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एफएम रेडियो के तीसरे चरण और हिट्स की नीति इसी साल
आशीष सिन्हा / नई दिल्ली October 14, 2009

दो साल तक सूचना व प्रसारण मंत्रालय में धूल फांकने के बाद निजी एफएम रेडियो के विस्तार का तीसरा चरण और केबल टीवी वितरण तकनीक हेडइंड इन द स्काई (हिट्स) के बारे में नीति इस साल अंत तक तैयार हो जाएगी।

दरअसल इससे जुड़ा हुआ प्रस्ताव नवबंर के पहले हफ्ते में केंद्रीय कैबिनेट के सामने पेश कर दिया जाएगा। सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बताया कि, 'हम एफएम रेडियो के तीसरे चरण और हिट्स के बारे में नवबंर की शुरुआत में कैबिनेट के सामने प्रस्ताव रखेंगे। मुझे उम्मीद है कि इस पर साल के खत्म होने तक कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी।'

इस कदम का केबल टीवी उद्योग और निजी एफएम चैनलों, दोनों पर जबरदस्त असर पड़ सकता है। इस वक्त केबल टीवी से देश के 8 करोड़ घर जुड़े हुए हैं, जबकि निजी एफएम रेडियो चैनलों को देश के 25 फीसदी हिस्से में सुना जा सकता है।

हिट्स से केबल टीवी को तेजी से डिजिटल बनाने में मदद मिलेगी, जो अब तक एनालॉग वितरण प्रणाली पर आश्रित है। इससे मौजूदा केबल टीवी के तारों की 60-70 चैनलों को प्रसारित करने की क्षमता में कम से कम पांच से छह गुना इजाफा करने में मदद मिलेगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक इससे केबल टीवी क्षेत्र में रोजगार के मौके पैदा करने में मदद मिलेगी। डिजीकेबल, डेन, इन-केबल और दूसरी बड़ी केबल टीवी कंपनियों ने हिट्स लाइसेंस हासिल करने की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्हें इसके लिए नीति का इंतजार करना होगा।

इस वक्त सिर्फ एस्सेल समूह की केबल कंपनी, डब्ल्यूडब्ल्यूआईएल के पास हिट्स का इस्तेमाल करने का लाईसेंस है। इस बारे में कंपनी पहले कई शहरों में ट्रायल कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो डिजिटल केबल के आने से उपभोक्ताओं के पास कम कीमत पर ज्यादा चैनल देखने का मौका होगा।

वहीं, तीसरे चरण के एफएम रेडियो विस्तार से मुल्क में करीब 700 नए एफएम चैनल आएंगे। इसमें ज्यादातर लाइसेंस जिला स्तर और छोटे शहरों के लिए दिए जाएंगे। इस वक्त करीब 250 निजी एफएम रेडियो स्टेशन ही देश में काम कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर छोटे और मझोले आकार के शहरों में काम कर रहे हैं, जिनकी आबादी 5-10 लाख तक की है।

एफएम रेडियो कंपनियों की संस्था, एसोसियेशन ऑफ रेडियो ऑपरेशंस ऑफ इंडिया (एआरओआई) के महासचिव उदय चावला ने कहा, 'म्यूजिक रॉयल्टी को लेकर विवाद, खबरों और समसामयिक मुद्दों पर बहस के प्रसारण पर रोक, एक शहर में एक से ज्यादा रेडियो स्टेशन के स्वामित्व पर रोक जैसे मुद्दों के बावजूद हमें एफएम रेडियो के विस्तार के तीसरे चरण का बेसब्री से इंतजार है।'

निजी एफएम सेक्टर में जबरदस्त तरक्की देखने को मिली है। तीन साल पहले यह 400 करोड़ रुपये की कमाई किया करते थे, जो अब 850 करोड़ रुपये हो चुका है।

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