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पश्चिम बंगाल : उद्योग बसेंगे पर जमीन से जो उजड़ेंगे वे कहां रहेंगे!
ईशिता आयान दत्त / कोलकाता November 22, 2009

नई औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की वजह से विस्थापित होने वाले लोगों के पुनर्वास के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं नजर आ रही है, जबकि जमीन पर अधिकार को लेकर इस राज्य में कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं।

प्रदेश सरकार को विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के लिए 30,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना है। इसमें से 7,000 एकड़ जमीन का आवंटन किया जा चुका है और शेष जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में है, लेकिन इससे प्रभावित होने वाले लोगों के लिए कोई ठोस व्यवस्था किया जाना फिलहाल बाकी है।

प्रदेश सरकार में वणिज्य एवं उद्योग मंत्री निरुपम सेन और जमीन एवं भूमि सुधार मंत्री अब्दुर रााक मुल्ला ने कहा कि आंकड़ों को इकट्ठा किया जाना अभी बाकी है। उधर पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम के सूत्रों का कहना है कि जमीन खोने वालों की पूरी जानकारी तभी मिल पाएगी जब परियोजनाएं आवंटित कर दी जाएंगी।

सेन ने कहा, 'हम केवल महत्वपूर्ण एवं बड़ी परियोजनाओं के लिए जमीन का अधिग्रहण कर रहे हैं। ज्यादातर कंपनियों ने जमीन की सीधी खरीदारी की है।' मुल्ला ने कहा, 'जिला कलेक्टरों से आंकड़े एकत्र करने होंगे।' प्रस्तावित परियोजनाओं में लोहे और इस्पात की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

चालू परियोजनाओं के विस्तार के अलावा 1,09,550 करोड़ रुपये निवेश की 10 अन्य इस्पात परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनकी सामूहिक उत्पादन क्षमता 2.8 करोड़ टन की होगी, जिनके लिए 23,590 एकड़ जमीन अधिग्रहण की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा कई विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) भी प्रस्तावित हैं।

वर्ष 2006 से लेकर अब तक 14 सेज को सैद्धांतिक और अन्य 14 सेजों को औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि इनमें बहु-उत्पाद वाले सेज की संख्या केवल 3 है, जिनके लिए 8,000 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। लेकिन इतनी सारी जमीन का अधिग्रहण कोई आसान काम नहीं है। कम-से-कम पश्चिम बंगाल में तो ऐसा कतई नहीं है।

इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा प्रदेश में वाम गठबंधन सरकार की सबसे प्रसिद्ध भूमि सुधार योजना की वजह से पैदा हुई है। इसके कारण राज्य में औसत जमीन स्वामित्व का दायरा एक एकड़ से भी कम रह गया है।

यही वजह है कि सिंगुर में 997 एकड़ जमीन अधिग्रहण के चलते करीब 13,000 लोगों ने जमीन गंवाई थी। इसके अलावा राजनीतिक दलों की ओर से समर्थन लेकर नक्सलियों ने भी इस मसले को उलझा रखा है।
कल पढ़ें रायपुर से रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में विस्थापितों के पुनर्वास के लिए नहीं कोई ठोस नीति
राज्य में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 30,000 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है
अब तक विभिन्न परियोजनाओं के लिए 7 हजार एकड़ जमीन का किया जा चुका है अधिग्रहण
परियोजनाओं के आवंटन के बाद ही मिल पाएंगे विस्थापितों के आंकड़े

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