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सांसदों ने की पारदर्शिता की पहल
श्रीलता मेनन / भीलवाड़ा October 14, 2009

राजस्थान के मंत्रियों और सांसदों ने अपने एजेंडे में पारदर्शिता को शामिल करके नई परिपाटी शुरू की है। इस स्वागत योग्य परंपरा को शुरू करने का श्रेय केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री सी पी जोशी को जाता है।

जोशी ने पिछले सप्ताह अपने संसदीय क्षेत्र भीलवाड़ा में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत किए गए कार्यों के सामाजिक ऑडिट के लिए मजदूर किसान शक्ति संगठन के नेतृत्व में 52 गैर-सरकारी संगठनों को बुलाया था।

जोशी से प्रेरित होकर राजस्थान के ग्रामीण विकास मंत्री ने इच्छा जताई कि महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत किए जाने वाले कार्यों के सामाजिक ऑडिट का अगला पड़ाव उनका विधानसभा क्षेत्र कोटा होना चाहिए। अलवर के सांसद जितेंद्र सिंह ने भी ऐसी ही मनसा जाहिर की है।

पारदर्शिता बरतने की पहल करने वाले राजनेताओं की इस सूची में राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री ऐमादुद्दीन अहमद का नाम सबसे अहम है। उन्होंने मांग कर डाली है कि राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र की ओर से मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं का सामाजिक ऑडिट मजदूर किसान शक्ति संगठन समेत अन्य गैर-सरकारी संगठनों से कराया जाना चाहिए।

उन्होंने इसके दायरे में स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सकों एवं अन्य कर्मचारियों को लाने की बात कही है। जाहिर है स्वास्थ्य महकमे के लोग ऐसा कभी नहीं चाहते। मजदूर किसान शक्ति संगठन के निखिल डे ने कहा, 'स्वास्थ्य क्षेत्र के ऑडिट में थोड़ा वक्त लग सकता है, लेकिन ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का इस मामले में अहम योगदान है। इससे यह साबित होता है कि नरेगा से शुरू हुई पारदर्शिता बरतने की यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे स्वास्थ्य क्षेत्र जैसे अन्य सामाजिक क्षेत्रों में भी अपनाई जाने लगी है।'

उल्लेखनीय है कि पिछले 12 अक्टूबर को भीलवाड़ा मे संपन्न सामाजिक ऑडिट में कई चीजें शामिल की गईं। इसके तहत कुल मामलों में लोगों की राय ली गई। 28 मामलों में सरपंचों एवं पंचायत सचिवालय में दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्टों  (एफआईआर) पर गौर किया गया और सरपंच की ओर से वापस किए गए 1,37,000 रुपये के चेक के मामले की जांच की गई, जिसका हिसाब नहीं रखा गया था।

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