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टाटा पॉवर : लागत की कहानी
दिशासूचक
शोभना सुब्रमण्यन /  November 12, 2009

कंपनी ने ज्यादा बिजली की बिक्री की लेकिन ब्याज और मूल्य लागत में कमी से मुनाफे पर असर पड़ा।

ट्रॉम्बे, हल्दिया और जोजोबार में पिछले कुछ महीने से नई इकाइयों को शुरू करने के बाद टाटा पॉवर सितंबर की तिमाही में 17 फीसदी ज्यादा बिजली का उत्पादन करने में सक्षम हो गई और इसने पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 16.5 फीसदी ज्यादा की बिक्री की।

हालांकि ईंधन की लागत खासतौर पर आयातित कोयले की लागत में पिछले साल से 33 फीसदी से ज्यादा की गिरावट हुई और प्राप्तियों में भी 25 फीसदी की कमी आई और यह 4.28 रुपये प्रति यूनिट हो गया। प्राप्तियों में गिरावट आई है और कंपनी मर्चेंट पावर की बिक्री 5.50-6 रुपये प्रति यूनिट औसत टैरिफ की तुलना में ज्यादा पर करती हैं।

पॉवर बिजनेस से कम राजस्व मिल रहा है और तिमाही के दौरान टाटा पावर के कुल राजस्व में 15 फीसदी तक की कमी आई और यह 1,670 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन लाभ में 37.6 फीसदी का इजाफा हुआ हालांकि मूल्य भाव की कमी बहुत ज्यादा थी। ब्याज और कर की दरों से शुद्ध लाभ में 4 फीसदी तक की कमी आई और यह 180 करोड़ रुपये हो गया।

इसके बावजूद कंपनी दूसरी आय के जरिये 120 करोड़ रुपये बना रही है। इसने हाल ही में जीआरडी के जरिये लगभग 1,650 करोड़ रुपये की उगाही की है। टाटा पॉवर ने अपनी बैलेंस शीट का पूरा फायदा नहीं उठाया और उसे अपने परियोजनाओं की फंडिंग के लिए अगले तीन साल तक फंड की जरूरत है।

कंपनी की 4,000 मेगावॉट मुंद्रा यूएमपीपी पर काम बेहतर तरीके से चल रहा है और इसका 800 मेगावॉट का पहला यूनिट सितंबर 2011 में शुरू होने वाला था। वहीं 1050 मेगावॉट के संयुक्त उद्यम के प्रोजेक्ट मैथॉन पॉवर का काम हो रहा है और यह 2010-11 की तिसरी तिमाही में शुरू होना चाहिए।

कंपनी की योजना बिजली उत्पादन क्षमता में पांच चरणों की बढ़ोतरी करने की है जिसे वर्ष 2014 तक मौजूदा 2785 मेगावॉट से बढ़ाकर 13,000 मेगावॉट करना है। विश्लेषकों का कहना है कि कोयले की कम कीमतों से बुमी कोल माइंस के कारोबार को नुकसान हो सकता है जिसमें टाटा पावर की 30 फीसदी हिस्सेदारी है।

हालांकि कोयले की कीमतें अब स्थिर हो रही हैं और टाटा पावर ने खदान में अपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए इसने जो उधार लिया था उसे 75 करोड़ डॉलर का फिर से भुगतान करने की मंजूरी मिलने से खदान से मुनाफा मिलना चाहिए। ज्यादातर भुगतान वर्ष 2014-15 के लिए तय किया गया है और उस वक्त तक मुंद्रा प्लांट से फायदा मिल सकता है।

टाइटन : मध्दम चमक

सोने की कीमतों में लगभग 1,700 रुपये प्रति ग्राम तक की तेजी आई और आने वाले शादी-ब्याह के मौसम के दौरान गहनों की बिक्री थोड़ी कम हो सकती है।

सितंबर की तिमाही में टाइटन के राजस्व में 5 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई और यह 1,150 करोड़ रुपये हो गया नतीजतन परिचालन लाभ में 14 फीसदी की गिरावट हुई। कई तिमाहियों से अब तक गहनों के कारोबार में कोई सार्थक बढ़ोतरी नहीं देखी गई है।

विश्लेषकों के मुताबिक पिछली तीन तिमाहियों में लगभग 8,15 और 11 फीसदी तक की गिरावट हुई। यह सच है कि पिछले साल सोने की कीमतों में तब तेजी देखी गई जब पूरे माहौल में मंदी देखी गई थी। लेकिन जब तक उपभोक्ता ज्यादा खर्च करते हैं तो सोने की कीमतों में तेजी आएगी। टाइटन के परिचालन मुनाफे का दो-तिहाई हिस्सा गहने का है।

गहने का कारोबार घड़ी के कारोबार के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है इसी वजह से कंपनी के परिचालन मार्जिन में 2.2 फीसदी की कमी आई और यह सितंबर की तिमाही में 8.7 फीसदी हो गया। सितंबर की तिमाही में घड़ियों का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा और बिक्री में 2.6 फीसदी की कमी आई।

जून की तिमाही में बिक्री में 21 फीसदी तक का उछाल आया और यह एक बेहतर खबर थी ऐसे में सितंबर की तिमाही का प्रदर्शन काफी झटका देने वाला साबित हुआ। हालांकि बेहतर ब्रांड की ज्यादा बिक्री से कारोबार मुनाफादायक है। बिक्री में बढ़ोतरी होनी चाहिए क्योंकि डीलरों ने फिर से स्टॉक जमा करना शुरू किया।

टाइटन ने अपने स्टोर को खोलने की योजना पर अभी धीरे काम कर रही है खासतौर पर गोल्ड प्लस आउटलेट के लिए क्योंकि उम्मीद के मुताबिक मांग कम है। इसने पहले यह उम्मीद की थी कि अगले साल मार्च तक 120-130 टाइटन आई स्टोर्स खोला जाएगा और अब इस योजना को वापस ले लिया है।

इसकी पहुंच बहुत ज्यादा है और ब्रांड के मजबूत पोर्टफोलियो की वजह से उपभोक्ताओं की मांग और बढ़ती आय का फायदा कंपनी उठा सकती है। वर्ष 2010-11 में टाइटन के राजस्व में लगभग 19-20 फीसदी तक की उम्मीद है जो लगभग 5,300 करोड़ रुपये हो जाएगा।

जबकि शुद्ध मुनाफे में लगभग 16-18 फीसदी तक की बढ़ोतरी का अनुमान है और यह लगभग 270 करोड़ रुपये है। हालांकि 1,370 रुपये की मौजूद कीमत पर स्टॉक का कारोबार काफी महंगा है और यह 2010-11 की अनुमानित कमाई का 22 गुना है।

Keyword: Tata Power : story of cost,
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