोडा संवेदनशील पहलू है। कंपनी चालकों को वह सम्मान दिलाना चाहती है जो उन्हें तिपहिया वाहनों से नहीं मिल पाता है। 

इस बाबत नायर कहते हैं 'वे हमेशा यह महसूस करते हैं कि तमाम मेहनत करने के बाद भी उन्हें वह सम्मान हासिल नहीं हो पाता जो फोर-व्हीलर चालकों को हासिल होता है।' जियो में अलग खूबी है। इसका निर्माण भी इस तरह से किया गया है कि कंपनी इसे लेकर जो दावा कर रही है वह ग्राहकों की उम्मीदों पर पूरी तरह से खरा उतर सके।

इसमें रॉल-ऑन विंडो, केबिन, कार के जैसी स्टीयरिंग और गियरशिफ्ट्स जैसी खूबियां हैं। ये सारी चीजें तिपहिया वाणिज्यिक वाहनों में शायद ही देखने को मिलती है। कंपनी ने अपने इस ट्रक का नाम भी कुछ इस तरह रखा जो हिंदी के शब्द 'जियो' जैसा है।

 अपने इस नए उत्पाद को लेकर कंपनी ने विज्ञापन भी इसी तरह तैयार किया है। 20 नवंबर को टेलीविजन पर शुरू हुए विज्ञापन में दिखाया गया है कि पहले तिपहिया चलाने वाला चालक जियो के साथ अपनी एक नई शुरुआत करता है तो लोग उसे काफी तवज्जो देते हैं।

नायर कहते हैं 'हम उन्हें बताना चाहते हैं कि जियो उनकी जिंदगी को इसी तरह से बदल सकता है जैसा कि उन्हें इससे से अपेक्षा है।' हालांकि, चोपडा कहते हैं कि आधा टन माल ढुलाई की क्षमता वाले इसके खरीदार मुख्य तौर पर बड़े कारोबारी होंगे। यह बात सही भी है क्योंकि जियो ने उनका ध्यान बखूबी अपनी ओर खींचा है।

एक राष्ट्रीय कूरियर और टीवी निर्माता कंपनी ने एक साथ ही कई जियो की खरीदारी के ऑर्डर दे डाले हैं। महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने इंटरनेट पर भी जियो का खासा प्रचार कर रही है। इंटरनेट के अलावा कंपनी अन्य संचार माध्यमों की मदद से दूर-दराज तक जियो का प्रचार-प्रसार कर रही है।

जियो की संभावना

महिंद्रा ऑटोमोटिव के मुख्य परिचालन अधिकारी राजेश जेजुरीकर कहते हैं कि अपने तिपहिया कारोबार से हमें जियो की शुरुआत करने क ी प्रेरणा मिली है।

वह कहते हैं 'तिपहिये कारोबार से ही हमारे मन में यह बात आई कि हमारी पहुंच और अधिक होनी चाहिए। इस वजह से हमने 375 दुकानों के बजाय 500 दुकानों से जियो की बिक्री की योजना बनाई है।'

उपभोक्ता जियो का इस्तेमाल विभिन्न कार्यों के लिए कर सकते हैं। चाहे यह दूध की बोतल की ढुलाई हो या फिर गैस सिलिंडर की डिलिवरी, जियो का इस्तेमाल किसी भी कार्य के लिए किया जा सकता है। आगे चलकर दिल्ली जैसे शहरों में जियो का सीएनजी वैरिएंट भी आ सकता है।

महिंद्रा ऐंड महिंद्रा का कहना है कि  मांग के पूरी रफ्तार पकड़ने पर कंपनी हरेक महीने 3,000 ट्रक का निर्माण कर सकती है। इस समय जियो के साथ महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को बाजार में एस और तिपहिया के बीच वाले सेगमेंट में पहले उतरने का फायदा मिल रहा है। हालांकि, इस क्षेत्र में भी प्रतिस्पध्र्दा जल्द ही तीक्ष्ण हो सकती है।

पियाजियो भी फरवरी 2010 में आधे टन क्षमता वाले वाहन बाजार में उतार सकती है। टाटा मोटर्स भी इस अवधि तक अपने अलग वैरिएंट के साथ बाजार में दस्तक देने की योजना बना रही है। बजाज ऑटो भी इसी तरह से कुछ करने की योजना बना रही है।

बत्रा का कहना है कि चूंकि, जियो इस श्रेणी में पहली होगी, इसलिए यह लोगों के दिलो-दिमाग पर सबसे पहले छा सकती है और आने वाली कंपनियों के लिए यह उदाहरण साबित हो सकती है। जब दूसरी कंपनियां बाजार में उतरेंगी तो उस समय उन पर काफी दबाव होगा। हालांकि, इससे पहले की बाजार में प्रतिस्पध्र्दा तेज हो महिंद्रा ऐंड महिंद्रा अपनी एक अलग छाप छोड़ना चाहती है। 

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