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धमाकेदार रही वापसी
मोटा निवेश : एचडीएफसी
विशाल छाबड़िया /  October 18, 2009

एचडीएफसी का प्रदर्शन सितंबर की तिमाही में बाजार की उम्मीदों से कहीं बेहतर रहा। हालांकि इसके मुनाफे में अन्य आय के जरिये तेजी आई।

एक ओर एक साल पहले की तिमाही की तुलना में इसके शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) में भी गिरावट आई। दूसरी ओर कंपनी में स्थिर विस्तार का रुख भी बना रहा और फंसे कर्ज के अनुपात में भी कमी आई। खासतौर पर कर्ज में बेहतर इजाफा हुआ।

मांग में तेजी का रुझान भी नजर आ रहा हैं जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाली तिमाही बेहतर होनी चाहिए। वैसे कम अवधि में बेहद सीमित उछाल की संभावना है।

मिला-जुला रुख

एचडीएफसी का फंड आधारित प्रदर्शन शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) से पता चलता है,उसमें सितंबर की तिमाही में कमी आई। शुद्ध ब्याज आय, ब्याज खर्च और ब्याज का अंतर होता है। साल दर साल एनआईआई में महज 1.8 फीसदी तक की बढ़त हुई।

विश्लेषक यह संकेत देते हैं कि कम कारोबार और एनआईएम में 0.4 फीसदी की कमी से एनआईआई वृद्धि में कमी आई। इसके अतिरिक्त ब्याज दरों में भी पिछले कुछ महीनों में कमी आई है। कंपनी की दूसरी आय, मसलन लाभांश और फीस आधारित आय में 130 फीसदी की उछाल आई और यह 160 करोड़ रुपये हो गया।

इससे कंपनी के कुल आय में 17 फीसदी बढ़ोतरी में मदद मिली। वहीं परिचालन खर्च में 2.5 फीसदी की कमी आई और कर में महज 10 फीसदी की उछाल आई। शुद्ध मुनाफे में सितंबर 2009 में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। खासतौर पर कंपनी को संपत्ति गिरवी रखने के खुदरा क्षेत्र में सरकारी बैंकों से कड़ी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ रहा है। यह अपने विस्तार को 2.2 फीसदी के करीब बनाए रखने में सक्षम था।

एचडीएफसी के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक केकी मिस्त्री का कहना है, 'कंपनी को उम्मीद है कि पिछले पांच सालों में विस्तार 2.15-2.25 फीसदी के दायरे में हुआ। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी का स्थिर विस्तार, फंड की लागत के बेहतर प्रबंधन में दिखाई पड़ रहा है। ऐसे में तिमाही नतीजों के आंकड़ों में किसी भी तरह का उतार-चढाव कोई चिंता की बात नहीं है।'

अछूती गुणवत्ता

भारत और पूरी दुनिया ने आधी सदी के सबसे बड़े संकट का सामना किया है। एचडीएफसी फंसे कर्ज के मोर्चे पर खुद को अछूता रखने की कोशिशों में कामयाब हुई है। कुल कर्ज के फीसदी के तौर पर इसके सकल गैर-निष्पादित कर्ज (एनपीएल) में साल दर साल 0.9 फीसदी की कमी आई।

इसके शुद्ध एनपीएल में 0.2 फीसदी की कमी आई और यह सितंबर की तिमाही में 0.2 फीसदी पर बना हुआ है। कंपनी के प्रबंधन का कहना है कि सितंबर की तिमाही 19वीं लगातार ऐसी तिमाही थी जिसमें एनपीएल पिछले साल की तिमाही के मुकाबले कम है। कंपनी ने खराब कर्ज के 79 फीसदी हिस्से की कवरेज की है और इससे संकेत मिलता है कि परिसंपत्तियों की गुणवत्ता बेहतर है। 

मांग में तेजी

घरेलू आवास के सेगमेंट से मांग आने की वजह से सुधार के संकेत मिल रहे हैं। उम्मीद है कि एचडीएफसी के कोर फंड आधारित आय के आंकड़ों में सुधार होगा। कर्ज की मंजूरी और दूसरे वितरण में सितंबर की तिमाही में साल दर साल 18 फीसदी और 29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

मिस्त्री का कहना है कि इस साल के बाकी महीनों में कर्ज लेने की रफ्तार भी बेहतर ही रहेगी। उनका कहना है, 'कर्ज की मंजूरी और वितरण में भी सलाना 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी की उम्मीद है।' कुछ तिमाहियों तक उम्मीद है कि इनमें तेजी से बढ़ोतरी होगी क्योंकि होम लोन लेने के लिए लोगों की उम्मीदें बढ़ रही हैं।

निष्कर्ष

एचडीएफसी ने मॉर्गेज फाइनैंस कारोबार में अपनी क्षमता को साबित किया है। हालांकि इसे मांग में कमी जैसी स्थिति का सामना भी करना पड़ा। इसके अलावा मार्जिन का दबाव और कड़ी प्रतियोगिता का सामना भी करना पड़ा। खासतौर पर पिछले कई सालों तक इसने अपनी परिसंपत्ति की गुणवत्ता को बनाए रखा है और साथ ही अपनी देनदारियों को भी चुकता किया है।

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