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पैंटालून : एक नए रंग रूप का जुनून
दिशासूचक
शोभना सुब्रमण्यन /  November 19, 2009

पैंटालून को पुर्नसंरचना से बैलेंसशीट को मजबूत करने में मदद मिलनी चाहिए और इससे शेयरधारकों के लिए वैल्यू तैयार होगा।

पैंटालून खुद को एक नए रूप में ढालने की कोशिश कर रही है जिसका फायदा इसे जरूर मिलना चाहिए। अब यह कंपनी के राजस्व का लगभग 70 फीसदी हिस्सा देने वाले बिग बाजार और फूड बाजार को 100 फीसदी सहयोगी इकाई के तौर पर तब्दील कर रही है।

इसके अलावा कंपनी विदेशी निवेशकों की ज्यादा हिस्सेदारी के लिए भी मंजूरी दे रही है। साथ ही यह निवेशकों को छूट का ऑफर भी दे रही है। विदेशी खिलाड़ियों के साथ रणनीतिक गठजोड़ से शेयरधारकों के लिए वैल्यू तैयार की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय फूड रिटेलरों के साथ साझेदारी से इस सेगमेंट की बिक्री में इजाफा होगा।

इसके अलावा वित्तीय कारोबार मसलन बीमा और फ्यूचर कैपिटल जिसमें पूंजी की जरूरत होती है और इसके लिए उसे मुख्य कंपनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता उसे एक अलग सहयोगी इकाई में बदला जा सकता है। दूसरे आईटी के छोटे कारोबार और ब्रांड डेवलपमेंट की प्रक्रिया के लिए 190 करोड़ रुपये देने पर विचार किया गया है।

पैंटालून को अपनी बैलेंसशीट का फायदा नहीं उठाने की जरूरत है। फिलहाल शुद्ध ऋण करीब 3,800 करोड़ रुपये है जिसमें ऋण और इक्विटी का अनुपात 1.2 गुना है। प्रबंधन इसमें कम करके 0.8 गुना करना चाहती है और अपने बैलेंसशीट को मजबूत करना चाहती है जो स्वागतयोग्य है। इस कंपनी की वृद्धि योजनाओं पर ज्यादा उधारी क ा असर पड़ता जा रहा है।

इस बीच सितंबर की तिमाही में कारोबार बहुत ज्यादा नहीं रहा और यह 1,780 करोड़ रुपये रहा है। वहीं राजस्व में सालाना महज 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह बेहद असंतोषजनक है क्योंकि जून की तिमाही में राजस्व में 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। इस स्टोर के लाइफस्टाइल रिटेल सेगमेंट की बिक्री में त्योहारी मौसम होने के बावजूद महज 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

परिचालन लाभ मार्जिन में 0.5 फीसदी की तेजी आई और यह 10.7 फीसदी हो गया इससे कर्मचारियों पर होने वाले खर्च पर कुछ बचत होगी। कम ब्याज लागत से पैंटालून का शुद्ध लाभ 21 फीसदी हो गया। हालांकि यह कंपनी तिमाही के दौरान ज्यादा स्पेस जोड़ने में सफल नहीं रही।

हालांकि यह 100 लाख वर्ग फीट स्पेस के साथ सबसे बड़ा खिलाड़ी बना रहा और अर्थव्यवस्था में सुधार को भुनाने में कामयाब हो रहा है। अक्टूबर में इसके स्टोर बिक्री में सुधार हुआ। पैंटालून के शेयर में 6 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई और यह बुधवार को 324 रुपये हो गया क्योंकि बाजार में इसकी पुर्नसंरचना योजनाओं को निवेशकों ने हाथों-हाथ लिया। विश्लेषकों का ऐसा अनुमान है कि इस स्टॉक का मूल्यांकन 408 रुपये हैं।

इंडियन होटल्स : कारोबार में वापसी

सितंबर की तिमाही में इंडियन होटल्स के राजस्व में केवल 16 फीसदी की कमी आई और यह 2009-10 की पहली छमाही में 20 फीसदी गिरावट के मुकाबले 307 करोड़ रुपये हो गया।

इससे यह संकेत मिलता है कि होटल में आने वालों की तादाद में इजाफा हो रहा है। निश्चित तौर पर 287 कमरों वाले मुंबई का ताज महल पैलेस के नवीकरण की वजह से बंद कर दिया गया। होटल चेन के परिचालन लाभ मार्जिन में 6.5 फीसदी की कमी आई और तिमाही के दौरान यह महज 18 फीसदी रहा।

इससे परिचालन लाभ में सालाना 43 फीसदी की कमी आई। संयोजित लाभ में सालाना 94 फीसदी तक की कमी आई और यह 4 करोड़ रुपये रहा। सितंबर की तिमाही कंपनी के लिए अच्छी रही क्योंकि उपलब्ध कमरे के राजस्व में अब 29 फीसदी की गिरावट है जो जून की तिमाही में 37 फीसदी कमी थी।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अर्थव्यवस्था में सुधार की वजह से होटल में कमरों की बुकिंग में तेजी आ रही है और यह साल की पहली छमाही के 53 फीसदी की तुलना में 57 फीसदी है। कमरे की औसत दरों में भी सुधार आ रहा है और सितंबर की तिमाही में इसमें सालाना महज 4 फीसदी की गिरावट आई जबकि साल की पहली छमाही तक यह गिरावट 20 फीसदी से ज्यादा थी।

कुछ महीने पहले के मुकाबले कारोबार निश्चित तौर पर बेहतरीन है। उद्योग पर निगाह रखने वालों का कहना है कि सितंबर से पहले की छमाही तक अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाले पर्यटकों की तादाद में लगभग 7 फीसदी की कमी आई थी लेकिन अब इसमें तेजी आ सकती है।

इस बीच बाजार में होटलों की संख्या में इजाफा हो रहा है और प्रतियोगिता भी जबरदस्त रहने वाली है क्योंकि उद्योग के विशषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2010-11 में होटल के कमरे की तादाद में 65 फीसदी तक का सुधार हो सकता है।

वहीं इंडियन होटल्स के घरेलू होटलों के कारोबार के प्रदर्शन में सुधार होना चाहिए वैसे अमेरिका में इस होटल चेन की संपत्ति को इस साल नुकसान होना जारी रह सकता है। इस शेयर का कारोबार 87 रुपये पर हो रहा है जो 2010-11 की अनुमानित कीमत के मुकाबले इसकी कमाई लगभग 23.5 गुना है। विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में आने वाले दिनों में उछाल आ सकता है।

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